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सुबह आंख खुलते ही फोन हाथ में लेने की आदत है? डॉक्टर से जानिए सेहत और दिमाग पर इसका क्या असर पड़ता है

अलार्म बंद करते ही मोबाइल पर मैसेज, सोशल मीडिया और ईमेल देखने लगते हैं? सुबह उठते ही लंबे समय तक स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत आंखों, दिनचर्या और मानसिक सुकून को प्रभावित कर सकती है. डॉक्टर से जानें इसका क्या असर हो सकता है.

Medically Reviewed By: Dr Niraj Kumar
सुबह आंख खुलते ही फोन हाथ में लेने की आदत है? डॉक्टर से जानिए सेहत और दिमाग पर इसका क्या असर पड़ता है
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हममें से ज्यादातर लोगों का अलार्म अब घड़ी में नहीं बल्कि मोबाइल में बजता है. अलार्म बंद हुआ नहीं कि हमारी उंगलियां खुद-ब-खुद व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम या ईमेल के आइकन पर पहुंच जाती हैं. आंखें ठीक से खुली भी नहीं होतीं और हम दुनिया भर की हलचल अपने दिमाग में भरने लगते हैं. आज के दौर में यह लगभग हर दूसरे इंसान की आदत बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिस्तर छोड़ते ही स्क्रीन से चिपक जाने की यह आदत आपकी सेहत और दिमाग के साथ क्या कर रही है?

इस बारे में शारदाकेयर - हेल्थसिटी के इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ नीरज कुमार का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे आपकी दिनचर्या और मानसिक सुकून को प्रभावित करने लगती है. आइए समझते हैं कि शरीर और दिमाग पर इसका कैसा असर पड़ता है.

सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल देखने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

दिमाग पर अचानक पड़ता है गैर-जरूरी दबाव : रात की अच्छी नींद के बाद जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा दिमाग बेहद शांत अवस्था में होता है. उसे धीरे-धीरे जाग्रत अवस्था में आने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है. लेकिन जैसे ही हम फोन उठाकर ऑफिस के मेल, सोशल मीडिया की पोस्ट या देश-दुनिया की नकारात्मक खबरें देखने लगते हैं, दिमाग तुरंत सतर्क मुद्रा में आ जाता है.

डॉ नीरज कुमार बताते हैं कि उठते ही सूचनाओं की बाढ आ जाने से मस्तिष्क पर एकदम से दबाव पड़ता है. सोशल मीडिया पर दूसरों की चमक-दमक भरी जिंदगी देखना या पेंडिंग काम के मैसेज पढ़ना मन में तनाव और तुलना की भावना पैदा करता है. इससे दिन की शुरुआत शांत माहौल में होने के बजाय बेचैनी और हड़बड़ाहट के साथ होती है.

आंखों में सूखापन और सिर में भारीपन : सुबह-सुबह कम रोशनी या अंधेरे कमरे में अचानक तेज स्क्रीन की लाइट देखना आंखों के लिए सहज नहीं होता. जब आप नींद से जागते ही तेज रोशनी वाली स्क्रीन को घूरने लगते हैं, तो पलकें झपकने की गति धीमी हो जाती है.

इसकी वजह से आंखों में खिंचाव, जलन, सूखापन और कई बार दिन की शुरुआत में ही हल्का सिरदर्द महसूस होने लगता है. हालांकि इससे आंखों को कोई स्थायी नुकसान पहुंचने का सीधा मेडिकल प्रमाण नहीं है, लेकिन सुबह-सुबह यह तनाव आंखों को थका जरूर देता है.

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सुस्त शरीर और बिगड़ी हुई दिनचर्या : फोन हाथ में आने के बाद समय का पता ही नहीं चलता. इंसान सोचता है कि बस दो मिनट देखूंगा, लेकिन रील और मैसेज देखते-देखते बीस से तीस मिनट बिस्तर पर ही निकल जाते हैं. नतीजा यह होता है कि सुबह का पूरा रूटीन लेट हो जाता है.

बिस्तर पर पड़े रहने से शरीर में सुस्ती बनी रहती है. जो समय ताजी हवा लेने, पानी पीने या हल्की स्ट्रेचिंग में जाना चाहिए था, वह स्क्रीन स्क्रॉल करने में चला जाता है. अगर रात को भी देर तक स्क्रीन देखने की आदत है, तो सुबह की यह सुस्ती दिनभर थकान बनकर साथ रहती है.

नुकसान हर किसी के लिए एक जैसा नहीं : डॉक्टर के मुताबिक, सुबह फोन देखना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है. इसका असर इस बात पर तय होता है कि आप उठकर क्या देख रहे हैं और कितनी देर देख रहे हैं. अगर कोई सिर्फ एक जरूरी कॉल का जवाब दे रहा है, तो कोई दिक्कत नहीं है. परेशानी तब शुरू होती है जब आप आंख खुलते ही अंतहीन स्क्रोलिंग में खो जाते हैं.

दिन की शुरुआत को कैसे बनाएं बेहतर?

  1. सुबह जागने के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट तक फोन को हाथ न लगाएं.
  2. उठते ही सबसे पहले गुनगुना या सादा पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेट हो सके.
  3. खिड़की या बालकनी में जाकर प्राकृतिक रोशनी में दो मिनट खड़े हों, इससे दिमाग स्वाभाविक रूप से एक्टिव होता है.
  4. थोड़ा टहलें, हल्की स्ट्रेचिंग करें और फिर अपने जरूरी काम निपटाएं.

दिन की शुरुआत सुकून से होगी, तो पूरा दिन अपने आप ऊर्जावान और तनावमुक्त बीतेगा.

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