अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौते का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला. सुबह 58 पैसे की मजबूती के साथ खुला रुपया डॉलर के मुकाबले 47 पैसे की बढ़त के साथ बंद हुआ. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.71 प्रति डॉलर के लेवल पर बंद हुआ. इससे पहले सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे मजबूत होकर 94.60 पर पहुंच गया.
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने भी रुपये को समर्थन दिया. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 94.70 पर खुला और बाद में बढ़कर 94.60 के स्तर तक पहुंच गया. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 67 पैसे की तेजी के साथ 95.18 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
डॉलर कमजोर, कच्चा तेल फिसला
अमेरिका और ईरान ने 107 दिनों से जारी युद्ध को समाप्त करने और दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बना ली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इस समझौते की घोषणा की. इस खबर के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम हुआ और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कम तेल कीमतें राहत की खबर मानी जाती हैं.
छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.22 % गिरकर 99.53 पर आ गया. वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत फ्यूचर्स ट्रेड में 4.66 % गिरकर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय रुपये को अतिरिक्त समर्थन मिला.
शेयर बाजार में जोरदार तेजी
घरेलू शेयर बाजारों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,112.70 अंक चढ़कर 76,648.74 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी 335.55 अंक की बढ़त के साथ 23,956.40 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. हालांकि, एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को 1,082.18 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की थी. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 5 जून को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 711 मिलियन डॉलर घटकर 681.61 अरब डॉलर रह गया. विदेशी मुद्रा ऐसेट्स में कमी इसकी प्रमुख वजह रही.
जानिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिका-ईरान शांति समझौते और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई गिरावट का रुपये पर सकारात्मक असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इससे वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स पर दबाव काफी कम हो जाएगा. विजयकुमार के अनुसार, रुपया 20 मई को डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले दिनों में भी इसकी मजबूती जारी रह सकती है. उनका अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 94.80 से 94.60 के दायरे में कारोबार कर सकता है, जबकि आगे और मजबूती की भी संभावना बनी हुई है.
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