हार्ट डिजीज का नाम सुनते ही हम में से कई लोग घबरा जाते हैं. वहीं, जब डॉक्टर किसी मरीज को हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह देते हैं, तो ये चिंता और भी ज्यादा बढ़ जाती है. कई मरीजों के मन में सवाल होता है कि क्या ये सर्जरी बहुत ही ज्यादा गंभीर होती है और क्या इससे जुड़ा जिस्स ज्यादा है. इन सभी सवालों का जवाब हम लेकर आए हैं, इसके लिए हमने सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. अंशुल कुमार जैन से बातचीत की है. डॉ जैन कहते हैं कि ये एक बड़ी सर्जरी जरूर है, लेकिन सही समय पर कराया गया इलाज कई बार मरीज की जान बचा सकता है और लाइफ की क्वालिटी में बड़ा सुधार कर सकता है.
डॉ. अंशुल कुमार जैन बताते हैं कि दिल में मौजूद चार वॉल्व ब्लड को सही दिशा में प्रवाहित करने का काम करते हैं. जब इनमें से किसी वॉल्व में गंभीर खराबी आ जाती है, तो पूरे शरीर में ब्लड फ्लो प्रभावित होने लगता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. ऐसे में हार्ट बॉल्ड सर्जरी कराने की सलाह दी जाती है.
किन परिस्थितियों में पड़ती है वॉल्व रिप्लेसमेंट की जरूरत?
डॉक्टर अंशुल का कहना है कि जब हार्ट वॉल्व बहुत ज्यादा सिकुड़ जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में स्टेनोसिस कहा जाता है या फिर वॉल्व सही तरीके से बंद नहीं होता और खून वापस बहने लगता है, जिसे रिगर्जिटेशन कहा जाता है, तो ऐसी स्थिति में मरीज को सांस फूलना, कमजोरी, पैरों में सूजन, चक्कर आना और हार्ट बीट अनियमित जैसी समस्याएं होने लगती हैं.
शुरुआती चरण में दवाओं और निगरानी से स्थिति को संभाला जा सकता है, लेकिन जब वॉल्व की डैमेज बढ़ जाती है और दिल की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, तब वॉल्व रिप्लेसमेंट ही सबसे प्रभावी ऑप्शन बन जाता है. ये प्रोसेस ओपन हार्ट सर्जरी, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी या कुछ मरीजों में TAVI/TAVR जैसी आधुनिक तकनीकों से की जा सकती है.
क्या ये सर्जरी रिस्क से भरी होती है?
डॉ. अंशुल जैन कहते हैं कि हर बड़ी हार्ट सर्जरी की तरह हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट में भी कुछ रिस्क होते हैं. इनमें संक्रमण, ब्लीडिंग, ब्लड क्लॉट्स, दिल की धड़कन में गड़बड़ी और रेयर मामलों में स्ट्रोक शामिल हो सकते हैं. हालांकि, सर्जरी का फैसला तभी लिया जाता है, जब डॉक्टर्स को लगता है कि इलाज न कराने का खतरा सर्जरी से जुड़े रिस्क से कहीं ज्यादा है.
वॉल्व रिप्लेसमेंट में कितना आता है खर्च
जहां तक खर्च का सवाल है, हमारे देश में हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की लागत हॉस्पिटल, शहर और इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नीक के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. आमतौर पर इसकी लागत 3 लाख से 8 लाख रुपये के बीच होती है.
वहीं, आधुनिक TAVI/TAVR जैसी कैथेटर आधारित प्रोसेस का खर्च 15 लाख से 30 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है.
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