- बंगाल में बीजेपी ने अनुसूचित जाति की 68 में से 51 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जो करीब 75% है
- राज्य में अनुसूचित जनजाति (ST) की सभी 16 सीटों पर 'क्लीन स्वीप' करते हुए शत-प्रतिशत जीत हासिल की है
- असम की 9 SC सीटों में से बीजेपी ने 5 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए गठबंधन ने कुल 8 सीटों पर कब्जा जमाया
असम और पश्चिम बंगाल के हालिया चुनाव की एक खास बात ये भी है कि बीजेपी और उसके नेतृत्व वाले एनडीए को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व सफलता मिली है. इन दोनों राज्यों में बीजेपी ने आरक्षित सीटों को अपने सबसे मजबूत चुनावी किले में बदल दिया है. इतना ही नहीं, एनडीए ने सहयोगी दलों के जरिए दक्षिण में भी अपनी पैठ मजबूत की है.
बंगाल में ऐतिहासिक ध्रुवीकरण से चौंकाया
पश्चिम बंगाल के परिणामों ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है, जहां बीजेपी ने आरक्षित सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का लगभग सूपड़ा साफ कर दिया है. राज्य में अनुसूचित जाति की कुल 68 सीटों में से बीजेपी ने 51 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. यह कुल SC सीटों का लगभग 75 प्रतिशत है. इस भारी जीत ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को महज 17 सीटों पर समेट दिया है.
एसटी सीटों पर 'क्लीन स्वीप' क्या कहता है?
अनुसूचित जनजाति (ST) क्षेत्रों में बीजेपी का प्रदर्शन और भी शानदार रहा है, जहां पार्टी ने सभी 16 सीटों पर 'क्लीन स्वीप' करते हुए शत-प्रतिशत जीत हासिल की है. इस जीत के पीछे मतुआ समुदाय का एकतरफा ध्रुवीकरण और उत्तर बंगाल व जंगलमहल जैसे जनजातीय इलाकों में बीजेपी की गहरी पैठ को मुख्य कारण माना जा रहा है. कुल मिलाकर बंगाल की 84 आरक्षित सीटों में से 67 पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया है. ये राज्य की राजनीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है.
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असम में एनडीए का अभेद्य आरक्षित किला
असम में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखी है, जहां बीजेपी और उसके सहयोगियों ने मिलकर आरक्षित सीटों पर अपना वर्चस्व स्थापित किया. असम की 9 SC सीटों में से बीजेपी ने 5 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए गठबंधन ने कुल 8 सीटों पर कब्जा जमाया. यहां कांग्रेस को केवल एक सीट- नौबोइचा से संतोष करना पड़ा.
जनजातीय सीटों पर रणनीति सफल
असम की 19 ST सीटों में से बीजेपी ने 13 सीटें पर फतह हासिल की और अपने सहयोगियों- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद के साथ मिलकर सभी 19 सीटों पर जीत का परचम फहरा दिया. राज्य में हुए परिसीमन ने भी इस जीत में बड़ी भूमिका निभाई, जिससे जनजातीय आरक्षित सीटों की संख्या में वृद्धि हुई. बीपीएफ जैसे सहयोगियों के साथ मजबूत जनजातीय लामबंदी ने एनडीए को ऊपरी असम और पहाड़ी क्षेत्रों में अपराजेय बना दिया.
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दक्षिण भारत में एनडीए की बढ़ती धमक
उत्तर और पूर्वोत्तर के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी एनडीए ने आरक्षित सीटों पर अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है. तमिलनाडु में एनडीए के सहयोगी दल एआईएडीएमके ने 46 एससी आरक्षित सीटों में से 9 पर जीत हासिल की और 2 एसटी सीटों में से 1 सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. वहीं, पुडुचेरी में एनडीए की सहयोगी पार्टी एआईएनआरसी ने 5 एससी आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में से 2 पर जीत हासिल की है.
इन चुनाव परिणामों से साफ है कि बीजेपी अब केवल शहरी या सामान्य सीटों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसने देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आरक्षित वोट क्षेत्र में भी अपने जनाधार का विस्तार किया है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में एससी-एसटी सीटों पर मिली यह प्रचंड जीत पार्टी के लिए भविष्य की राजनीति का एक नया रोडमैप तैयार करती दिख रही है.
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