Cancer Cases Increased Factors : हमारे देश में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी एक चिंता का विषय बनती जा रही है. पहले जहां इसे बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था. वहीं, अब युवा और यहां तक कि बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की चेयरमैन - मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. मीनू वालिया का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू और शराब का सेवन, वायु प्रदूषण और हानिकारक केमिकल्स के संपर्क जैसे कई कारण कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं. हालांकि, अब कैंसर का इलाज पहले की तुलना में आसान हो गया है, क्योंकि नई तकनीकों, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे कई ट्रीटमेंट आ चुके हैं. ऐसे में समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है. यहां डॉक्टर से जानते हैं कैंसर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब-
सवाल: देश में कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
उत्तर : इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. मीनू कहती हैं कि हमारे देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. कैंसर के जोखिम में हमारी लाइफस्टाइल की भी बड़ी भूमिका है. आज हम क्या खा रहे हैं, क्या पी रहे हैं और किस तरह के वातावरण में रह रहे हैं, इन सभी चीजों का हमारी सेहत पर असर पड़ता है.
आज के समय में अनहेल्दी डाइट, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तंबाकू और शराब का सेवन जैसे- लाइफस्टाइल फैक्टर्स कैंसर के रिस्क को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा एयर पॉल्युसन और कुछ जगहों पर पानी या खाने में मौजूद हार्मफुल केमिकल्स के संपर्क में आने से भी स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है.
इसलिए कैंसर को सिर्फ एक कारण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. कई अलग-अलग फैक्टर्स मिलकर इसका जोखिम बढ़ाते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि हम अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करें, तंबाकू और शराब से बचें, नियमित फिजिकल एक्टिविटी करें, संतुलित आहार लें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें. साथ ही, जिन कैंसर के लिए स्क्रीनिंग उपलब्ध है, उनके लिए समय पर स्क्रीनिंग कराना भी बहुत महत्वपूर्ण है.
सवाल : पहले की तुलना में आज कैंसर के इलाज में कितना बदलाव और सुधार आया है?
उत्तर: इसका जवाब देते हुए डॉक्टर कहती हैं कैंसर के इलाज में पिछले कुछ वर्षों में बहुत बड़ा बदलाव आया है. पहले मुख्य रूप से सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी ही इलाज के प्रमुख तरीके थे. आज इन तीनों में काफी सुधार हुआ है. अब कई मामलों में
ऑर्गन-प्रिजर्विंग सर्जरी की जा सकती है, रेडिएशन की तकनीक और मशीनें बेहतर हुई हैं और कीमोथेरेपी में भी नई दवाइयां और बेहतर सपोर्टिव केयर उपलब्ध हैं.
इसके अलावा, अब हम यह समझते हैं कि हर कैंसर एक जैसा नहीं होता. जीनोमिक और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग के जरिए कैंसर की विशेषताओं को समझकर मरीज के लिए ज्यादा सटीक और व्यक्तिगत उपचार तय किया जा सकता है.
आज टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और Antibody-Drug Conjugates (ADCs) जैसी नई उपचार पद्धतियों ने कैंसर के इलाज के विकल्पों को और बेहतर बनाया है. यानी आज कैंसर का इलाज केवल बीमारी को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज के कैंसर की प्रकृति के अनुसार सही और अधिक सटीक उपचार देने पर भी जोर है.
सवाल : कौन-से कैंसर आज ज्यादा देखने को मिल रहे हैं और क्या किसी खास उम्र में कैंसर का खतरा ज्यादा होता है?
उत्तर: कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है और सामान्य तौर पर यह बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है. लेकिन एक जरूरी बात यह है कि कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है.
कई बार बच्चे, किशोर और युवा भी कैंसर के साथ हमारे पास आते हैं. कम उम्र में कैंसर को लेकर जागरूकता कम होने के कारण कई बार इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है और जांच में देरी हो सकती है.
इसलिए यह मानना सही नहीं है कि कैंसर केवल अधिक उम्र के लोगों की बीमारी है. उम्र चाहे कोई भी हो, शरीर में लंबे समय तक रहने वाले या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
सवाल: हमारे देश में कौन-से कैंसर ज्यादा देखने को मिल रहे हैं?
उत्तर: डॉक्टर कहती हैं हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर और हेड एंड नेक कैंसर प्रमुख रूप से देखने को मिलते हैं. इसके अलावा, लाइफस्टाइल और खान-पान से जुड़े कोलोरेक्टल कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैं.
युवा महिलाओं में ब्रेस्ट में गांठ को कई बार हार्मोनल बदलाव या फाइब्रोएडिनोमा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. हालांकि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी उम्र में ब्रेस्ट में नई या असामान्य गांठ होने पर समय पर जांच जरूरी है.
लंग कैंसर को पहले मुख्य रूप से धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया. पैसिव स्मोकिंग और वायु प्रदूषण भी महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकते हैं.
वहीं, हेड एंड नेक कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में तंबाकू, गुटखा और पान जैसे उत्पादों का सेवन शामिल है. इसलिए तंबाकू से दूरी, स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर जांच कैंसर से बचाव और इसकी जल्दी पहचान में महत्वपूर्ण हैं.
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