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बार-बार पेशाब आना इस बीमारी का हो सकता है संकेत, ये लक्षण दिखते ही पुरुष हो जाएं सतर्क

रात में बार-बार पेशाब आना, कमजोर यूरिन फ्लो और पेशाब शुरू करने में दिक्कत जैसे लक्षण सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं, प्रोस्टेट कैंसर का संकेत भी हो सकते हैं.  यहां ऑन्कोलॉजिस्ट से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

बार-बार पेशाब आना इस बीमारी का हो सकता है संकेत, ये लक्षण दिखते ही पुरुष हो जाएं सतर्क
Frequent Urination in Men : प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में यूरिन से जुड़ी समस्याएं बढ़ना आम बात मानी जाती है. कई लोग बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना, पेशाब शुरू करने में दिक्कत होना या पेशाब की धार कमजोर पड़ने जैसी परेशानयों को उम्र का सामान्य असर समझकर टाल देते हैं.  HCG कैंसर हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट मेडिकल डॉ. अभिषेक चरण का कहना है कि कुछ मामलों में ये लक्षण प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं. इसलिए इन बदलावों को हल्के में लेने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

क्या है प्रोस्टेट और क्यों बढ़ता है खतरा?

डॉक्टर बताते हैं कि प्रोस्टेट पुरुषों में मूत्राशय के नीचे स्थित एक छोटी ग्रंथि होती है, जो प्रजनन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. हालांकि, हर पेशाब संबंधी समस्या कैंसर नहीं होती. कई बार बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (BPH) या प्रोस्टेट में संक्रमण और सूजन भी ऐसे ही लक्षण पैदा कर सकते हैं.

प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण

प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती स्टेज में कई बार कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत नजर आ सकते हैं, जैसे-

बार-बार पेशाब आना
रात में कई बार बाथरूम जाना
पेशाब शुरू करने में कठिनाई
पेशाब की धार कमजोर या रुक-रुक कर आना
पेशाब या वीर्य में खून आना
पीठ, कूल्हे या पेल्विस में दर्द

हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है, लेकिन इन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए.

PSA टेस्ट से मिल सकती है शुरुआती जानकारी

डॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति में प्रोस्टेट कैंसर की आशंका होती है तो डॉक्टर PSA (Prostate-Specific Antigen) ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं. हालांकि, PSA का बढ़ा स्तर सिर्फ कैंसर का संकेत नहीं होता. यह बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, संक्रमण या सूजन जैसी स्थितियों में भी बढ़ सकता है. इसलिए सिर्फ PSA रिपोर्ट के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जाती.

कब पड़ती है MRI और बायोप्सी की जरूरत?

यदि शुरुआती जांच में कैंसर की संभावना दिखती है तो डॉक्टर MRI स्कैन और आवश्यकता पड़ने पर प्रोस्टेट बायोप्सी कराने की सलाह देते हैं. बायोप्सी के जरिए प्रोस्टेट ऊतक का नमूना लेकर कैंसर कोशिकाओं की जांच की जाती है, जिससे सटीक निदान संभव हो पाता है.

समय पर जांच है सबसे बड़ा बचाव

डॉ. चरण बताते हैं कि पेशाब से जुड़ी नई या लगातार बनी रहने वाली समस्या को सिर्फ उम्र बढ़ने का असर समझकर टालना सही नहीं है. समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी का सही कारण पता लगाया जा सकता है और यदि कोई गंभीर समस्या मौजूद हो तो उसका जल्द मूल्यांकन और उपचार संभव हो सकता है.

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