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नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट के बाद भी हार्ट को हो सकता है खतरा! जानिए क्यों जरूरी हैं ये 2 खास टेस्ट

हार्ट अटैक का रिस्क जानने के सिर्फ कोलेस्ट्रॉल करा लेना ही सही नहीं होता है. कुछ अन्य टेस्ट भी जरूरी होते हैं. यहां डॉक्टर के बताए टेस्ट के बारे में जानते हैं-

नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट के बाद भी हार्ट को हो सकता है खतरा! जानिए क्यों जरूरी हैं ये 2 खास टेस्ट
Heart Health Test : सिर्फ कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, हार्ट हेल्थ जानने के लिए करा लें ये 2 जरूरी टेस्ट

जब भी हार्ट के हेल्थ की बात होती है, तो हम में से कई लोग सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल की जांच करा लेते हैं. हमें लगता है कि अगर कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट नॉर्मल है, तो दिल पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट्स का कहना है कि सिर्फ एक सामान्य लिपिड प्रोफाइल हार्ट की बीमारियों की रिस्क को पूरी तरह से नहीं बताती है. कई बार कोलेस्ट्रॉल के आंकड़े सामान्य होने के बावजूद व्यक्ति को हार्ट अटैक, स्ट्रोक या कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बना रह सकता है.

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के चेयरमैन एंड एचओडी डॉ. नवीन भामरी का कहना है कि हार्ट डिजीज का रिस्क सिर्फ कोलेस्ट्रॉल से नहीं, बल्कि कई अन्य कारकों से तय होता है. इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, किडनी डिजीज और जेनेटिक कारण शामिल हैं. यहां जानते हैं हार्ट हेल्थ को जानने के लिए कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिएं? 

सिर्फ LDL कोलेस्ट्रॉल देखना काफी नहीं

डॉक्टर कहते हैं कि अधिकतर लोग LDL यानि खराब कोलेस्ट्रॉल को ही हार्ट की सेहत का सबसे बड़ा पैमाना मानते हैं, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि कुछ अन्य बायोमार्कर भी रिस्क को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं, जैसे-

लिपोप्रोटीन A टेस्ट

डॉक्टर भामरी का कहना है कि Lp(a) एक ऐसा फैक्टर है, जो मुख्य रूप से जेनेटिक होता है और लाइफटाइम लगभग स्थिर रहता है. अगर इसका स्तर बढ़ा हुआ है, तो व्यक्ति में हार्ट डिजीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, भले ही उसका सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर ठीक दिखाई दे रहा हो. डॉक्टर का कहना है कि हर वयस्क को जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.

एपोलिपोप्रोटीन B टेस्ट

ApoB शरीर में मौजूद उन कणों की संख्या बताता है, जो आर्टरी में प्लाक जमा कर सकते हैं. डायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड्स या अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं वाले लोगों में ApoB टेस्ट कई बार वह रिस्क सामने ला सकता है, जो LDL रिपोर्ट में नहीं दिखता.

सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं, समय भी रखता है मायने 

डॉक्टर कहते हैं कि हार्ट डिजीज का रिस्क इस बात पर भी निर्भर करता है कि शरीर की धमनियां कितने समय तक LDL कोलेस्ट्रॉल के संपर्क में रही हैं. अगर किसी व्यक्ति का LDL कई सालों तक थोड़ा बढ़ा हुआ भी रहा हो, तो धीरे-धीरे आर्टरी में फैट जमा होकर एथेरोस्क्लेरोसिस पैदा कर सकता है. ये खतरा उन लोगों में और बढ़ जाता है, जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास रहा हो.

दिल को कैसे रखें सुरक्षित?

अगर आप अपने दिल को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो कुछ बातों पर ध्यान रखें, जैसे-

  • रोजाना एक्सरसाइज करें.
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें.
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखें.
  • ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें.
  • डॉक्टर की सलाह पर आवश्यक दवाएं लें.
  • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं.

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