- रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन में 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर शनिवार रात न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है
- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज अभी भी फंसे हुए हैं
- शिपिंग महानिदेशालय ने अब तक 513 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी में मदद की है
7.7 लाख बैरल कच्चा तेल का स्टॉक लेकर रूसी तेल टैंकर 'एक्वा टाइटन' (Aqua Titan) के शनिवार, 21 मार्च की रात को न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने की संभावना है. मरीन ट्रैफिक डॉट कॉम के मुताबिक, 'एक्वा टाइटन'अभी लक्षद्वीप सागर (Laccadive Sea) में है और न्यू मैंगलोर बंदरगाह शनिवार रात तक पहुंच सकता है.
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विदेश सचिव राजेश सिन्हा ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर 'एक्वा टाइटन' भारत की ओर मोड़ दिया गया है. इसमें 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है और यह 21 मार्च को भारत के न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा."
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इससे पहले, 28 फरवरी को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पिछले 21 दिनों में चार भारतीय-ध्वज वाले ज़हाज तेल और गैस का स्टॉक लेकर भारत पहुंच चुके हैं.

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ अब भी फंसे हुए हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पूर्वी इलाके में 2 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ जिसमें से एक तेल का टैंकर है.
जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ के सभी 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी जहाज संबंधी घटना सामने नहीं आई है.
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) के आसपास दुनियाभर के देशों के करीब 700 जहाज पिछले 21 दिनों से फंसे हुए हैं, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से वॉर ज़ोन बना हुआ है.
इसकी वजह से मध्य पूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है, जिस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कई दिनों से $100 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे देश पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का करीब 85 फ़ीसदी कच्चा तेल 40 देशों से आयात करता है.
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