कुछ साल पहले तक लोग दिल की बीमारी, कैंसर या डायबिटीज को सबसे बड़ा हेल्थ खतरा मानते थे. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. दुनिया भर में एंग्जायटी, डिप्रेशन और दूसरी मानसिक परेशानियां इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि उन्होंने कई बड़ी बीमारियों को पीछे छोड़ दिया है. मेडिकल जर्नल The Lancet में पब्लिश हुई नई रिसर्च के मुताबिक, मानसिक विकार अब दुनिया में डिसेबिलिटी यानी लंबे समय तक सामान्य जिंदगी प्रभावित करने वाली सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं. साल 2023 में दुनिया भर में करीब 1.2 अरब लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी के साथ जी रहे थे. हैरानी की बात ये है कि 1990 के मुकाबले यह संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है.
युवाओं में सबसे ज्यादा है मेंटल स्ट्रेस-
स्टडी में सबसे ज्यादा चिंता युवाओं को लेकर जताई गई है. 15 से 19 साल की उम्र के किशोर और युवा मानसिक समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए. सोशल मीडिया प्रेशर, अकेलापन, पढ़ाई और करियर का तनाव, टूटते सामाजिक रिश्ते और लगातार बढ़ती असुरक्षा इसके बड़े कारण बन रहे हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले पुरुषों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़े हैं. 2023 में दुनिया भर में लगभग 62 करोड़ महिलाएं किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रही थीं.

Photo Credit: AI generated image
भारत में भी स्थिति चिंताजनक-
भारत को लेकर भी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. स्टडी के मुताबिक, देश में एंग्जायटी डिसऑर्डर के मामले पिछले तीन दशकों में तेजी से बढ़े हैं. खासकर महिलाओं में इसकी बढ़ोतरी पुरुषों की तुलना में ज्यादा दर्ज की गई. कोविड महामारी के बाद तनाव, आर्थिक असुरक्षा, घरेलू हिंसा, सोशल कनेक्शन कमजोर होना और लगातार बढ़ती अकेलेपन की भावना ने हालात को और खराब किया है. इसके अलावा युद्ध, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं और असमानता जैसे फैक्टर्स भी मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं.
मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता की कमी-
एक और बड़ी बात ये है कि मानसिक बीमारियां अब सिर्फ अमीर या विकसित देशों की समस्या नहीं मानी जा रहीं. रिसर्च के अनुसार, संसाधनों की कमी वाले देशों में भी इसका बोझ तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि वहां अब भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और इलाज की पहुंच काफी सीमित है. मानसिक बीमारियों को सिर्फ “कमजोरी” या “फेज” समझने की सोच अब बदलनी होगी. क्योंकि अगर शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका असर पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है.
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में शरीर की फिटनेस जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी दिमाग का स्वस्थ रहना भी है. और शायद यही वजह है कि दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स अब मानसिक स्वास्थ्य को आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं.
ये भी पढ़ें- क्या वेट-लॉस ड्रग्स बचाएंगी कैंसर मरीजों की जान? नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं