आज दुनिया क्रिस्टियानो रोनाल्डो को फुटबॉल के सबसे फिट और सफल खिलाड़ियों में गिनती है. मैदान पर उनकी रफ्तार, फिटनेस और स्टैमिना लाखों खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि टीनएज में रोनाल्डो एक ऐसी दिल की समस्या से जूझ चुके हैं, जो उनके सपनों पर ब्रेक लगा सकता था. लेकिन अपनी मेहनत और लगन से आज वे फुलबॉल जगत के बादशाह माने जाते हैं.
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब रोनाल्डो 15 साल के थे, जब उन्हें टैचीकार्डिया (Tachycardia) नाम की हार्ट संबंधी समस्या का पता चला था. ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज का हार्ट सामान्य से कहीं ज्यादा तेजी से धड़कने लगता है. समय पर पहचान और इलाज की वजह से वे मैदान पर लौट सके और आगे चलकर फुटबॉल के इतिहास में सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए. रोनाल्डो की इस बीमारी के बारे में हमने सीके बिड़ला हॉस्पितल के कार्डियलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार से बातचीत की है. यहां जानते हैं रोनाल्डो की इस बामीरा के बारे में और कैसे समय तरह इस बीमारी की पहचना करें?
टैचीकार्डिया क्या होती है?
डॉ. कुमार का कहना है कि टैचीकार्डिया का मतलब है कि आराम की स्थिति में भी दिल की धड़कन सामान्य से ज्यादा तेज हो जाए. आमतौर 100 बीट्स प्रति मिनट से अधिक हार्ट रेट को टैचीकार्डिया माना जाता है. हालांकि, सिर्फ तेज धड़कन ही इस बीमारी का संकेत नहीं होती.
कई बार एक्सरसाइज, बुखार, डिहाइड्रेशन, स्ट्रेस या चिंता की वजह से भी दिल तेजी से धड़क सकता है, जो सामान्य प्रतिक्रिया होती है. लेकिन अगर दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से धड़कन असामान्य रूप से तेज हो रही हो, तो यह गंभीर स्थिति बन सकती है.
युवा खिलाड़ियों के लिए क्यों जरूरी है सावधानी?
अक्सर माना जाता है कि एथलीट या खिलाड़ी फिट होते हैं, इसलिए उनके शरीर में होने वाले बदलाव सामान्य होंगे. लेकिन विशेषज्ञ इस सोच को खतरनाक मानते हैं.
अगर किसी युवा खिलाड़ी को बार-बार दिल की धड़कन तेज होने, सांस फूलने, सीने में असहजता या बेहोशी जैसी समस्या होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कुछ हृदय संबंधी रिद्म डिसऑर्डर मामूली हो सकते हैं, लेकिन कुछ गंभीर समस्याओं का संकेत भी देते हैं.
डॉ. कुमार बताते हैं कि विशेष रूप से खेलते समय या एक्सरसाइज के दौरान बेहोश होना हमेशा मेडिकल जांच की मांग करता है. इसे केवल थकान या पानी की कमी मान लेना सही नहीं है.
रोनाल्डो का इलाज कैसे हुआ?
डॉक्टर्स का कहना है कि रोनाल्डो का इलाज कैथेटर एब्लेशन (Catheter Ablation) प्रोसेस से किया गया था. ये एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें पतली कैथेटर ट्यूब को ब्लड वेसेल्स जरिए हार्ट तक पहुंचाया जाता है.
डॉक्टर पहले ये पता लगाते हैं कि असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल कहां से पैदा हो रहा है. इसके बाद विशेष ऊर्जा की मदद से उस छोटे हिस्से को निष्क्रिय कर दिया जाता है, जो समस्या की वजह बन रहा होता है. इससे सिर्फ लक्षणों को दबाया नहीं जाता बल्कि समस्या की जड़ को खत्म करने की कोशिश की जाती है.
एक बड़ी गलतफहमी को समझना जरूरी
कई लोग सोचते हैं कि अनियमित धड़कन का मतलब दिल कमजोर होना है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. डॉ. कुमार बताते हैं कि किसी व्यक्ति का हार्ट पूरी तरह हेल्दी और मजबूत हो सकता है, फिर भी उसे इलेक्ट्रिकल रिद्म से जुड़ी समस्या हो सकती है.
रोनाल्डो का करियर इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सही इलाज के बाद कई लोग नॉर्मल और एक्टिव जीवन जी सकते हैं, यहां तक कि विश्वस्तरीय खेलों में भी हिस्सा ले सकते हैं.
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें?
डॉ. कुमार कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दिल धड़कने का एहसास हो, बिना वजह बेहोशी आए, सीने में दर्द हो या एक्सरसाइज के दौरान सांस फूलने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा परिवार में कम उम्र में अचानक हार्ट डिजीज या फिर मृत्यु का इतिहास भी डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए.
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