प्रोस्टेट कैंसर का नाम सुनते ही कई मरीजों और उनके परिवारों के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि क्या तुरंत ऑपरेशन कराना पड़ेगा? विशेषज्ञों के मुताबिक, हर मरीज में कैंसर की स्थिति एक जैसी नहीं होती और केवल कैंसर की पुष्टि हो जाने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को तुरंत सर्जरी की जरूरत होगी. इलाज का फैसला कैंसर के स्टेज, ग्रेड, PSA स्तर, मरीज की उम्र, सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी के व्यवहार सहित कई कारकों को ध्यान में रखकर किया जाता है.
डॉ. अश्विन माल्या, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जन, सर गंगाराम अस्पताल के मुताबिक, “प्रोस्टेट कैंसर का इलाज तय करने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि बीमारी किस स्टेज पर है और कैंसर कितना आक्रामक है. कुछ कम जोखिम वाले कैंसर में मरीज की नियमित निगरानी की जा सकती है, जबकि कुछ मामलों में सर्जरी या रेडिएशन जैसे उपचार की जरूरत होती है.”
हर मरीज में तुरंत सर्जरी जरूरी नहीं
डॉक्टर अश्विन बताते हैं कि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर में एक्टिव सर्विलांस, वॉचफुल वेटिंग, सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन थेरेपी और बीमारी की स्थिति के अनुसार अन्य उपचार उपलब्ध हैं.
कम जोखिम वाले और प्रोस्टेट तक सीमित कुछ कैंसर में एक्टिव सर्विलांस विकल्प हो सकता है. इसमें मरीज को बिना इलाज के छोड़ना नहीं होता, बल्कि PSA, क्लीनिकल जांच और जरूरत के अनुसार अन्य परीक्षणों के जरिए बीमारी की नियमित निगरानी की जाती है. अगर बीमारी के बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तब उपचार शुरू किया जा सकता है.
सर्जरी कब हो सकती है विकल्प?
अगर कैंसर प्रोस्टेट तक सीमित है और मरीज उपचार के लिए उपयुक्त है, तो रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी एक विकल्प हो सकती है. इस प्रक्रिया में प्रोस्टेट और उससे जुड़े कुछ ऊतकों को हटाया जाता है. कुछ मरीजों में रोबोटिक तकनीक की मदद से भी सर्जरी की जाती है.
डॉ. माल्या कहते हैं, “जब सर्जरी की जरूरत होती है तो मरीज की बीमारी और उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार ओपन, लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक तकनीक पर विचार किया जा सकता है. रोबोटिक सर्जरी कुछ उपयुक्त मरीजों में कम इनवेसिव विकल्प प्रदान कर सकती है, लेकिन तकनीक का चुनाव हमेशा बीमारी और मरीज की स्थिति के आधार पर होना चाहिए.”
डॉ. माल्या की विशेषज्ञता में रोबोटिक प्रोस्टेट सर्जरी और यूरोलॉजिकल कैंसर की सर्जरी शामिल है.
रेडिएशन भी हो सकता है विकल्प
कुछ मरीजों में सर्जरी के बजाय रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है. शुरुआती या स्थानीयकृत बीमारी में बाहरी रेडिएशन और कुछ परिस्थितियों में ब्रैकीथेरेपी जैसे विकल्पों पर विचार किया जाता है. बीमारी के जोखिम और स्टेज के आधार पर रेडिएशन के साथ हार्मोन थेरेपी भी दी जा सकती है.
एक नया रिसर्च आया है कि लोकली एडवांस्ड स्टेज में पहले हॉर्मोन थेरेपी और अन्य दवाइयों की मदद से बीमारी को कंट्रोल करने के बाद, रोबोटिक ऑपरेशन करना बेहतर है.
बीमारी बढ़ने पर उपचार का तरीका बदल सकता है
अगर कैंसर प्रोस्टेट से बाहर फैल चुका है तो केवल सर्जरी ही उपचार का मुख्य विकल्प नहीं रहती. ऐसे मामलों में हार्मोन थेरेपी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या रेडियोफार्मास्यूटिकल उपचार जैसे विकल्प बीमारी की स्थिति के अनुसार इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
मरीज को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
प्रोस्टेट कैंसर का पता चलने के बाद मरीज को केवल PSA की एक रिपोर्ट के आधार पर उपचार का फैसला नहीं करना चाहिए. डॉक्टर आमतौर पर PSA, बायोप्सी रिपोर्ट, Gleason/Grade Group, बीमारी के स्टेज और इमेजिंग सहित कई जानकारियों को मिलाकर उपचार की योजना बनाते हैं. प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में इन कारकों के साथ मरीज की उम्र और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं.
डॉ. अश्विन माल्या का कहना है, “प्रोस्टेट कैंसर का निदान होने के बाद घबराकर तुरंत सर्जरी कराने के बजाय पहले बीमारी की पूरी स्टेजिंग और रिस्क असेसमेंट कराना चाहिए. कुछ मरीजों में निगरानी पर्याप्त हो सकती है, जबकि कुछ में सर्जरी, रेडिएशन या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए इलाज का फैसला व्यक्तिगत रूप से किया जाना चाहिए.”
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