- भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जल्द ही बनने की संभावना है
- यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत की व्यापार वार्ता इस साल के अंत तक पूरी होगी
- भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच सभी संबंध सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं
भारत में यूरोपियन यूनियन के राजदूत जीन-एरिक पैकेट का कहना है कि जल्दी ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत और 27 देशों वाले यूरोपियन यूनियन के बीच वार्ता चल रही है. इस साल के अंत तक दोनों के बीच कारोबारी समझौता हो जाएगा. उनका कहना था कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच सबकुछ सामान्य ही चल रहा है. इसे लेकर जल्दी ही सहमति बन जाएगी और साल के अंत तक इस पर मुहर भी लग सकती. यह डील ऐसे समय में अहम होगी, जब भारत के अमेरिका से रिश्ते पहले जैसे नहीं हैं. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर काफी टैक्स लगा रखा है. ऐसे में भारतीय उत्पादों को यूरोपियन यूनियन के 27 देशों का बाजार मिलना अहम होगा.
भारत और यूरोप चाहते हैं कि उनके बीच फ्री ट्रेड जारी रहे. उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे के भरोसेमंद साझीदार हैं और हमें सप्लाई चेन को बनाए रखना है. दोनों देश न सिर्फ कारोबार कर रहे हैं बल्कि निवेश में भी बढ़ावा हुआ है. हमें भरोसा है कि इस साल के अंत तक भारत के साथ यूरोपियन यूनियन का एक अहम समझौता हो जाएगा.
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यूरोप को रूस से कितना खतरा? क्या बोले राजदूत
डॉ. जास्पर वीक ने इस दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि रूस का यूक्रेन पर चल रहा है हमला उस तक ही सीमित नहीं है. भविष्य में उसका खतरा पूरे यूरोप को भी झेलना पड़ सकता है. इसलिए हमने यूक्रेन को मदद की है और भविष्य में भी हम इस चुनौती का सामना करना जारी रखेंगे.
चीन को लेकर ऑस्ट्रेलिया ने जताई चिंता, बोले- टेंशन की बात तो है
ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने चीन को लेकर कहा कि हमारे गहरे कारोबारी संबंध हैं. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी हम चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को लेकर चिंतित हैं. उसने जिस तरह समुद्र में भी चैलेंज पेश किया है, उसे लेकर भी चिंता होती है. उन्होंने कहा कि हम चीन के साथ कारोबार भी कर रहे हैं, लेकिन जहां हमारी चीन के साथ असहमति है, उसे भी जाहिर कर रहे हैं. यदि कोई एक देश इस तरह अपनी सैन्य शक्ति में इजाफा करेगा और उन्हें अलग-अलग जगह तैनात करेगा तो चिंता होती है.
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