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कौन हैं सी सदानंदन मास्टर, उन्होंने राज्य सभा की टेबल पर क्यों रख दिए अपने नकली पैर

सी सदानंदन मास्टर अपने शुरुआती दिनों में माकपा के छात्र विंग स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े हुए थे. वो 1984 में एसएफआई छोड़ आरएसएस में शामिल हो गए थे.

कौन हैं सी सदानंदन मास्टर, उन्होंने राज्य सभा की टेबल पर क्यों रख दिए अपने नकली पैर
नई दिल्ली:

राज्यसभा में सोमवार को उस समय हंगामा हो गया जब बीजेपी के सी सदानंदन मास्टर ने सदन की मेज पर अपने कृत्रिम पैर रख दिए. यह घटना उस समय हुई जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी. बीजेपी सांसद का कहना था कि वह देश और जनता को यह दिखाना चाहते हैं कि आखिर लोकतंत्र क्या है.उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकतंत्र का शोर मचा रहे हैं, उन्होंने 31 साल पहले जब मैं घर लौट रहा था तो संगठित अपराधियों ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे सड़क पर गिराकर 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाते हुए मेरे पैर काट दिए.उन्होंने इसका आरोप माकपा के कार्यकर्ताओं पर लगाया.उनके इस बयान का माकपा के सदस्यों ने विरोध किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले सदानंद को 2025 में राष्ट्रपति ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया था.

कौन हैं सी सदानंदन मास्टर

सी सदानंदन मास्टर केरल के त्रिशूर जिले के एक हाई स्कूल शिक्षक हैं. वो 1999 से पेरामंगलम के श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे. उन्होंने असम के गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी कॉम और केरल के कालीकट विश्वविद्यालय से बी एड की डिग्री ली है. वो केरल में नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष हैं.

बीजेपी के राज्य सभा सदस्य ने जिस घटना का जिक्र अपने भाषण में किया वो 25 जनवरी 1994 की है. उस दिस कन्नूर जिले में स्थित उनके घर के पास उन पर हमला हुआ था. कन्नूर का यह इलाका राजनीतिक झड़पों के लिए मशहूर है. इस हमले के बाद उनके दोनों पैर काटने पड़े थे. यह हमला कथित तौर पर माकपा के सदस्यों ने किया था. खबरों के मुताबिक इस विवाद की शुरूआत माकपा के एक कार्यकर्ता के बेटा-बेटी को बिना पूछे मंदिर ले जाकर जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण बनाने पर हुई थी.इस मामले में सी सदानंदन का नाम आया था. इस विवाद ने बाद में हिंसक रूप ले लिया था. 

वामपंथ छोड़कर आए थे आरएसएस में

सी सदानंदन अपने कॉलेज के दिनों में माकपा के छात्र विंग स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े हुए थे. लेकिन 1984 में वो एसएफआई छोड़कर आरएसएस में शामिल हो गए थे. इसके बाद उन्हें कुन्नुर जिले का सरकार्यवाह बनाया गया था.  

बाद में वो आरएसएस से बीजेपी में आ गए थे. बीजेपी ने उन्हें 2016 और 2021 के चुनाव में कन्नूर जिले की   कूत्तुपरम्बा विधानसभा सीट से टिकट दिया था. साल 2016 के चुनाव में उन्होंने 20 हजार 787 वोट मिले थे. इस चुनाव में उन्हें माकपा के उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. वो तीसरे स्थान पर रहे थे. वहीं 2021 के चुनाव में उन्हें 21 हजार 212 वोट के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था. उन्हें लोकतांत्रिक जनता दल के उम्मीदवार केपी मोहनन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2025 में सी सदानंदन मास्टर को राज्य सभा के लिए मनोनीत किया था. उनके साथ महाराष्ट्र के सरकारी वकील उज्जवल देवराव निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला, इतिहासकार मिनाक्षी जैन को भी राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया था. 

अब तक नहीं पूछा है सरकार से कोई सवाल

सी सदानंदन के राज्य सभा सदस्य बनाए जाने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''श्री सी सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है. हिंसा और धमकियां भी राष्ट्रीय विकास के प्रति उनके अटूट संकल्प को कमजोर नहीं कर पाईं. एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनके प्रयास भी सराहनीय हैं. वे युवा सशक्तिकरण के प्रति अत्यंत समर्पित हैं. राष्ट्रपति जी की ओर से राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर उन्हें हार्दिक बधाई. सांसद के रूप में उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं.''

राज्य सभा की बेवसाइट के मुताबिक सी सदानंद संसद की शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल मामलों की समिति के सदस्य हैं.वो सोमवार को पहली बार किसी चर्चा में हिस्सा ले रहे थे. राज्य सभा का सदस्य बनाए जाने के बाद से उन्होंने अब तक सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा है. 

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