जब किसी को पहली बार पता चलता है कि उसे दिल की कोई बीमारी हो गई है, तो पैरों तले जमीन खिसक जाती है. दिमाग में बस यही ख्याल घूमता रहता है कि अब तो जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी, बिस्तर पकड़ना पड़ेगा और पता नहीं आगे क्या होगा. लेकिन शारदाकेयर - हेल्थसिटी के जाने-माने दिल के डॉक्टर, डॉ. प्रवीण रमण मिश्रा का कहना है कि दिल की बीमारी का पता चलना जिंदगी का अंत बिल्कुल नहीं है.
सही वक्त पर इलाज, डॉक्टरों की सलाह और अपने रोजमर्रा के रहन-सहन में थोड़े से समझदारी भरे बदलाव करके कोई भी इंसान एक खुशहाल और ऐक्टिव जिंदगी जी सकता है. सबसे पहले तो यह बात गांठ बांध लीजिए कि सिर्फ रंग-बिरंगी गोलियां निगलने से दिल हमेशा के लिए ठीक नहीं रह सकता. दवाइयों के साथ-साथ आपका खाना, आपकी कसरत, आपकी नींद और दिमाग की शांति ही असली पहिए हैं जो इस गाड़ी को लंबा खींचेंगे.
थाली से बदलें दिल की किस्मत
हम जो कुछ भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारी खून की नलियों पर पड़ता है. अचानक से सब कुछ छोड़-छाड़कर उबला खाना शुरू करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसी सख्त डाइटिंग चार दिन भी नहीं टिकती. समझदारी इसी में है कि धीरे-धीरे अपनी थाली में सेहतमंद चीजें बढ़ाएं. अपनी डाइट में इन चीजों को प्राथमिकता दें:
ताजे फल और हरी सब्जियां: दिन भर में कम से कम दो-तीन तरह की हरी सब्जियां और मौसमी फल जरूर खाएं.
मोटा अनाज और दालें: चोकर वाला आटा, दलिया, ओट्स और अलग-अलग दालों से शरीर को अच्छा फाइबर मिलता है.
मेवे और बीज: बादाम, अखरोट जैसे नट्स सीमित मात्रा में खाने से नसों को अच्छी चिकनाई मिलती है.
इनसे बनाएं थोड़ी दूरी:
जरूरत से ज्यादा नमक: तेज नमक खाने से ब्लड प्रेशर फौरन ऊपर भागता है, जो कमजोर दिल के लिए ठीक नहीं.
तली-भुनी चीजें और मिठाई: समोसे, कचौड़ी, पेस्ट्री और पैकेटबंद चिप्स नसों में बुरा कोलेस्ट्रॉल जमा कर देते हैं.
रिफाइंड तेल और ट्रांस फैट: बार-बार गर्म किए गए तेल का इस्तेमाल दिल के लिए जहर समान होता है.
जिन लोगों को हार्ट फेलियर या गुर्दे की शिकायत है, उन्हें तो पानी और नमक की मात्रा डॉक्टर से पूछकर ही तय करनी चाहिए.
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शरीर को हरकत में रखना है जरूरी
अक्सर लोग सोचते हैं कि दिल कमजोर है तो बस आराम से बैठे रहो, हिलना-डुलना भी बंद कर दो. यह बहुत बड़ी गलतफहमी है. दिल भी एक मांसपेशी है, इसे मजबूत रखने के लिए थोड़ी मेहनत जरूरी है.
हल्की कसरत के सुरक्षित तरीके:
• सुबह या शाम को बीस से तीस मिनट की हल्की सैर सबसे उम्दा उपाय है.
• लगातार कई घंटों तक कुर्सी पर न जमे रहें, हर एक घंटे बाद उठकर दो मिनट कमरे में ही टहल लें.
• डॉक्टर की इजाजत से हल्के योग और गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम अपनाएं.
बस एक बात का सख्ती से ध्यान रखें कि कभी भी अपनी ताकत से ज्यादा जोर न लगाएं. अगर चलते-फिरते या काम करते वक्त सीने में भारीपन लगे, बहुत ज्यादा सांस फूलने लगे, सिर चकराए या पसीने छूटने लगें, तो तुरंत रुक जाएं और सीधे डॉक्टर से संपर्क करें.
तनाव और अधूरी नींद से दिल पर भारी बोझ
आजकल की भागदौड़ में हर कोई किसी न किसी उलझन में फंसा है. जब हम लगातार परेशान रहते हैं, तो शरीर में ऐसे हॉर्मोन निकलते हैं जो धड़कनों को तेज कर देते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ा देते हैं. खराब नींद इस आग में घी का काम करती है.
मन को शांत रखने के आसान फंडे:
• रात को तय समय पर सोएं ताकि सात-आठ घंटे की सुकून भरी नींद मिल सके.
• मोबाइल और टीवी को सोने से एक घंटा पहले बंद करने की आदत डालें.
• थोड़ा वक्त अपने परिवार, पुराने दोस्तों और पसंदीदा गानों के साथ बिताएं.
• अगर सिगरेट, बीड़ी या गुटखे की आदत है, तो उसे आज ही अलविदा कहना होगा. तंबाकू सीधे नसों को सिकोड़ देता है. शराब पीने वालों को भी बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
दवाइयां और रेगुलर चेकअप में कोई लापरवाही नहीं
कई बार ऐसा होता है कि हफ्ता-दस दिन दवा खाने के बाद मरीज को बहुत अच्छा लगने लगता है. फिर वह सोचता है कि अब तो मैं बिल्कुल ठीक हूं, दवा बंद कर देता हूं. यह सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है.
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की गोलियां दिल के ऊपर से गैर-जरूरी दबाव को हटाती हैं. डॉक्टर से पूछे बिना न तो खुराक कम करें और न ही दवा बंद करें. वक्त पर डॉक्टर के पास जाकर रूटीन जांच कराना बहुत जरूरी होता है. इससे डॉक्टर को पता चलता रहता है कि इलाज सही दिशा में जा रहा है या दवा में कोई फेरबदल करने की जरूरत है.
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दिल के साथ एक नई और सुलझी हुई शुरुआत
दिल की बीमारी का मतलब हर चीज से डरकर सहम जाना नहीं है, बल्कि अपने जिस्म की आवाज सुनना और कायदे से जिंदगी जीना है. रोज थोड़ा सा पैदल चलना, हल्का और पौष्टिक खाना, रात को पूरी नींद लेना और फालतू चिंताओं को दिल से न लगाना, ये ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बहुत बड़ा फर्क लाते हैं. सही जानकारी, घर-परिवार का प्यार और डॉक्टर के मशवरे के साथ कोई भी दिल का मरीज पूरे हौसले और ताजगी के साथ एक बेहतरीन जिंदगी बिता सकता है.
लेखक के बारे में :
डॉ. प्रवीण रमण मिश्रा शारदाकेयर हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा में एसोसिएट कंसल्टेंट (कार्डियोलॉजी) हैं. उन्हें हृदय रोगों की जांच, उपचार और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में 11 वर्ष से अधिक का अनुभव है. उन्होंने MBBS, MD (मेडिसिन) और DrNB (कार्डियोलॉजी) की डिग्री हासिल की है. डॉ. मिश्रा एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर इम्प्लांटेशन, इकोकार्डियोग्राफी और जटिल हृदय रोगों के प्रबंधन में विशेषज्ञता रखते हैं.
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