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IPAC रेड मामले में ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाबी हलफनामा, ED पर लगाए कई आरोप

ममता के हलफनामे में आरोप लगाए गए कि ED का मकसद तलाशी की आड़ में AITC के गोपनीय राजनीतिक डेटा की अवैध चोरी करना था.  ED पॉलिटिकल डेटा की गैर-कानूनी चोरी की कोशिश कर रही थी. ED आने वाले असेंबली चुनावों के लिए TMC कैंडिडेट्स की लिस्ट ले जाने आई थी.

IPAC रेड मामले में ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाबी हलफनामा, ED पर लगाए कई आरोप

IPAC रेड मामले में ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे में  ED पर कई आरोप लगाए गए. जैसे ED का मकसद तलाशी की आड़ में AITC के गोपनीय राजनीतिक डेटा की अवैध चोरी करना था.  ED पॉलिटिकल डेटा की गैर-कानूनी चोरी की कोशिश कर रही थी. ED आने वाले असेंबली चुनावों के लिए TMC कैंडिडेट्स की लिस्ट ले जाने आई थी. ईडी के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर हमला किया और IPAC कार्यालय में घुसपैठ कर यह तय करने का प्रयास किया कि उनकी जांच कौन करेगा, जो कानून के तहत अनुचित है.

बता दें कि IPAC रेड मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (AITC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. यह हलफनामा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सहायक निदेशक निशांत कुमार द्वारा दायर याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है. ममता बनर्जी ने हलफनामे में कहा है कि ED द्वारा की गई तलाशी पूरी तरह से बहानेबाजी थी, जिसका उद्देश्य तलाशी की आड़ में AITC के गोपनीय राजनीतिक डेटा की अवैध चोरी करना था.  उन्होंने कहा कि ED के आरोप और राज्य सरकार का पक्ष ऐसे तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनके लिए विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता है और इनका निपटारा रिट क्षेत्राधिकार में नहीं बल्कि ट्रायल के दौरान ही हो सकता है.  हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि ED के अधिकारी गंभीर अवैधता के आरोपी हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से अधिक समय तक पार्टी के एक ठेकेदार के कार्यालय में कथित तलाशी के बहाने अनधिकृत प्रवेश किया और इस दौरान AITC का गोपनीय डेटा चुराया.

इसके साथ ही यह भी आरोप है कि तलाशी के दौरान राज्य पुलिस अधिकारियों के साथ बाधा और मारपीट की गई. इन घटनाओं के संबंध में पश्चिम बंगाल में चार FIR दर्ज की गई हैं.  ममता बनर्जी ने कहा कि इन परिस्थितियों में ED द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका आरोपियों द्वारा यह तय करने का प्रयास है कि उनकी जांच कौन करे, जो कानूनन अस्वीकार्य है.  हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जब मुख्यमंत्री दोनों परिसरों पर पहुंचीं तो उन्होंने ED अधिकारियों से केवल इतना अनुरोध किया कि पार्टी का डेटा, उससे जुड़े डिजिटल उपकरण और प्रिंटेड फाइलें वापस लेने की अनुमति दी जाए. ED अधिकारियों ने इस पर कोई आपत्ति नहीं की और कुछ उपकरण व फाइलें वापस लेने की अनुमति दी गई.

इसके बाद ममता बनर्जी वहां से चली गईं ताकि तलाशी में किसी प्रकार की असुविधा न हो. ममता ने यह भी रेखांकित किया कि ED की अपनी पंचनामाओं में दर्ज है कि तलाशी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से हुई और यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री के वहां से जाने के काफी बाद तक जारी रही.  हलफनामे में साफतौर पर कहा गया है कि ममता बनर्जी ने किसी भी स्तर पर ED की कार्रवाई में बाधा नहीं डाली. उनकी मौजूदगी केवल AITC की गोपनीय और स्वामित्व वाली जानकारी को सुरक्षित करने तक सीमित थी. साथ ही यह भी कहा गया कि कोयला घोटाले में AITC या उसके किसी पदाधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है इसलिए ED को पार्टी के गोपनीय डेटा पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं है और वह इस आधार पर ‘रोविंग एंड फिशिंग इन्क्वायरी' नहीं कर सकती. 

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