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रसोई में खड़े खड़े सूज रहे हैं पैर? नीली नसों को सिर्फ दिनभर की थकान समझने की भूल मत कीजिए

दिनभर रसोई या घर के काम में लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में भारीपन, दर्द और सूजन महसूस हो सकती है लेकिन अगर पैरों पर नीली-बैंगनी और उभरी हुई नसें दिखने लगें, तो इसे सिर्फ थकान न समझें जानिए वैरिकोज वेन्स के संकेत और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

Medically Reviewed By: Dr Atampreet Singh
रसोई में खड़े खड़े सूज रहे हैं पैर? नीली नसों को सिर्फ दिनभर की थकान समझने की भूल मत कीजिए
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सुबह चाय चढ़ाने से लेकर दोपहर की रोटियां और फिर रात के बर्तन मांजने तक, घर की औरतों का आधा जीवन रसोई के पत्थर के आगे खड़े-खड़े बीत जाता है. दिनभर खड़े रहने के बाद शाम तक पैरों में भारीपन, पिंडलियों में दर्द और टखनों में सूजन महसूस होना आम बात लग सकती है. कई महिलाएं इसे दिनभर के काम की थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. अक्सर सब यही सोचते हैं कि चलो दिनभर की थकान है, थोड़ा बाम मल लेंगे या सरसों का तेल चुपड़कर सो जाएंगे तो कल सुबह तक ठीक हो जाएगा. 

लेकिन पैरों में नीली या बैंगनी नसें उभर रही हैं और साथ में भारीपन या सूजन भी रहती है, तो इसे केवल थकान मानना ठीक नहीं. ये वैरिकोज वेन्स के संकेत हो सकते हैं. लंबे समय तक एक जगह खड़े रहना इसकी परेशानी बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकता है.

पैरों की नसें आखिर क्यों टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती हैं?

हमारे शरीर की बनावट ही कुछ ऐसी है कि नसों को नीचे पैरों से खून वापस ऊपर दिल की तरफ धकेलना पड़ता है. अब यह काम गुरुत्वाकर्षण के उलटे चलता है.

पैरों की नसों में छोटे-छोटे वाल्व होते हैं, जो खून को वापस दिल की ओर जाने में मदद करते हैं. जब ये वाल्व ठीक से काम नहीं करते तो खून नसों में जमा होने लगता है और नसें उभरी हुई दिखाई दे सकती हैं.

जब आप घंटों बिना हिले-डुले एक ही जगह खड़ी रहती हैं, तो खून का सारा बोझ इन्हीं नसों पर आ पड़ता है. लंबे समय तक लगातार खड़े रहने से पैरों की नसों पर दबाव बढ़ सकता है. जिन लोगों में नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते, उनमें खून जमा होने और नसों के उभरने की समस्या हो सकती है.

उम्र बढ़ना, अधिक वजन, गर्भावस्था, लंबे समय तक खड़े या बैठे रहना और परिवार में वैरिकोज वेन्स का इतिहास जैसे कई कारण इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं.

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कब घरेलू नुस्खे छोड़कर अस्पताल भागना चाहिए?

शारदाकेयर - हेल्थसिटी में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. आतमप्रीत सिंह बताते हैं कि रसोई में काम करने वाली महिलाओं में यह दिक्कत बहुत आम है, पर वे इसे तब तक छुपाती हैं जब तक चलना दूभर न हो जाए.

डॉ. आतमप्रीत सिंह कहते हैं- 

"शुरुआत हमेशा हल्की खुजली, पैरों में भारीपन और शाम होते-होते टखनों की सूजन से होती है. औरतें इसे आम दर्द मानकर सहती रहती हैं. असली आफत तब आती है जब नसों का रंग गहरा पड़ने लगे और पैरों की चमड़ी काली या सख्त होने लगे. अगर इसे समय पर न संभाला जाए, तो वहां ऐसे घाव बन जाते हैं जो जल्दी भरते नहीं. सबसे ज्यादा चौकन्ना तब होना चाहिए जब अचानक किसी एक ही पैर में तेज दर्द उठ जाए, पैर एकदम लाल पड़ जाए और हाथ लगाने पर गर्म लगे. यह खून का थक्का यानी डीप वेन थ्रॉम्बोसिस हो सकता है, जो जानलेवा भी साबित होता है. ऐसे में गर्म पानी की सिकाई करने के बजाय सीधे वैस्कुलर सर्जन के पास जाना चाहिए."

लंबे समय तक खड़े रहना पड़े तो पैरों का कैसे रखें ध्यान?

रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव से पैरों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है.

रसोई में एक ऊंचा स्टूल रखें: स्लैब के सामने लगातार खड़े रहने की कसम मत खाइए. जब प्याज-टमाटर काटना हो, मटर छीलनी हो या आटा गूंथना हो, तो आराम से स्टूल पर बैठकर निपटाइए. हर आधे घंटे में दो मिनट के लिए बैठना भी नसों को बड़ी राहत दे देता है.

खड़े-खड़े पंजों पर उठें: जब दूध उबल रहा हो या कुकर की सीटी का इंतजार हो, तो पंजों के बल ऊपर उठिए और फिर एड़ियों पर आइए. पिंडलियों की मांसपेशियों को सक्रिय रखने वाली हल्की गतिविधि रक्त प्रवाह में मदद कर सकती है.

रात को तकिया लगाना न भूलें: जब सोने लगें, तो पैरों के नीचे दो तकिए इस तरह रख लें कि पैर छाती से थोड़े ऊंचे रहें. पैरों को ऊपर रखने से कुछ लोगों में सूजन और भारीपन जैसे लक्षणों से राहत मिल सकती है.

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डॉक्टर से पूछकर कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें :  वैरिकोज वेन्स में डॉक्टर कुछ लोगों को कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह दे सकते हैं. ये पैरों पर नियंत्रित दबाव डालकर रक्त प्रवाह में मदद करती हैं और दर्द, भारीपन या सूजन जैसे लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती हैं. सही प्रकार और दबाव वाली स्टॉकिंग्स चुनने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है.

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