- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी, 2026 को लोक सभा में बजट 2026-27 पेश करेंगी
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों ने पूंजी निवेश बढ़ाने के लिए विशेष सहायता योजना पर चर्चा की
- विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में चार लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को लोक सभा में इस साल का बजट पेश करेंगी. इससे पहले वित्त मंत्रालय में बजट 2026-27 से जुड़े बजटीय प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की कवायद जारी है. इस मामले में वित्त मंत्री ने शनिवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ एक लंबी बैठक कर बजट के प्रारूप पर महत्वपूर्ण चर्चा की.
वित्त मंत्री के साथ बैठक में क्या हुआ?
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री के साथ बैठक के दौरान राज्यों में पूंजी निवेश बढ़ने के लिए विशेष सहायता योजना को महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसेट क्रिएशन में तेजी लाने और पूंजी निवेश को समर्थन देने में मदद मिलेगी.

राज्यों ने इस बात पर दिया खास जोर
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, "राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में विचार के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. विशेष रूप से, कई प्रतिभागियों ने राज्यों को कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए फंड्स मुहैया कराने से जुड़ी विशेष सहायता योजना को अधिक आवंटन के साथ जारी रखने पर जोर दिया. क्योंकि यह परिसंपत्ति निर्माण में तेजी लाने में सहायक होगा और राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी निवेश को समर्थन देती है.
निर्मला सीतारमण मे दिया कौन सा आश्वासन?
बता दें कि 2020-21 से केंद्र सरकार पूंजी निवेश बढ़ने के लिए विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों को 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी कर चुकी है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्री ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी और 2026-27 के बजट को तैयार करते समय उन पर उचित रूप से विचार किया जाएगा.
बजट पर बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?
इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी; मणिपुर के राज्यपाल; गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री; अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री; राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री मौजूद रहे. आर्थिक मामलों, व्यय और राजस्व विभागों के सचिव और केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए.
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