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जिस पार्टी ने कभी एक सीट भी नहीं जीती, उसमें मर्ज होने जा रहे TMC के 20 बागी सांसद; NCPI की पूरी कहानी

तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में मर्ज होने का फैसला लिया है. यह बंगाल में ही रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है.

जिस पार्टी ने कभी एक सीट भी नहीं जीती, उसमें मर्ज होने जा रहे TMC के 20 बागी सांसद; NCPI की पूरी कहानी
लोकसभा स्पीकर के साथ टीएमसी के बागी सांसद.
IANS

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बगावत अब एक कदम आगे और बढ़ गई है. टीएमसी के बागी सांसदों की नेता काकोली घोष ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बताया कि बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में मर्ज होने जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर से संसद में टीएमसी से अलग बैठने की जगह मांगी है.

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ही तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद बागी हो गए हैं. अभी तक 20 सांसदों के बागी होने की बात सामने आ रही थी. हालांकि, रविवार को काकोली घोष ने उनके साथ 22 सांसदों के होने का दावा किया है.

वहीं, टीएमसी के बागी सांसदों के NCPI से मर्ज होने की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सांसदों को डिसक्वालिफाई करने की मांग की है.

बागी सांसदों का क्या है कहना?

टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा. इसमें उन्होंने बताया कि वे NCPI से मर्ज करना चाहते हैं. हालांकि, बाद में बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने बताया कि वे लोग पहले ही NCPI के साथ मर्ज कर चुके हैं.

लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद काकोली घोष ने कहा कि 'हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है और हमने अलग बैठने के लिए अलग व्यवस्था के लिए स्पीकर को एक पत्र दिया है. हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो जाएंगे और एनडीए को समर्थन करेंगे.'

'असली टीएमसी' कौन है? इस बारे में सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि इसका फैसला अदालत करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी के सिंबल 'दो फूल' पर अपना दावा पेश करेंगे.

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लेकिन यह पार्टी है कौन है?

NCPI त्रिपुरा में एक रजिस्टर्ड पार्टी है. हालांकि, इसे मान्यता नहीं मिली है. इसने पिछले त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसका चुनाव चिह्न 'पेन की नीब' है, जिसके आसपास से किरणें निकल रही हैं. दिलचस्प बात ये है कि टीएमसी के बागी सांसद जिस NCPI में मर्ज होने जा रहे हैं, उसने कभी एक सीट भी नहीं जीती है.

इस पार्टी के उम्मीदवार राजनीतिक रूप से लगभग अनजान हैं. राजनीतिक हलकों में इनका नेतृत्व के बारे में भी ज्यादा कुछ नहीं पता है. इस पार्टी की अगुवाई कांग्रेस के कुछ पूर्व नेता शामिल थे. पश्चिम बंगाल के शांतनु दास ने त्रिपुरा के पिछले चुनाव में टिकट बांटने का काम संभाला था. 

चुनाव आयोग के मुताबिक, त्रिपुरा विधानसभा में इस पार्टी ने 2 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे और दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. पार्टी को सिर्फ 822 वोट मिले थे.

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कितनी पुरानी है पार्टी?

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) 2022 में बनी थी. हालांकि इसका रजिस्ट्रेशन 20 जनवरी 2023 को पश्चिम बंगाल में हुआ था. पार्टी को अब तक 1,13,075 रुपये का चंदा मिला है. इस पार्टी का ऑफिस पश्चिम बंगाल के हावड़ा में है. इस पार्टी की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू हैं. असम और त्रिपुरा में भी इस पार्टी के दफ्तर हैं.

इस बीच एक तस्वीर सामने आई है, जो 10 मई की है. इस तस्वीर में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और उत्तिया कुंडू साथ दिख रहे हैं. उत्तिया कुंडू NCPI की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू के पति हैं.

बागियों ने इसमें मर्जर का फैसला क्यों लिया?

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि बागी नेताओं ने संभावित कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए एक साथ किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है. बागी गुट ने यह भी ऐलान किया है कि पूरे पश्चिम बंगाल में NCPI के दफ्तर खोले जाएंगे.

फिलहाल, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 27 सांसद हैं. सितंबर 2024 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम के निधन के बाद से उत्तर 24 परगना जिले की बशीरहाट सीट खाली है.

चूंकि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद बागी हो गए हैं और उन्होंने दूसरी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है, इसलिए उन पर दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू नहीं हो सकते हैं.

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