हर 8 में से 1 कैंसर की वजह संक्रमण! 23 लाख मामलों से खुलासा, HPV से ज्यादा खतरनाक है ये वाला इंफेक्शन
नई दिल्ली. कैंसर को आमतौर पर तंबाकू, शराब, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारणों और बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक नए वैश्विक अध्ययन ने कैंसर के एक और महत्वपूर्ण कारण की ओर ध्यान खींचा है. The Lancet Oncology में प्रकाशित इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे. यह उस साल सामने आए सभी नए कैंसर मामलों का लगभग 12 फीसदी, यानी करीब हर आठ में से एक मामला है.
अध्ययन में उन संक्रमणों को शामिल किया गया है जिन्हें कैंसर पैदा करने वाले कारकों के तौर पर स्थापित किया जा चुका है. इनमें कुछ वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी शामिल हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक राहत की बात यह है कि संक्रमण से जुड़े कैंसर के एक बड़े हिस्से को टीकाकरण, समय पर जांच, संक्रमण का इलाज और बेहतर रोकथाम के जरिए कम किया जा सकता है.
H. Pylori सबसे बड़ा कारण
अध्ययन के मुताबिक Helicobacter pylori (H. pylori) संक्रमण से करीब 7.6 लाख कैंसर मामले जुड़े थे. यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से पेट में संक्रमण पैदा करता है और लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है. इसके बाद Human Papillomavirus (HPV) का नंबर आता है, जिससे करीब 7.5 लाख कैंसर मामले जुड़े थे. HPV विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर के अलावा कुछ अन्य जननांग और सिर-गले के कैंसर से भी संबंधित है.
इसके अलावा Hepatitis B virus से करीब 3.6 लाख, Epstein-Barr virus (EBV) से करीब 2.6 लाख और Hepatitis C virus से करीब 1.6 लाख कैंसर मामले जुड़े पाए गए. इनमें हेपेटाइटिस बी और सी मुख्य रूप से लिवर कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं.
लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण बन सकता है खतरा
डॉ. राजीव कुमार, वाइस चेयरमैन, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी यथार्थ अस्पताल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली का कहना है,
डॉक्टरों का कहना है कि HPV वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इसी तरह हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है. H. pylori की पहचान होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार किया जा सकता है. वहीं हेपेटाइटिस बी और सी की समय पर जांच और निगरानी लिवर से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है.
रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत
IARC के अनुसार संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में समान नहीं है. कम और मध्यम आय वाले देशों में ऐसे कैंसर का बड़ा हिस्सा पाया जाता है, जहां टीकाकरण, स्क्रीनिंग, संक्रमण की जांच और इलाज तक पहुंच अभी भी चुनौती बनी हुई है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि कैंसर की रोकथाम केवल तंबाकू और शराब जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए. वैक्सीनेशन, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार, नियमित स्क्रीनिंग और संक्रमण का समय पर इलाज भी कैंसर की रोकथाम की रणनीति का अहम हिस्सा हैं.
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एक्सपर्ट के बारे में- डॉ. राजीव कुमार यथार्थ अस्पताल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन हैं. उन्हें कैंसर की सर्जरी, कैंसर की रोकथाम और समय पर निदान के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है. वे कैंसर जागरूकता और मरीजों को वैज्ञानिक व सटीक जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर देते हैं.
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