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ब्रेस्ट में गांठ हमेशा कैंसर हो ये जरूरी नहीं, लेकिन स्‍किन सिकुड़न समेत इन 6 बदलावों को न करें

ब्रेस्ट में गांठ हमेशा कैंसर नहीं होती, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. डॉ. तप्ती सेन से जानें कब जरूरी है जांच.

ब्रेस्ट में गांठ हमेशा कैंसर हो ये जरूरी नहीं, लेकिन स्‍किन सिकुड़न समेत इन 6 बदलावों को न करें
क्या हर ब्रेस्ट गांठ कैंसर होती है? ब्रेस्ट सर्जन ने बताए जरूरी संकेत
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ब्रेस्ट में गांठ महसूस होने पर सबसे पहले कैंसर का डर होना स्वाभाविक है, लेकिन हर गांठ कैंसर नहीं होती. ब्रेस्ट में फाइब्रोएडीनोमा, सिस्ट, हार्मोनल बदलाव या अन्य गैर-कैंसरकारी कारणों से भी गांठ हो सकती है. खासकर कम उम्र की महिलाओं में कई गांठें सौम्य होती हैं. हालांकि, किसी गांठ को केवल उसके आकार, दर्द या छूने पर महसूस होने के आधार पर सामान्य मान लेना सही नहीं है. इसका कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है.

ब्रेस्ट सर्जन के तौर पर मैं महिलाओं को सलाह दूंगी कि वे अपने स्तनों में होने वाले किसी भी नए या असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. अगर कोई गांठ मासिक धर्म के बाद भी बनी रहती है, उसका आकार बढ़ रहा है, वह पहले से अलग महसूस होती है या लंबे समय से मौजूद है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. कई बार हार्मोनल बदलावों के कारण भी पीरियड्स के आसपास ब्रेस्ट में गांठ या भारीपन महसूस हो सकता है, लेकिन अगर बदलाव लगातार बना रहे तो इसकी जांच कराना बेहतर है.

कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर विशेष ध्यान देना चाहिए-

  1. ब्रेस्ट में नई या लगातार बनी रहने वाली गांठ
  2. बगल में गांठ या सूजन
  3. निप्पल का अचानक अंदर की ओर खिंचना
  4. निप्पल से बिना दबाए खून या असामान्य डिस्चार्ज होना
  5. ब्रेस्ट की त्वचा में गड्ढे या सिकुड़न
  6. त्वचा का मोटा या संतरे के छिलके जैसा दिखना 
  7. और ब्रेस्ट के आकार या आकृति में अचानक बदलाव 

- ऐसे लक्षण हैं जिनके लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इन संकेतों का मतलब कैंसर होना जरूरी नहीं है, लेकिन इनके कारण की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है.

यह भी समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर हमेशा दर्द के साथ नहीं आता. शुरुआती अवस्था में कई महिलाओं में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसलिए केवल यह सोचकर कि गांठ में दर्द नहीं है या वह छोटी है, जांच को टालना उचित नहीं है.

डॉक्टर उम्र, लक्षण और गांठ की प्रकृति के आधार पर क्लिनिकल जांच के साथ अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी या जरूरत पड़ने पर बायोप्सी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं. हर गांठ में बायोप्सी की जरूरत नहीं होती.

ब्रेस्ट में गांठ मिलने पर घबराने के बजाय उसका सही मूल्यांकन कराना सबसे जरूरी है. समय पर जांच से गांठ के कारण का पता लगाया जा सकता है और अगर वह गंभीर स्थिति से जुड़ी हो, तो उपचार भी जल्द शुरू किया जा सकता है. महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी नए या लगातार बने रहने वाले बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

लेखक के बारे में

डॉ. तप्ती सेन आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता में सीनियर कंसल्टेंट (ब्रेस्ट सर्जरी) हैं. उन्हें ब्रेस्ट रोगों की जांच, उपचार और सर्जरी के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है. डॉ. सेन महिलाओं में ब्रेस्ट स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर निदान एवं उपचार के महत्व पर विशेष जोर देती हैं.

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