हार्ट अटैक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट बेहद कीमती होता है. ऐसे समय में एक साधारण सी दवा, जो अक्सर घर की दवा पेटी में पड़ी रहती है, मरीज की जान बचाने में मदद कर सकती है. हम बात कर रहे हैं एस्पिरिन (Aspirin) की. हालांकि, इसे सिर्फ दर्द की दवा समझना बड़ी भूल हो सकती है. सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार बताते हैं कि सही समय पर एस्पिरिन लेने से हार्ट अटैक के दौरान होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
हार्ट अटैक में एस्पिरिन कैसे करती है काम?
हार्ट अटैक आमतौर पर तब होता है, जब दिल तक खून पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरी में खून का थक्का बन जाता है. इससे दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और नुकसान शुरू हो जाता है.
डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि एस्पिरिन इस थक्के को घोलती नहीं है, बल्कि प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने से रोकती है. इससे क्लॉट तेजी से बढ़ नहीं पाता और मरीज को अस्पताल पहुंचने तक कुछ महत्वपूर्ण समय मिल जाता है.
हार्ट अटैक की आंशका होने पर एस्पिरिन जल्दी लेने से क्या फायदा होगा?
डॉक्टर कहते हैं कि हार्ट अटैक की आशंका होने पर शुरुआती समय में एस्पिरिन लेने से सबसे अधिक लाभ मिलता है. अगर डॉक्टर या इमरजेंसी हेल्पलाइन से सलाह मिल जाए, तो एस्पिरिन चबाकर खाने से यह शरीर में तेजी से असर दिखा सकती है. केवल निगलने की तुलना में चबाने पर दवा जल्दी अवशोषित होती है.
क्या हर सीने के दर्द में एस्पिरिन लेनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं. सीने में दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे गैस, एसिडिटी, मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव. इसलिए हर बार सीने में दर्द होने पर एस्पिरिन लेना सही नहीं है.
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर दिल का दौरा पड़ने की आशंका हो और व्यक्ति को एस्पिरिन से एलर्जी न हो, तभी इसका उपयोग किया जाना चाहिए. कुछ लोगों में यह खून बहने का जोखिम भी बढ़ा सकती है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हार्ट अटैक के दौरान सीने में दबाव या जकड़न, दर्द का हाथ, जबड़े या पीठ तक फैलना, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, मतली और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत इमरजेंसी सहायता लेना जरूरी है.
एस्पिरिन ट्रीटमेंट का नहीं होता है ऑप्शन
डॉ. संजीव कुमार स्पष्ट करते हैं कि एस्पिरिन सिर्फ शुरुआती मदद है, इलाज नहीं. हार्ट अटैक की स्थिति में सबसे जरूरी है मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना, जहां एंजियोप्लास्टी या अन्य उपचार के जरिए बंद धमनियों को खोला जा सके.
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