Old Body Syndrome: आज की भागती दौड़ती लाइफस्टाइल में सेहत से जुड़ी समस्याएं युवाओं में भी देखने को मिल रही हैं. खासकर 30 की उम्र के आसपास कई लोग खुद को थका-थका महसूस करते हैं, मसल्स कमजोर, वेट इंबैलेंस, त्वचा बेजान, नींद खराब और एनर्जी कम लगने जैसी शिकायतें सुनने को मिलती हैं. कई लोग तो ऐसा महसूस करते हैं कि उनका शरीर जैसे पहले से बूढ़ा हो गया है, हालांकि वह उम्र के हिसाब से ऐसा नहीं होना चाहिए. इसी अवस्था को कुछ एक्सपर्ट ओल्ड बॉडी सिंड्रोम यानी जवान शरीर में बूढ़े जैसे बदलाव बताते हैं. यहां हम आसान भाषा में समझेंगे कि ये कम उम्र में ही बुढ़ापे जैसे लक्षण क्यों आते हैं, इससे जुड़े कारण क्या हैं और विज्ञान इस पर क्या कहता है.
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार हमारे शरीर की कोशिकाएं और मेटाबॉलिक सिस्टम उम्र के हिसाब से धीरे-धीरे बिगड़ते रहते हैं, लेकिन जिन लोगों की लाइफस्टाइल खराब होती है, उनमें ये बदलाव पहले ही दिखाई देने लगते हैं. करीब 30 की उम्र में ही महसूस होने लगते हैं. यह बदलाव धीरे-धीरे जरूरी अंगों और एनर्जी प्रोडक्शन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं.
जब शरीर की मेटाबॉलिक क्रियाएं सही से नहीं चलतीं, तो थकान, कमजोर मसल्स, हड्डियों की कमी, ब्लड शुगर इंबैलेंस और एनर्जी की कमी जैसी समस्याएं पहले ही दिखने लगती हैं. इस स्थिति को अगर वैज्ञानिक भाषा में देखें तो यह कुछ मायनों में प्रीमेच्योर एजिंग या जल्दी बूढ़े होने के लक्षण जैसा अनुभव होता है, जिसे हम सामान्य भाषा में ओल्ड बॉडी सिंड्रोम कह सकते हैं.
स्टडी क्या बताती है?
अध्ययनों से पता चलता है कि बायोलॉजिकल एजिंग (Biological Aging) का असर हर किसी पर अलग-अलग होता है. कुछ लोगों में यह प्रक्रिया तेजी से शुरू हो जाती है, खासकर अगर खान-पान, नींद, तनाव, फिजिकल एक्टिविटी और लाइफस्टाइल सही न हो. शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, माइटोकॉन्ड्रियल डिस्फंक्शन और साइटोकाइन इन्फ्लेमेशन जैसी प्रक्रियाएं समय से पहले शुरू हो सकती हैं, जिससे एनर्जी प्रोडक्शन और सेल रिपेयरिंग क्षमता घटने लगती है.
एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि उम्र-संबंधी बदलाव जैसे DNA फंक्शन में गिरावट, मेटाबॉलिक कंट्रोल का कमजोर होना और सेलुलर स्ट्रेस अगर जल्दी शुरू हो जाएं तो व्यक्ति खुद को 30 के आसपास कमजोर, थका हुआ और बूढ़ा महसूस कर सकता है.

क्या लाइफस्टाइल एजिंग को तेज करती है?
1. नींद की कमी और तनाव
लगातार कम नींद और मानसिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं और उम्र-संबंधी बदलाव को जल्द शुरू कर सकते हैं.
2. गलत खान-पान
तेजी से बढ़े प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्ब्स, ज्यादा शुगर और ट्रांस फैट शरीर की कोशिकाओं में सेलुलर तनाव बढ़ाते हैं और एनर्जी प्रोडक्शन को प्रभावित करते हैं.
3. कम फिजिकल एक्टिविटी
लम्बे समय तक बैठे रहना, व्यायाम का अभाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से मसल्स कमजोर होती हैं और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे उम्र-संबंधी बदलाव पहले दिखते हैं.
4. मेटाबॉलिक सिंड्रोम
कुछ लोगों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम (जैसे बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल) जल्दी विकसित होता है और यह बायोलॉजिकल एजिंग को आगे बढ़ा सकता है.
30 की उम्र में कौन-कौन सी चीजें महसूस होती हैं?
- थकान और एनर्जी का तेज गिरना
- मसल्स कमजोर होना
- त्वचा की लोच में कमी
- यादाश्त हल्की कमजोर लगना
- स्लीप क्वालिटी घटना
- धीमा मेटाबॉलिज्म
ये सब लक्षण लोग पहले नहीं समझते, लेकिन धीरे-धीरे ये बूढ़े जैसे बदलाव जैसा महसूस होने लगता है.
ओल्ड बॉडी सिंड्रोम क्यों होता है?
बायोलॉजी कहती है कि हमारे शरीर में मॉलिक्यूलर बदलावों और समय के साथ नुकसान जमा होने के कारण बुढ़ापा आता है, इस प्रक्रिया में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, टेलोमेयर का छोटा होना, DNA रिपेयर में कमी और मेटाबॉलिक प्रोसेस का कमजोर होना शामिल है, ये सभी चीजें अगर स्ट्रेस ज्यादा हो तो जल्दी शुरू हो सकती हैं.
30 की उम्र के आसपान थकान महसूस हो तो क्या करें?
- हेल्थ चेक-अप कराएं
- रेगुलर एक्सरसाइज शुरू करें
- बैलेंस डाइट लें
- पर्याप्त नींद लें
- स्ट्रेस मैनेजमेंट
30 की उम्र केवल एक संख्या नहीं है, यह वह समय है जब शरीर में बड़े बदलाव शुरू होते हैं, खासकर अगर लाइफस्टाइल अनुशासित न हो. ओल्ड बॉडी सिंड्रोम को समझना और समय पर सही कदम उठाना जरूरी है ताकि हम अपने शरीर को उम्र के साथ हेल्दी, मजबूत और एनर्जेटिक रख सकें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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