- अमेरिका और ईरान के बीच की जंग 107 दिन बाद खत्म, दोनों देशों के बीच शांति डील फाइनल, अब शुक्रवार को लगेगी मुहर
- ईरानी मीडिया ने इस डील के मसौदे की कई अहम बातें सामने रखी हैं- एक शर्त है कि ईरान की जब्त संपत्ति जारी होगी
- 30 दिनों के भीतर होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी- रिपोर्ट
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग 107 दिन बाद आखिरकार खत्म हो गई है. दोनों देशों ने घोषणा की है कि शांति समझौता पर बातचीत फाइनल हो चुकी है और इस पर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से साइन किया जाएगा. इस समझौते को पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र में कई महीनों से जारी तनाव कम होगा. वैसे तो समझौते की सभी शर्तों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरानी मीडिया ने इसके मसौदे (ड्राफ्ट) की कई अहम बातें सामने रखी हैं.
ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग, MoU) के मसौदे की जानकारी दी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, मसौदे में ये प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
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- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम यानी सीजफायर होगा
- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा
- 30 दिनों के भीतर होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी
- अमेरिका अपनी सेनाएं ईरान से वापस बुलाएगा
- 30 दिनों के भीतर "ईरान की व्यवस्था" के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा
- अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करेंगे
- ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों पर लगे प्रतिबंध समाप्त किए जाएंगे
- ईरान दोबारा यह वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
- अमेरिका यह वादा करेगा कि वह क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाएगा और ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा
मेहर न्यूज एजेंसी ने यह भी बताया कि अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की जब्त की गई विदेशी संपत्तियों (फ्रोजन फंड्स) का कम से कम आधा हिस्सा यानी 12 बिलियन डॉलर जारी नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा नहीं लिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती. रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी.
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