उत्तर प्रदेश के 35 साल के रिफाकत नाम के युवक के लिए पिछले कुछ महीनों से रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल होती जा रही थी. युवक बढ़ई का काम करता है, जो अगर थोड़ी तेज चल ले, तो उसकी सांस फूलने लगती थी. कई बार चक्कर आते और सीने में बेचैनी महसूस होती. शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब परेशानी बढ़ने लगी तो जांच करवाई गई. जांच रिपोर्ट देखकर खुद डॉक्टर भी समझ गए कि ये केस नॉर्मल नहीं है.
हार्ट के दो वॉल्व में थी परेशानी
रिफाकत के हार्ट के 2 वाल्व गंभीर रूप से प्रभावित थे. उन्हें रूमैटिक हार्ट डिजीज की वजह से माइट्रल वाल्व में गंभीर संकुचन (Mitral Stenosis) था, जबकि ट्राइकसपिड वाल्व में भी भारी लीकेज हो रही थी. इसके साथ ही फेफड़ों की ब्लड वेसेल्स में दबाव भी काफी बढ़ चुका था, जिससे स्थिति और जटिल हो गई थी.
डॉक्टर्स ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिलने पर दिल की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित हो सकती थी. यही वजह थी कि दोनों वाल्वों की सर्जरी जरूरी हो गई.
बड़ा चीरा नहीं, छोटे कट से हुआ इलाज
आमतौर पर ऐसे मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी खोलनी पड़ती है, लेकिन रिफाकत के मामले में डॉक्टर्स ने एक अलग रास्ता चुना. शारदाकेयर-हेल्थसिटी के डॉक्टर्स ने सिर्फ 6 सेंटीमीटर के छोटे चीरे के जरिए दुर्लभ टू-वॉल्व मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक कर दी.
सर्जरी के दौरान खराब हो चुके माइट्रल वाल्व को बदला गया, जबकि ट्राइकसपिड वाल्व को रिपेयर किया गया. डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को कम दर्द होता है, रिकवरी अपेक्षाकृत तेज होती है और शरीर पर सर्जरी के निशान भी कम रहते हैं.
आयुष्मान योजना बनी मददगार
रिफाकत जैसे कई मरीजों के लिए जटिल हृदय सर्जरी का खर्च बड़ी चिंता का कारण बन सकता है. लेकिन इस मामले में इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ा.
डॉक्टर का मानना है कि सरकारी योजनाओं के जरिए गंभीर बीमारियों के इलाज तक लोगों की पहुंच बढ़ी है, खासकर उन मरीजों के लिए जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते.
अब बेहतर महसूस कर रहे हैं रिफाकत
सर्जरी के बाद रिफाकत की हालत में तेजी से सुधार हुआ है. जो व्यक्ति कुछ कदम चलने में भी परेशान हो रहा था, वह अब आराम से चल-फिर पा रहा है. डॉक्टरों की निगरानी में उनकी रिकवरी जारी है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है.
इस बारे में रिफाकत का कहना, "पहले सांस फूलने की वजह से काम करना भी मुश्किल हो रहा था. अब पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं. उम्मीद है कि जल्द ही फिर से सामान्य जिंदगी और काम पर लौट सकूंगा."
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