- 21 वर्षीय आर्यन वर्मा ने फर्जी ब्रिगेडियर की वर्दी पहनकर लोगों को भ्रमित किया और दो बाउंसर व एक ड्राइवर रखे थे
- बाउंसरों को रोजाना एक हजार रुपये मिलते थे, जबकि चालक को पांच सौ से छह सौ रुपये प्रतिदिन मिलते थे
- आर्यन ने दिल्ली से फर्जी पहचान पत्र और वर्दी बनवाई, नीट की तैयारी के बाद फर्जी आर्मी अफसर बनने की योजना बनाई
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भारतीय सेना के ब्रिगेडियर की वर्दी पहनकर कैंट क्षेत्र में पकड़े गए कथित फर्जी ब्रिगेडियर आर्यन वर्मा को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब पुलिस जांच में सामने आया है कि 21 वर्षीय आर्यन ने अपनी फर्जी पहचान को सच दिखाने के लिए दो बाउंसर और एक ड्राइवर भी किराए पर रखे थे. वह खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ता था.
बाउंसर को रोजाना के मिलते 1000 रुपए
शाहजहांपुर पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि शहर के मोहल्ला वर्कजई निवासी शशांक और मोहसिन, साउथ सिटी कॉलोनी स्थित जी-20 ग्रुप में बाउंसर का काम करते हैं. दोनों ने पुलिस को बताया कि उन्हें कंपनी के माध्यम से आर्यन की सुरक्षा में भेजा जाता था, जिसके बदले उन्हें प्रतिदिन 1,000 रुपये मिलते थे. शशांक एक बार, जबकि मोहसिन दो बार उसके साथ ड्यूटी पर गया था. दोनों का दावा है कि उन्हें आर्यन की वास्तविक पहचान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
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फर्जी पहचान पत्र दिल्ली के लक्ष्मी नगर से बनवाया
वहीं, रोजा की मठिया कॉलोनी निवासी चालक जगवीर भी पूरी वर्दी पहनकर आर्यन के साथ चलता था. पूछताछ में जगवीर ने बताया कि उसने अपना फर्जी पहचान पत्र दिल्ली के लक्ष्मी नगर से बनवाया था और वर्दी भी वहीं से सिलवाई थी. उसे प्रतिदिन 500 से 600 रुपये मिलते थे और वह चार-पांच बार आर्यन के साथ जा चुका था. हालांकि, पूर्व सैनिकों ने चालक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और उसकी संलिप्तता की गहन जांच करने की मांग की है.
दिल्ली में कर रहा था नीट की तैयारी
पूछताछ के दौरान आर्यन ने बताया कि उसे शूटिंग का शौक है, इसलिए उसने पिछले वर्ष दिल्ली से एक एयर गन और सेना में इस्तेमाल होने वाली बेंत खरीदी थी. उसने यह भी स्वीकार किया कि वह लगभग दो वर्षों से दिल्ली में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए पर्याप्त रैंक नहीं ला सका. नीट में फेल होने के बाद फर्जी आर्मी अफसर बनने की प्लानिंग रची.

फर्जी ब्रिगेडियर ने किराए पर रखे थे बाउंसर और ड्राइवर, मां का सपना पूरा करने के लिए ओढ़ी वर्दी!
शिक्षिका मां का सपना पूरे करने के लिए ओढ़ी वर्दी!
आर्यन ने पुलिस को बताया कि उसकी मां मनोज कुमारी, जो भावलखेड़ा ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं, उसे हमेशा एक सैन्य अधिकारी के रूप में देखना चाहती थीं. मां के इसी सपने को पूरा करने के लिए उसने ब्रिगेडियर की वर्दी खरीदी. इसके बाद, बिहार निवासी मयंक नाम के एक सोशल मीडिया मित्र की मदद से उसने फर्जी पहचान पत्र तैयार कराया और 'जनरल ब्रिगेडियर डॉ. आर्यन वर्मा' के नाम से भारत सरकार एवं रक्षा मंत्रालय के विजिटिंग कार्ड भी छपवा लिए.
इन विजिटिंग कार्ड्स पर आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज पुणे, कमांड हॉस्पिटल हरियाणा और एयरफोर्स स्टेशन पंचकुला जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम भी दर्ज थे. आर्यन ने बताया कि वर्ष 2023 में वह पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज गया था, जहां सैन्य अधिकारियों के रौब को देखकर वह काफी प्रभावित हुआ था.
जांच में यह भी सामने आया है कि आर्यन ने अपने परिवार को भी धोखे में रखा था. उसने इसी साल जनवरी में अपने परिजनों को बताया था कि उसका चयन सेना की मेडिकल कोर में ब्रिगेडियर के पद पर हो गया है और उसे 'आउट ऑफ टर्न प्रमोशन' मिला है. परिजनों ने भी उसकी इस झूठी बात पर आसानी से विश्वास कर लिया था.

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ऐसे जाल में आ फंसा 'फर्जी अफसर'
पिछले करीब दो महीनों से शाहजहांपुर और उसके आस-पास के इलाकों में एक संदिग्ध शख्स के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की वर्दी में घूमने की खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं. इस इनपुट के बाद स्टेशन मुख्यालय के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल जेएस जगलान ने स्थानीय पूर्व सैनिकों के साथ मिलकर इस फर्जी अधिकारी का सच सामने लाने और उसे रंगे हाथों पकड़ने का एक मास्टर प्लान तैयार किया.
आरोपी को पकड़ने के लिए एक स्थानीय विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें इस फर्जी ब्रिगेडियर को 'मुख्य अतिथि' के रूप में आमंत्रित किया गया. जैसे ही आरोपी आर्यन वर्मा मुख्य अतिथि बनकर 'शहीद संग्रहालय' में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचा, वहां पहले से मुस्तैद सैन्य अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने उसकी पहचान की बारीकी से जांच की.
NSG कमांडो के भेष में थे साथी
पहचान फर्जी साबित होते ही सेना ने आरोपी को उसके साथियों समेत धर-दबोचा. चौंकाने वाली बात यह थी कि उसके दो साथी NSG कमांडो जैसी वेशभूषा में उसकी सुरक्षा का नाटक कर रहे थे. कार्रवाई के दौरान आरोपी के चालक के पास से भारत सरकार का एक फर्जी पहचान पत्र भी बरामद किया गया है. स्टेशन मुख्यालय के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल धोखेबाज की गिरफ्तारी भारतीय सेना और पूर्व सैनिकों की सतर्कता, सूझबूझ और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
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