विज्ञापन

बच्चे क्यों देने लगते हैं धमकी? जानिए घर के माहौल का कितना असर पड़ता है

बच्चे अक्सर वही व्यवहार अपनाते हैं जो वे घर में देखते हैं. अगर वे बड़ों को दबाव या धमकी देते देखते हैं, तो वही सीखते हैं.

बच्चे क्यों देने लगते हैं धमकी? जानिए घर के माहौल का कितना असर पड़ता है

“मेरी बात नहीं मानी तो दोस्त नहीं रहूंगा…”

ऐसे डायलॉग आपने भी बच्चों के बीच कई बार सुने होंगे. अक्सर हम इसे बच्चों की छोटी-मोटी नोकझोंक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल खेल-खेल में कही गई बातें नहीं होतीं. असल में, ये आदतें घर से शुरू होती हैं.

बच्चे सिर्फ शब्द नहीं, व्यवहार भी सीखते हैं

डेनवर यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एंजेला जे. नारायण के अनुसार, बच्चे यह नहीं सीखते कि क्या कहना है, बल्कि यह भी सीखते हैं कि अपनी बात मनवाने के लिए कैसे व्यवहार करना है.

अगर बच्चे घर में बार-बार धमकी, आलोचना या भावनात्मक दबाव देखते हैं, तो वे भी इन्हीं तरीकों को अपनाने लगते हैं

यानी बच्चे कॉपी-पेस्ट मशीन की तरह बड़ों के व्यवहार को अपने जीवन में उतार लेते हैं.

धमकाने वाले बच्चे भी होते हैं प्रभावित

अक्सर हम सोचते हैं कि बुलिंग का असर सिर्फ उस बच्चे पर होता है जो इसे झेल रहा है, लेकिन सच इससे अलग है. जो बच्चे दूसरों को डराकर अपनी बात मनवाते हैं, उनमें आगे चलकर:

  • गुस्सा और आक्रामक व्यवहार
  • नियम तोड़ने की आदत
  • अवसाद और अकेलापन
  • नशे जैसी समस्याओं का खतरा

ज्यादा देखा गया है.

बच्चों की सोच: पाना भी है, बचना भी है. हर बच्चा दो बेसिक चीजें चाहता है. पहली, जो उसे अच्छा लगे जैसे प्यार, तारीफ, खेल, दोस्त और दूसरी जो मुश्किल लगे जैसे पढ़ाई, काम, जल्दी सोना वगैरह से बचना.

वांट्स वर्सेस अवॉइडेंस: बच्चों के दो मूल मंत्र

दुनिया का हर बच्चा दो ही चीजों से गाइड होता है:

1. जो वो चाहता है उसे हासिल करना: जैसे- प्यार, खिलौने, तारीफ, टेस्टी फूड और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती.
2. जिससे वो बचना चाहता है उससे दूर भागना: जैसे- पढ़ाई, सुबह जल्दी उठना, घर के काम या मुश्किल टास्क.

अब सवाल यह है कि बच्चा अपनी बात मनवाने के लिए कौन सा रास्ता चुनता है? यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने घर में क्या देखा है:

जाने-अनजाने हम क्या सिखा रहे हैं?

मनोविज्ञान का प्रसिद्ध ‘बोबो डॉल' एक्सपेरिमेंट साफ दिखाता है कि जो बच्चे बड़ों को आक्रामक देखते हैं, वे खुद भी हिंसक हो जाते हैं. खासतौर पर प्री-स्कूल (कम उम्र) के दौरान घर का माहौल बच्चों के दिमाग पर सबसे गहरी छाप छोड़ता है.

आजकल भले ही पैरेंट्स शारीरिक बल (मारपीट) का प्रयोग न करते हों, लेकिन हमारे बात करने का तरीका बच्चे नोटिस करते हैं:

कंडीशनल बातें: "अगर तुमने यह काम नहीं किया, तो तुम्हें वो नहीं मिलेगा." (बच्चा सीखता है कि धमकी देना एक इफेक्टिव टूल है.)
आपसी आलोचना: पार्टनर को 'आलसी', 'निकम्मा' या 'अव्यवस्थित' कहना. (बच्चा स्कूल में दूसरों की कमियां ढूंढकर बोलता है- "तुम्हारे कपड़े अच्छे नहीं हैं, तुम मेरे साथ नहीं खेल सकते.")

साइलेंट ट्रीटमेंट: किसी बात पर पार्टनर से हफ्तों बात न करना. (बच्चा भी दोस्तों को सोशल मीडिया या ग्रुप से अलग-थलग करना सीख जाता है.)

लाइफस्टाइल शिफ्ट: अपने व्यवहार को बदलें, बच्चों का भविष्य संवारें

अच्छी खबर यह है कि हम अपने डेली लाइफस्टाइल और बातचीत के तरीके को बदलकर बच्चों को एक बेहतरीन इंसान बना सकते हैं.

1. 'टीम पैरेंटिंग' का उदाहरण पेश करें

अगर एक पार्टनर अनुशासन में सख्त है और दूसरा इमोशनली सपोर्टिव, तो दोनों मिलकर एक बेहतरीन टीम बन सकते हैं. बच्चों के सामने एक-दूसरे की तारीफ करें.

जैसे: "आज मम्मी की वजह से हम सब टाइम पर तैयार हो पाए" या "पापा ने सारा सामान इतने अच्छे से मैनेज कर दिया."

2. सम्मान और कृतज्ञता की भाषा चुनें)

घर में 'थैंक यू', 'प्लीज' और सराहना के शब्दों का इस्तेमाल बढ़ाएं. जब बच्चे घर में सम्मान और सहयोग का माहौल देखते हैं, तो उनके भीतर गजब का आत्मसम्मान (Self-esteem) विकसित होता है.

3. बुलिंग के खिलाफ ढाल बनें

जो बच्चे घर में प्यार और सम्मान देखते हैं, वे बाहर भी किसी का अपमान या चालाकी भरा व्यवहार बर्दाश्त नहीं करते. वे किसी भी तरह की 'बुलिंग' या धमकी का सामना पूरे आत्मविश्वास से कर पाते हैं.

टेकअवे

माता-पिता के पास सिर्फ बच्चों से काम करवाने की पावर नहीं होती, बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के सामने सम्मान, दयालुता और संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण बनें. यदि बचपन के शुरुआती सालों में ही यह लाइफस्टाइल वैल्यूज बच्चों को मिल जाएं, तो वे भविष्य के एक आत्मविश्वासी और पॉजिटिव नागरिक बनते हैं.

Also Read: 

बर्थडे केक में छिपा खतरा! बच्चे ने निगल लिया आयरन वायर, जानिए केक खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान

''अपने बच्चों को ये 7 झूठ बोलना जरूर सिखाएं'' पुलिस ने बताया बच्‍चों को सुरक्ष‍ित रखने का तरीका

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Parenting, Child Behaviour, Lifestyle, Mental Health, Family
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com