दुर्लभ एवं गंभीर हृदय विकार से जूझ रहे मरीज का वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) एवं सफदरजंग अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ. जानकारी के अनुसार, मरीज कंजेनिटली करेक्टड ट्रांसपोजीशन ऑफ द ग्रेट आर्टिरीज (ccTGA) और देक्स्ट्राकार्डिया जैसी बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं थीं. इन दोनों समस्याओं के कारण मरीज का सिस्टमिक एवी वाल्व गंभीर रूप से लीक करने लगा था और हृदय की कार्यक्षमता भी काफी कम हो चुकी थी. ऐसे में डॉक्टरों ने दुनिया में पहली बार एक वयस्क मरीज में रोबोटिक सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) वाल्व का रिप्लेसमेंट किया, जो सफल रहा.
सफदरजंग अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (डॉ.) अनुभव गुप्ता के अनुसार, मरीज दो दुर्लभ जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित था. उसे सीसीटीजीए था, जिसमें हृदय के निचले दोनों कक्ष (वेंट्रिकल) उल्टी स्थिति में होते हैं. इसके कारण सामान्य से कमजोर दायां वेंट्रिकल पूरे शरीर में रक्त पंप करता है, जिससे उस पर अधिक दबाव पड़ता है. दूसरा, देक्स्ट्राकार्डिया में हृदय छाती के बाईं ओर होने के बजाय दाईं ओर होता है. ऐसे में इस जटिल सर्जरी को करने से पहले डॉक्टरों ने सीटी स्कैन की 3D रिकंस्ट्रक्शन तैयार कर पूरी सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई.

डॉक्टरों के अनुसार, आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व सर्जरी छाती के दाहिने हिस्से से की जाती है. लेकिन इस मरीज का हृदय दाईं ओर होने के कारण डॉक्टरों ने पहली बार छाती के बाईं ओर से विशेष रोबोटिक तकनीक अपनाई और सफलतापूर्वक वाल्व बदल दिया.
सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने कई चीजों का विशेष ध्यान दिया. इस सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी (ब्रेस्टबोन) नहीं काटी गई और छोटे-छोटे छेद (पोर्ट्स) के जरिए ऑपरेशन किया गया. डॉक्टर्स ने हाई-डेफिनिशन 3D कैमरा और रोबोटिक आर्म्स की भी मदद ली, जिससे बेहद सटीक सर्जरी की गई. इस तकनीक का फायदा यह हुआ कि खून बहुत कम बहा और संक्रमण का खतरा भी काफी कम रहा. सबसे विशेष बात यह रही कि ऑपरेशन के बाद मरीज को दर्द कम हुआ और रिकवरी सामान्य सर्जरी की तुलना में काफी तेजी से हुई.
भारत के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?
अस्पताल के अनुसार, यह दुनिया का पहला मामला है जिसमें सीसीटीजीए और देक्स्ट्राकार्डिया से पीड़ित मरीज का रोबोटिक लेफ्ट-साइडेड सिस्टमिक AV वाल्व रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया गया है. यह उपलब्धि न केवल वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की विशेषज्ञता और नवाचार को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र अत्याधुनिक रोबोटिक हृदय सर्जरी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
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