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क्या आपके पीरियड्स रहते हैं अनियमित? बढ़ सकता है डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा

अनियमित पीरियड्स सिर्फ हार्मोनल बदलाव नहीं हो सकते. एक्सपर्ट्स के अनुसार यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के बढ़ते जोखिम का संकेत भी हो सकता है.

क्या आपके पीरियड्स रहते हैं अनियमित? बढ़ सकता है डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा
अनियमित पीरियड्स और डायबिटीज का क्या है संबंध? एक्सपर्ट से जानें
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अनियमित मासिक धर्म को अक्सर महिलाएं सामान्य हार्मोनल बदलाव या तनाव से जोड़कर नजरअंदाज कर देती हैं. हालांकि, इसके पीछे कुछ मेटाबॉलिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जो लंबे समय में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, खासतौर पर अनियमित पीरियड्स के साथ वजन बढ़ना, पेट के आसपास चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं मौजूद हों तो नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है.

यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली के सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एवं डायबेटोलॉजिस्ट, डॉ. अनिल गोम्बर के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (PCOD/PCOS) के अलावा भी अनियमित मासिक धर्म और मेटाबॉलिक तथा हृदय संबंधी जोखिमों के बीच संबंध के महत्वपूर्ण प्रमाण उपलब्ध हैं.

डॉ. गोम्बर ने बताया कि 2026 में प्रकाशित एक सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस, जिसमें 3,54,419 महिलाओं को शामिल किया गया था, में नियमित मासिक धर्म वाली महिलाओं की तुलना में अनियमित मासिक धर्म वाली महिलाओं में लगभग 50% अधिक हाई ब्लड प्रेशर, 75% अधिक डायबिटीज और 43% अधिक समग्र हृदय रोग का जोखिम पाया गया.

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि अनियमित पीरियड्स सीधे तौर पर डायबिटीज या हृदय रोग का कारण बनते हैं. इनके बीच संबंध साझा जोखिम कारकों या द्विदिशीय प्रक्रिया से भी जुड़ा हो सकता है. इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी, एंड्रोजन हार्मोन का बढ़ा स्तर, सूजन और अन्य मेटाबॉलिक असामान्यताएं एक साथ ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करने के साथ डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ा सकती हैं.

डॉ. गोम्बर के मुताबिक, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने भी अनियमित मासिक धर्म चक्र को इंसुलिन रेजिस्टेंस, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम कारकों से जोड़ा है.

ऐसे में लगातार अनियमित पीरियड्स को केवल स्त्री रोग संबंधी समस्या मानकर छोड़ना उचित नहीं है. महिलाओं को अपने वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और अन्य मेटाबॉलिक संकेतकों पर भी ध्यान देना चाहिए. समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार से जोखिमों की पहचान और प्रबंधन में मदद मिल सकती है.
 

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