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Low Testosterone In Men: 50 साल में 54% घटा पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन, स्टडी में खुलासा

50 साल के डेटा में पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन लेवल में 54% तक गिरावट का अनुमान सामने आया है. 1 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा पर हुए एनालिसिस में मोटापा और मेटाबॉलिक हेल्थ को बड़ी वजह माना गया, जबकि दूसरे कारणों पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.

Low Testosterone In Men: 50 साल में 54% घटा पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन, स्टडी में खुलासा
मोटापा, खराब नींद और तनाव बना रहे हैं पुरुषों को कमजोर? 1 लाख लोगों की स्टडी में सामने आई सच्चाई
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क्या आप अक्सर थकान, कमजोरी, लो एनर्जी या फोकस की कमी महसूस करते हैं? इसके पीछे पुरुषों का अहम हार्मोन टेस्टोस्टेरोन भी जिम्मेदार हो सकता है. एक बड़ी रिसर्च में दावा किया गया है कि पिछले 50 वर्षों में पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन लेवल में करीब 54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो फर्टिलिटी, मांसपेशियों, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है.

1972 से लेकर 2019 के बीच के आंकड़ों को जब वैज्ञानिकों ने खंगाला, तो पता चला कि पुरुषों में कुल टेस्टोस्टेरोन लेवल में करीब 54 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है. सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि साल 2000 के बाद से यह गिरावट और भी तेज रफ्तार से बढ़ रही है.

रिसर्च में क्या-क्या बातें आई सामने

यह स्टडी कोई छोटी-मोटी रिपोर्ट नहीं है, बल्कि इसमें छह बड़ी पुरानी रिसर्च के डेटा को एक साथ जोड़कर देखा गया है:

  • इस एनालिसिस में अमेरिका, इजरायल, ब्राजील, फिनलैंड और डेनमार्क जैसे देशों के कुल 1,18,593 लोग शामिल थे.
  • सभी 6 स्टडीज में एक ही जैसा ट्रेंड दिखा कि हर बीतते दशक के साथ पुरुषों के हार्मोन का स्तर लगातार गिर रहा है.
  • 1972 की तुलना में आज के पुरुषों में यह वाइटल हार्मोन लगभग आधा ही रह गया है.
हर थकान या कमजोरी का मतलब लो टेस्टोस्टेरोन नहीं होता. किसी भी हार्मोन थेरेपी या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.
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आखिर क्यों गिर रहा है टेस्टोस्टेरोन का लेवल

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं है, बल्कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है:

मोटापा और फैट: शरीर में जब चर्बी यानी बॉडी फैट बढ़ता है, तो वह टेस्टोस्टेरोन को फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन में बदलने लगता है.
डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम: खराब खान-पान और एक्सरसाइज की कमी से मेटाबॉलिज्म बिगड़ रहा है, जिसका सीधा असर हार्मोन्स पर पड़ता है.
केमिकल्स और प्रदूषण: हमारे आस-पास मौजूद हानिकारक केमिकल्स (एंडोक्राइन डिसरप्टर्स) शरीर के नैचुरल हार्मोन सिस्टम में दखल दे रहे हैं.
बढ़ता तापमान: पर्यावरण में लगातार बढ़ रही गर्मी को भी इसका एक संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि इस पर अभी और रिसर्च बाकी है.

लो टेस्टोस्टेरोन के लक्षण
लगातार थकान रहना
मांसपेशियों की ताकत कम होना
पेट की चर्बी बढ़ना
सेक्स ड्राइव कम होना
मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन
फोकस में कमी
फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं

सिर्फ सेक्स ड्राइव ही नहीं, पूरी बॉडी पर पड़ता है असर

कई लोग सोचते हैं कि टेस्टोस्टेरोन का मतलब सिर्फ सेक्स लाइफ या लिबिडो से है, लेकिन ऐसा सोचना बहुत बड़ी भूल है. यह हार्मोन पुरुष शरीर की पूरी बनावट को संभालता है:

  1. स्पर्म प्रोडक्शन और फर्टिलिटी को सही बनाए रखना
  2. हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना
  3. दिनभर शरीर में चुस्ती और एनर्जी लेवल बनाए रखना
  4. मूड को स्थिर रखना और डिप्रेशन से बचाना

बिना सोचे-समझे सप्लीमेंट लेने की गलती न करें

रिसर्च के नतीजे भले ही चिंता बढ़ाने वाले हों, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हर कोई मेडिकल स्टोर जाकर टेस्टोस्टेरोन के इंजेक्शन या सप्लीमेंट्स खाना शुरू कर दे.

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने साफ चेतावनी दी है कि बिना डाक्टर की सलाह के बाहर से टेस्टोस्टेरोन लेना बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे शरीर की अपनी स्पर्म बनाने की नेचुरल छमता हमेशा के लिए बंद हो सकती है. इसलिए सप्लीमेंट के पीछे भागने के बजाय वजन कंट्रोल करें, रोज कसरत करें और अच्छी नींद लें.

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