Assembly Election Results : देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम आज घोषित हो गए. चुनावी नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला. बंगाल की सत्ता पर काबिज TMC को शिकस्त देकर BJP ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. वहीं, दूसरी ओर तमिलनाडु में 'थलापति' विजय की पार्टी ने ऐतिहासिक शुरुआत करते हुए स्थापित द्रविड़ राजनीति को कड़ी चुनौती दी है. केरल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा कायम रही, जबकि असम और पुद्दुचेरी में मतदाताओं ने बीजेपी की विकास पर मुहर लगाई है.
पश्चिम बंगाल में कितनी सीटों थी?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं. यहां सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 148 सीटों के जादुई आंकड़ा चाहिए होता है. साल 2026 के चुनावों में राज्य की सभी सीटों पर दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था. आज आए नतीजों में BJP ने इन 294 सीटों में से बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए एक ऐतिहासिक 'बंपर' जीत दर्ज की है, जिसके बाद PM मोदी ने दिल्ली मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ जीत का जश्न मनाया.
बंगाल में किन-किन पार्टियों के बीच में था सीधा मुकाबला?
बंगाल में सीधा मुकाबला सत्ताधारी TMC और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच ही रहा. बीजेपी ने ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देते हुए आक्रामक अभियान चलाया, वहीं टीएमसी ने बंगाली अस्मिता और अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बचाने की कोशिश की.
ममता के पास कितने समय तक रही बंगाल की कमान?
पश्चिम बंगाल में अब तक CM की कमान ममता बनर्जी के हाथों में थी, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार राज्य की सत्ता पर काबिज थीं. उन्होंने 20 मई 2011 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर वामपंथ के 34 साल पुराने शासन का अंत किया था. इसके बाद वह 2016 और 2021 में भी लगातार भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटीं. वह बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में पिछले दिनों से पदभार संभाल रही थीं, लेकिन 2026 के इन चुनावी नतीजों ने उनके इस डेढ़ दशक लंबे कार्यकाल पर विराम लगा दिया है.
बंगाल में किस पार्टी को कितनी सीटें मिली?
बंगाल की कुल 294 सीटों (293 सीटों पर मतदान के आधार पर) में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. चुनाव आयोग (ECI) के ताजा रुझानों और नतीजों के अनुसार, भाजपा 204 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं, पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है और वह 83 सीटों पर सिमट गई है.
असम विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 सीटों का है.
असम में किन पार्टियों के बीच था सीधा मुकाबला?
असम में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) और कांग्रेस नेतृत्व वाले (गठबंधन के बीच था.
असम में कौन था मुख्यमंत्री और किस पार्टी की सरकार थी?
चुनाव से पहले असम में हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री थे. असम में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार थी. हिमंत बिस्वा सरमा 10 मई 2021 से इस पद पर बने हुए हैं.
असम में क्या सत्ता बदली है और वहां का राजनीतिक समीकरण क्या रहा?
असम में इस बार सत्ता नहीं बदली है. मतदाताओं ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व और 'डबल इंजन' सरकार के विकास कार्यों पर फिर से भरोसा जताया है. बीजेपी ने लगातार तीसरी बार असम में जीत का परचम लहराकर इतिहास रचा है. 2016 में पहली बार कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर BJP सत्ता में आई थी और तब से अब तक वहां BJP का ही शासन कायम है.
केरल विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं. यहां बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 71 सीटों की आवश्यकता होती है.
केरल में किन पार्टियों के बीच था सीधा मुकाबला?
केरल की राजनीति दो बड़े गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके बीच इस बार भी कड़ा मुकाबला था. यूडीएफ (UDF)- कांग्रेस (INC) के नेतृत्व वाला 'यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट', एलडीएफ- सीपीआई-एम (CPI-M) के नेतृत्व वाला 'लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट'.
केरल में कौन था मुख्यमंत्री?
चुनाव से पहले केरल में पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री थे. वह सीपीआई-एम के वरिष्ठ नेता हैं और मई 2016 से लगातार दो कार्यकालों से सत्ता संभाल रहे थे.
केरल में किस पार्टी/गठबंधन को कितनी सीटें मिलीं?
2026 के नतीजों में केरल में सत्ता परिवर्तन की लहर देखी गई है. कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है.
केरल में कितनी समय के बाद सत्ता बदली?
केरल में इस बार 10 साल के बाद सत्ता बदली है. केरल की राजनीति में हर 5 साल में सरकार बदलने का रिवाज (Alternative Rule) रहा है, लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन ने लगातार दूसरी बार जीतकर इस 40 साल पुराने रिवाज को तोड़ दिया था. अब 2026 में, मतदाताओं ने एक बार फिर बदलाव की राह चुनी और 10 साल के वामपंथी शासन के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की सत्ता में वापसी हुई है.
तमिलनाडु विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 सीटों का है.
तमिलनाडु में किन पार्टियों के बीच था सीधा मुकाबला?
वैसे तो इस बार तमिलनाडु में मुकाबला DMK और AIADMK के बजाय त्रिकोणीय रहा. अभिनेता से नेता बने 'थलापति' विजय की नई पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही थी और विजय की पार्टी ने राज्य के चुनावी गणित को बदल दिया.
तमिलनाडु में कौन था मुख्यमंत्री?
चुनाव से पहले एम.के. स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे. वह 7 मई 2021 से इस पद पर आसीन थे. हालांकि, 2026 के नतीजों में उन्हें कोलाथुर सीट से हार का सामना करना पड़ा है.
तमिलनाडु में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
ताजा चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता विजय की पार्टी ने सबको चौंकाते हुए सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर इतिहास रचा है. रुझानों के मुताबिक TVK विजय की पार्टी को 109 सीटें मिली है.
तमिलनाडु में कितनी समय के बाद और कैसे सत्ता बदली?
तमिलनाडु में 5 साल के बाद सत्ता बदली है. 2021 में DMK ने 10 साल के AIADMK शासन को खत्म कर सत्ता पाई थी. लेकिन 2026 में, राज्य की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ प्रभुत्व (DMK-AIADMK) को पहली बार किसी तीसरी शक्ति ने इतनी बड़ी चुनौती दी है. 'थलापति' विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली है, जिसे तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
पुडुचेरी विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
पुडुचेरी विधानसभा में प्रत्यक्ष चुनाव के लिए कुल 30 सीटें हैं. (इसके अतिरिक्त 3 सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित किए जाते हैं, जिससे कुल संख्या 33 हो जाती है). सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 16 सीटों का है.
पुडुचेरी में किन पार्टियों के बीच था सीधा मुकाबला?
पुडुचेरी में मुख्य मुकाबला दो बड़े गठबंधनों और एक नए खिलाड़ी के बीच था. NDA- इसमें ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) शामिल थे. सेक्युलर डेमोक्रेटिक एलायंस- इसमें कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था. अभिनेता विजय की नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' ने भी पहली बार चुनाव लड़कर त्रिकोणीय स्थिति पैदा की.
पुडुचेरी में कौन था CM?
चुनाव से पहले पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी थे. वह ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के संस्थापक हैं और 7 मई 2021 से इस पद पर आसीन थे.
पुडुचेरी में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
4 मई 2026 को आए नतीजों के अनुसार NDA ने बहुमत हासिल कर लिया है.
पुडुचेरी में कितनी समय के बाद सत्ता बदली?
पुडुचेरी में इस बार सत्ता नहीं बदली है. मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने अपनी सत्ता बरकरार रखी है. पुडुचेरी के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण अवसर है जब मौजूदा मुख्यमंत्री ने अपनी वापसी सुनिश्चित की है. इससे पहले 2021 में एन. रंगास्वामी ने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को हराकर सत्ता हासिल की थी और अब 2026 में भी जनता ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है.
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