- शरण कांबले का जन्म 1993 में हुआ और वे महाराष्ट्र के सोलापुर के गरीब परिवार से हैं, जहां घर में बिजली नहीं थी
- उन्होंने सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और इंजीनियरिंग तथा MTech की डिग्री उच्च अंक प्राप्त कर पूरी की
- 20 लाख रुपये के पैकेज वाली निजी नौकरी छोड़कर UPSC परीक्षा दी और 542वीं रैंक से भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए
कभी घर चलाने के लिए पिता गटर खोदते थे. मां खेतों से सब्जियां लाकर बेचती थीं और पढ़ाई के साथ बेटा भी मां का हाथ बंटाते हुए सब्जियां बेचता था. घर में बिजली तक नहीं थी, लेकिन आंखों में बड़ा सपना था. आज उसी संघर्ष से निकला बेटा शरण कांबले भारतीय पुलिस सेवा का काबिल पुलिस अफसर है. शरण कांबले वर्तमान में राजस्थान के डीग जिले में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहा है. वह साइबर अपराधियों और नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे हैं. 30 सितंबर 1993 को जन्मे IPS शरण कांबले की सफलता की कहानी केवल एक पुलिस अधिकारी बनने की नहीं, बल्कि अभाव से अवसर, संघर्ष से सफलता और शिक्षा से सेवा तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है.
लालटेन की रोशनी से IISc तक पहुंचा सफर
राजस्थान कैडर के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी शरण कांबले महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले हैं. घर में बिजली नहीं थी, लेकिन पढ़ाई को लेकर उनका जुनून कम नहीं हुआ. शरण ने अपनी शुरुआती शिक्षा जिला परिषद और सरकारी स्कूल से पूरी की. उन्होंने दसवीं कक्षा में 95 प्रतिशत और बारहवीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने सांगली के वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से BTech किया और करीब 9.5 CGPA हासिल किया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से MTech किया. सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां लगातार बेहतर होती गईं.

20 लाख का पैकेज ठुकराकर चुनी खाकी वर्दी
MTech के बाद शरण कांबले के सामने करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी का अवसर था. परिवार के लिए यह आर्थिक स्थिति बदल देने वाला मौका हो सकता था, लेकिन उन्होंने निजी नौकरी का रास्ता छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया. कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 542वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित हुए.
सांचोर में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई
IPS बनने के बाद शरण कांबले ने राजस्थान में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं. जालोर जिले के सांचोर में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने ड्रग्स और NDPS मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर विशेष जोर दिया. नशे के खिलाफ पुलिस अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें DGP Disc सम्मान से भी नवाजा गया. वर्तमान में डीग जिले के SP के रूप में उनके सामने साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए पुलिस ने 'ऑपरेशन काउंटडाउन' के तहत साइबर ठगी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. फर्जी बैंक खाते, फर्जी सिम, एटीएम, मोबाइल और ऑनलाइन ठगी से जुड़े नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है. पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत 1,000 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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नशा तस्करों पर भी पुलिस का शिकंजा
साइबर अपराध के साथ-साथ डीग जिला पुलिस की ओर से नशे के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है. नशा तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई तथा तस्करों की गिरफ्तारी पर पुलिस का विशेष फोकस है. सांचोर में नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर चुके शरण कांबले के लिए यह अभियान उनके पुलिसिंग अनुभव की एक और महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. खास बात यह है कि शरण कांबले रात में स्वयं क्षेत्र में निकलकर पुलिस ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं. वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सतर्क रहें और पुलिस व्यवस्था जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से काम करे.
SP की कुर्सी से ज्यादा मैदान पर भरोसा
शरण कांबले कार्यालय में बैठकर केवल अधिकारियों से रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ग्राउंड पर जाकर आम लोगों से सीधे संवाद भी करते हैं. परिवादियों की समस्याएं सुनना, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देना और समाधान प्रक्रिया की लगातार निगरानी करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा है. पुलिसिंग के साथ-साथ खेल और फिटनेस को भी वह अपनी जिंदगी में महत्वपूर्ण स्थान देते हैं. उन्हें क्रिकेट, वॉलीबॉल और जिम वर्कआउट का शौक है. दिसंबर 2024 में उन्होंने 113 किलोमीटर के आयरनमैन ट्रायथलॉन इवेंट में भी हिस्सा लिया था.
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