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Explainer: अंग, बंग और कलिंग की अतित में आर्थिक-सांस्कृतिक ताकत, जिसके बारे में मोदी ने समझाया

अंग, बंग और कलिंग यानी बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा में बीजेपी की जीत पूर्वी भारत में राजनीतिक बदलाव का संकेत है. यह जीत बीजेपी के लिए काफी अहम है.

Explainer: अंग, बंग और कलिंग की अतित में आर्थिक-सांस्कृतिक ताकत, जिसके बारे में मोदी ने समझाया
  • पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने पहली बार सरकार बनाने में सफलता हासिल कर पार्टी के लिए नया इतिहास रचा
  • अंग, बंग और कलिंग का मतलब बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं
  • बंगाल की जीत से बीजेपी को पूर्वी भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से मजबूत आधार मिला है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का रास्ता साफ हो गया है. बीजेपी पहली बार बंगाल में सरकार बनाने में सफल हो पाई है. कभी बीजेपी यहां दो अंकों में तक सीट नहीं निकाल पा रही थी. 2016 के चुनावों में पार्टी को महज 3 सीटें मिली थीं, वहीं 2026 के चुनाव में बीजेपी बंगाल में दोहरा शतक के करीब पहुंच गई है. बंगाल की जीत बीजेपी के लिए बेहद खास है. यहां पार्टी कई दशकों से जमीन पर संघर्ष कर रही है. वैचारिक रूप से भी बीजेपी के लिए यह बड़ी जीत है. बंगाल की ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी 'अंग,बंग और कलिंग' की सत्ता पर काबिज हो जाएगी. आखिर यह अंग, बंग और कलिंग क्या है और यह बीजेपी के लिए इतनी खास क्यों है? आइए समझते हैं.

क्या है 'अंग, बंग और कलिंग'?

भारतीय राजनीति में 'अंग, भंग और कलिंग' का ऐतिहासिक रूप से काफी महत्व रहा है. अंग का मतलब वर्तमान बिहार खासतौर पर भागलपुर और मुंगेर का क्षेत्र है. वहीं बंग का अर्थ 'पश्चिम बंगाल' है. इसके अलावा कलिंग यानी वर्तमान ओडिशा है. यह तीनों क्षेत्र मौर्य साम्राज्य से ही भारतीय राजनीति में काफी अहम हैं. ऐतिहासिक रूप से ये तीनों क्षेत्र काफी समृद्ध माने जाते हैं. एक समय तक यही भारत की दिशा और दशा तय करते थे.

बीजेपी का यहां जीतना बड़ा टर्निंग पॉइंट

बंग यानी बंगाल विजय के बाद अब यह तीनों क्षेत्र बीजेपी के हो चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हालिया चुनावी रैलियों में इन तीनों क्षेत्रों के त्रिकोण का जमकर उपयोग किया. बीजेपी का मानना है कि इन तीनों राज्यों में पार्टी की सरकार का होना देश के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है.

आखिर क्यों है यह इतना खास?

पश्चिम बंगाल पहले लेफ्ट और फिर टीएमसी का गढ़ रहा. लेकिन इस बार बंगाल में भगवा लहर देखने को मिली है. बंगाल राज्य ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध रहा है. एक समय था जब बंगाल में ही देश की राजधानी थी. बंगाल का कल्चर और आर्थिक ताकत भी देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी बेहतर थी. इसके अलावा ओडिशा और बिहार के हिस्से का भी महत्व है. बीजेपी 2014 के बाद से ही देश के इस पूर्वी हिस्से पर फोकस कर रही है. बिहार, बंगाल और ओडिशा के इस बड़े हिस्से में बीजेपी की सरकार बनने से बुनियादी ढांचे, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर का निर्माण ज्यादा तेजी से हो सकता है. इसके अलावा बंगाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है. ऐसे में केंद्र की सत्ता में होने की वजह से बीजेपी के लिए यह जीतना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है.

आर्थिक रूप से भी है मजबूत

इसके अलावा अंग, बंग औ कलिंग या इलाका संसाधनों से भरा हुआ है. कलिंग यानी ओडिशा में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क और कोयले जैसे खनिज हैं. वहीं अंग यानी बिहार में मानव संसाधन और कृषि की अपार संभावनाएं हैं. बंग यानी पश्चिम बंगाल के पास विशाल समुद्री तट और बंदरगाह हैं. इन तीनों राज्यों के आर्थिक तालमेल से एक विशाल इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन सकता है.

इंटरनेशनल बॉर्डर का इलाका, सुरक्षा के लिहाज से जरूरी

बीजेपी के लिए इन तीनों में सबसे जरूरी राज्य पश्चिम बंगाल ही है. बंगाल ऐसा राज्य है, जो बांग्लादेश, नेपाल और भूटान की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा हुआ है. केंद्र की बीजेपी सरकार बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है. कुछ साल पहले केंद्रीय गृहमंत्रालय ने बांग्लादेश सीमा पर फेसिंग लगाने की पहल की थी. लेकिन बंगाल की ममता सरकार ने BSF को जमीन नहीं दी. यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकार भी लगाई थी. ऐसे में बंगाल जीतने के बाद यहां भी डबल इंजन की सरकार होगी. केंद्र सरकार सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, तस्करी और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से ज्यादा कड़ाई से निपट सकेगी.

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राजनीतिक लिहाज से भी बीजेपी होगी मजबूत

ओडिशा, बंगाल और बिहार तीनों ही राज्यों में बीजेपी लंबे समय तक सत्ता से दूर रही. ओडिशा और बिहार में क्षेत्रीय दलों के पास सत्ता की चाबी रही तो बंगाल में लेफ्ट और फिर टीएमसी का दबदबा रहा था. ओडिशा और बिहार में बीजेपी पहले ही अपना मुख्यमंत्री बनाने में सफल हो चुकी है वहीं बंगाल में भी बीजेपी का ही सीएम बनना तय है. बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में बीजेपी का मजबूत आधार बनाना इस बात का संकेत है कि देश की राजनीति अब पूरी तरह से नेशनल नैरेटिव की ओर मुड़ चुकी है और क्षेत्रीय क्षत्रपों का एकाधिकार टूट रहा है. इसके साथ ही बंगाल, ओडिशा और बिहार तीनों ही आबादी और सीटों की संख्या के हिसाब से बड़े राज्य हैं. यहां बीजेपी के मजबूत होने से राज्यसभा में भी सीटें बढ़ेंगी और पार्टी संसद में मजबूत होगी.

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