- ऑपरेशन सिंदूर का आज एक साल पूरा हो गया है, भारत में कई जगह कार्यक्रम
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हथियारों ने पाकिस्तान को ध्वस्त कर दिया था
- ब्रह्मोस, आकाश जैसे हथियारों की बदौलत भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को घुटनों पर ला दिया
ऑपरेशन सिंदूर का एक साल पूरा हो गया है. पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिये भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. आज ही के दिन, साल 2025 में सेना ने POK और पाकिस्तान के 9 जगहों पर मौजूद आतंकी ठिकाने को तबाह कर दिया था. यह पहली बार था जब सेना ने POK के साथ पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था. सबसे बड़ी बात ये थी कि पाकिस्तान को इस हमले की कानों-कान खबर नही लगी. बाद में जब पाकिस्तान को होश आया तो उसने जवाबी कार्रवाई की. आखिर उसे अपनी आवाम को कुछ तो दिखाना था. लेकिन यहां भी भारतीय सेना के हथियारों के आगे उसे मुंह की खानी पड़ी. भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल और अकाश एयर डिफेंस का तोड़ पाकिस्तान के पास तो था ही नहीं. ब्रह्मोस का खौफ तो इतना रहा कि पाक पीएम शहबाद शरीफ ने खुद इस बात को कबूल कर लिया.
पिनाका का तो टेस्ट ही नहीं हुआ
वहीं भारत के मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर पिनाका मिसाइल का इस्तेमाल तो नहीं हुआ, लेकिन इसके बार्डर पर तैनात होने मात्र से पाकिस्तान के हौसले पस्त हो गए. उसे समझ आ गया कि इस हथियार का कोई तोड़ नहीं है. कुल मिला कर देखें तो भारत के हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया. यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने भारतीय वेपन सिस्टम्स को लेकर रुचि दिखाई है. कई देश इन हथियारों को खरीदने के लालयित हैं. बड़ी बात ये कि यह तीनों हथियार ऐसे है जिनका मुकाबला दुनिया के किसी भी अत्याधुनिक वेपन सिस्टम से किया जा सकता है. अब यह जांच और परखा हुआ सिस्टम हो चुका है जिसकी गूंज पाकिस्तान को बरसों सुनाई देगी. तो एक-एक कर के इन तीनों वेपन सिस्टम की खासियत के बारे में जान लेते हैं.

पिनाका का तो टेस्ट ही नहीं हुआ
ब्रह्मोस - भारत की शान
ये भारत के सबसे घातक हथियार माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार इस मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था. सुखोई लड़ाकू विमान से दागी गई इस मिसाइल ने पाकिस्तान पर इतना कहर बरपाया कि वह आजतक संभल नही पाया है. बड़ी बात ये कि वह पता होते हुए भी इस मिसाइल के हमले को रोक नही पाया. यह दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसॉनिक मिसाइलों में से एक है. इसकी रफ्तार आवाज से भी तीन गुना तेज यानी लगभग करीब 3700 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसे जमीन , आसमान और समुद्र से फायर किया जा सकता है . इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर बताई जाती है. यह 300 किलोग्राम तक के विस्फोटक ले जाने में सक्षम है. इसका निशाना भी काफी सटीक होता है. एक बार लॉन्च होने के बाद अपने टारगेट को ढ़ूंढ़ कर तबाह कर देती है. साथ ही यह बहुत लो लेवल यानी कम ऊंचाई पर फ्लाई करता है जिस वजह से दुश्मन के रडार इसे ट्रैक नही कर पाते. भारत-रूस द्वारा मिलकर बनाई इस मिसाइल को खरीदने के लिए कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई है. हाल ही में ये भी खबर आई है कि वियतनाम ने इस हथियार को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.

आकाश ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे
आकाश - स्वदेशी, सटीक, घातक
अब अगर देसी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की बात करें तो इसने भी जंग में शानदार काम किया. इसके डर के मारे कोई भी पाकिस्तानी फाइटर जेट भारतीय सीमा के पास उड़ने की हिम्मत तक नही जुटा पाया. यह एक ऐसी अभेद्य दीवार बन गया जिसके आगे पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल घुटने टेकते नजर आए. आकाश एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. यह दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल और ड्रोन्स को हवा में ही निशाना बना सकता हैं. इसकी गति है करीब 3000 किलोमीटर प्रतिघंटा बताई जाती है. रेंज की बात करें तो यह 25 से लेकर 30 किलोमीटर तक के टारगेट को मार सकता है. खास बात है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों को हिट कर सकता है. यह सिस्टम अपने रडार की मदद से पहले दुश्मन के हवाई हमले की पहचान करता है. बहुत कम समय में उसे ट्रैक कर बर्बाद करने के लिये लॉन्च हो जाता है. जब एक बार आकाश लॉन्च हो गया तो दुश्मन के तबाह होने की गारंटी 100 फीसदी है.

ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान को दिया बड़ा घाव
पिनाका - सिर्फ तबाही
अगर पिनाका की बात करें तो इस हथियार का कोई तोड़ नही है. यही वजह है कि सेना ने इसे राजस्थान बार्डर के हटाकर जम्मू-कश्मीर से लगी POK की सरहद पर तैनात कर दिया था. इससे पहले भारत इसे फायर करता, पाकिस्तान ने पहले ही हथियार डाल दिए. लिहाजा इसके इस्तेमाल की नौबत ही नही आई. यह इतना खतरनाक हथियार है इसको फ्रांस और आर्मेनिया खरीदना चाहते हैं. यह भारत का मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम हैं जिसे डीआरडीओ ने तैयार किया है. यह बहुत कम समय में दुश्मन के ठिकानों पर रॉकेट फायर करता है. एक रॉकेट से दूसरे के बीच समय इतना कम होता है कि दुश्मन को संभलने का मौका ही नही मिलता. एक पिनाका बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं. हर लॉन्चर में 12 ट्यूब होते हैं. यानी एक बार में एक साथ कुल 72 रॉकेट दागे जा सकते हैं. ये सभी रॉकेट सिर्फ 44 सेकंड में दागे जा सकते हैं और फायरिंग के तुरंत बाद लॉन्चर्स अपनी लोकेशन बदल लेते हैं, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. सेना में पहले से तैनात पारंपरिक पिनाका बैटरियों की मारक सीमा 37 किमी थी. लेकिन अब एक्सटेंडेड रेंज के साथ यह 75 किमी से अधिक तक तबाही मचा सकता है. इसकी पूरी बैटरी एक साथ दागे जाने पर 1,000 x 800 मीटर क्षेत्र को पूरी तरह नष्ट कर सकती है.
कुल मिला कर देखें तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दुनिया भर की दिलचस्पी भारत के हथियारों में हुई है. सभी देशों को ये समझ आ रहा है कि भारत के रक्षा उत्पाद काफी भरोसेमंद हैं. इस बढ़ती हुई साख का असर भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट पर भी दिखा. आंकड़े कहते हैं कि भारत का Domestic Defence Production, Financial year 2025-26 में, 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंच गया है. इसके अलावा हमारा Defence Export भी, 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंच गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जाहिर तौर पर इसमें प्राइवेट कंपनियां भी हैं. लेकिन कुल मिलाकर नाम भारत का है.
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