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बंगाल और असम में भगवा लहर, लेकिन BJP के लिए दक्षिण के दुर्ग में सेंध अब भी मुश्किल क्यों

दक्षिण में पैर जमाने के लिए बीजेपी लंबे अरसे से कोशिश करती रही है. केरलम में वह पहली बार अपने 3 विधायकों को विधानसभा तक पहुंचाने में कामयाब हो गई है, हालांकि तमिलनाडु में 3 सीटों का घाटा हो गया.

बंगाल और असम में भगवा लहर, लेकिन BJP के लिए दक्षिण के दुर्ग में सेंध अब भी मुश्किल क्यों

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जहां पश्चिम बंगाल में जीत की नई इबारत लिख दी है और असम में हैट्रिक लगाकर सभी आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया है. लेकिन तमिलनाडु और केरलम का किला फतह करना अब भी बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी तमिलनाडु में महज 1 सीट जीत पाई और 3 सीटों का घाटा हो गया. हालांकि केरलम में वह अपने 3 विधायकों को विधानसभा तक पहुंचाने में कामयाब हो गई है, जहां पिछली बार उसका सूपड़ा साफ हो गया था. 

केरलम में बीजेपी के लिए अभी तक के चुनावों में कभी ये मुद्दा रहा ही नहीं है कि वह दक्षिण के इस छोटे से तटवर्ती राज्य में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचेगी. आजादी के बाद से केरल की राजनीति कांग्रेस की अगुआई वाले युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और सीपीएम की अगुआई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच झूलती रही है. इस बार भी एलडीएफ को पटकनी देकर यूडीएफ ने कुर्सी हासिल कर ली है. 

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केरल की दो पार्टियों वाली राजनीति में बीजेपी 80 के दशक से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास कर रही है. वोट शेयर के मामले में उसने धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ीं, लेकिन 2016 से पहले विधानसभा में वह अपना खाता नहीं खोल पाई. 2016 में बीजेपी केरल की दो पार्टियों वाली राजनीति में नया इतिहास रचा और एक सीट हासिल की. उस वक्त बीजेपी के ओ राजगोपाल ने तिरुवनंतपुरम की नेमम सीट पर जीत हासिल की थी.  2021 के चुनाव में बीजेपी के हाथों से ये इकलौती सीट भी फिसल गई. 

केरल में सीटों के मामले में बीजेपी भले ही कंगाल रही हो, लेकिन वोटों के मामले में उसकी झोली धीरे-धीरे भर रही है. 1982 में जहां अपने पहले चुनाव में बीजेपी को 2.8 फीसदी वोट मिले थे, वहीं 2016 में एक सीट के साथ उसके वोटों का शेयर बढ़कर 10 पर्सेंट से अधिक हो गया. 2021 में सीट भले ही छिन गई, लेकिन वोट शेयर बढ़कर 11.4 पर्सेंट हो गया. 

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अब 2026 के चुनाव में बीजेपी के वोटों की संख्या भले ही बढ़ोतरी नहीं हुई और कांटा 11.42 फीसदी वोटों पर अटका रह गया. लेकिन सीटों के मामले में वह खुद को लकी कह सकती है. केरल के इतिहास में बीजेपी ने पहली बार 3 सीटें जीत ली हैं. नेमम से राजीव चंद्रशेखर के अलावा चितनूर से बीबी गोपाकुमार और कझकोट्टम से वी. मुरलीधरन बाजी मारने में कामयाब रहे हैं. 

नतीजों से उत्साहित केरल बीजेपी के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस और सीपीएम कह रहे थे कि इस चुनाव में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिलेगी, ये हमारा उन्हें जबाव है. अंतिम नतीजों में केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ 49 सीटों की बढ़त के साथ 89 सीटें जीत ली हैं, वहीं वहीं सत्ताधारी एलडीएफ 57 सीटों के साथ 35 सीटों पर सिमट गई है. 

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पुडुचेरी में एनडीए इस बार भी जीत का परचम लहराने में सफल रही है. एक जमाने में कांग्रेस के गढ़ रहे इस केंद्र शासित प्रदेश में 2021 के चुनावों में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया था. 30 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए गठबंधन ने 16 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार किया था. खुद बीजेपी के खाते में 6 सीटें आई थीं. उसके सहयोगी AINRC को 10 सीटें मिली थीं. अब 2026 के चुनावों में एनआरसी गठबंधन को 2 सीटों का फायदा हुआ है और उसकी सीटें 18 हो गई हैं, हालांकि बीजेपी की अपनी सीटें 4 ही रह गई हैं. 

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तमिलनाडु की बात करें तो वहां इस बार एक्टर विजय की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में धमाका कर दिया है. पार्टी ने 106 सीटें जीत ली हैं. विजय ने डीएमके और एडीएमके दोनों की सीटों में सेंध लगाई है. सत्ताधारी डीएमके जहां 85 सीटों के नुकसान पर महज 74 सीटों पर सिमटती दिख रही है, वहीं एडीएमके को 22 सीटों का घाटा हुआ है और वह 53 सीटों पर जीत हासिल करने की तरफ बढ़ रही है. 

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बीजेपी की बात करें तो द्रविड़ राजनीति वाले इस राज्य में पार्टी का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी ने अपने वोटों की संख्या और सीटों में सुधार किया है. ऐतिहासिक रूप से बताएं तो बीजेपी ने 1980 में अपनी स्थापना के तुरंत बाद तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया था. हालांकि न सीट मिली और न ही वोटों के मामले में कोई सफलता मिली. तमिलनाडु विधानसभा में बीजेपी का पहला खाता 1996 में खुला था, जब सी वेलायुथम ने पद्मनाभपुरम से जीत दर्ज करके सदन में पहुंचे थे. 

उसके बाद 2001 में उसने अलग विचारधारा होने के बावजूद डीएमके से हाथ मिलाया और इस तरह पहली बार बीजेपी के खाते में 4 सीटें आईं. लेकिन ये गठबंधन ज्यादा नहीं टिका. इसके बाद 20 साल तक पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में पहुंचने के लिए संघर्ष करती रही. उसके वोट शेयर में तो मामूली  बढ़ोतरी होती रही, लेकिन विधानसभा में कोई मौजूदगी दर्ज नहीं हो पाई. इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने AIADMK से गठबंधन किया. इस गठबंधन और पार्टी के प्रयासों से बीजेपी 4 सीट जीतने में कामयाब रही. 

2026 के चुनावों में बीजेपी फिर से AIADMK की जूनियर पार्टी बनकर तमिलनाडु के चुनाव में उतरी है. कुल 234 सीटों में से उसने सिर्फ 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. इनमें से ज्यादातर सीटें पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में शहरी क्षेत्र में हैं. हालांकि इस बार पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है और महज 1 सीट (उधाममंडलम) पर उसे जीत मिली है. यहां भी जीत का अंतर महज 976 रहा है. ये दिखाता है कि तमिलनाडु की राजनीति में अपने पैर जमाने के लिए बीजेपी को अभी और मेहनत करने की जरूरत है. 

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