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मौन व्रत: सिर्फ धर्म ही नहीं, सेहत के लिए भी है 'सुपरफूड', दूर भागेंगी मानसिक बीमारियां

Mental health tips : जानिए कैसे मौन व्रत न केवल मानसिक तनाव दूर करता है बल्कि याददाश्त और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद है.

मौन व्रत: सिर्फ धर्म ही नहीं, सेहत के लिए भी है 'सुपरफूड', दूर भागेंगी मानसिक बीमारियां
Maun Vrat benefits : यह आर्टिकल मौन व्रत के शारीरिक और मानसिक फायदों पर आधारित है.

Maun vrat ke fayde : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम चारों तरफ से शोर-शराबे से घिरे हैं. ट्रैफिक का शोर, मोबाइल की रिंगटोन और दिन भर की फालतू बातें, ये सब न केवल हमारे शरीर को थका देती हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी हमें चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त बना देती हैं. ऐसे में 'मौन व्रत' यानी कुछ देर शांत रहना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. सनातन धर्म में मौन को सबसे बड़ी तपस्या माना गया है. इस साल 18 जनवरी को मौनी अमावस्या है. धार्मिक नजरिए के साथ-साथ अगर साइंस की बात करें, तो मौन रहना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है.

मौन सिर्फ चुप्पी नहीं, एक इलाज है

सदियों से आध्यात्मिक परंपराओं में मौन को आंतरिक स्वतंत्रता और सच्ची खुशी का मार्ग माना गया है. मौन केवल बाहरी शोर की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सक्रिय और पूरी चेतना के साथ अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है. यह हमें बाहरी अशांति से दूर कर आंतरिक दुनिया की ओर ले जाता है.

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद की मूल भावना में मौन को मन की शांति, संयम, और ऊर्जा संरक्षण के रूप में महत्व दिया जाता है, जो योग और सात्विक जीवनशैली का हिस्सा है. आयुर्वेद के अनुसार, अधिक बोलना वात दोष को बढ़ाता है, जिससे मन अशांत होता है, तनाव बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है. मौन रहने से मन शांत रहता है, जिससे सत्व गुण बढ़ता है. ऊर्जा बचती है, एकाग्रता और ध्यान की क्षमता बढ़ती है. तनाव, क्रोध पर नियंत्रण और ब्लड प्रेशर के साथ हृदय स्वास्थ्य भी सुधरता है.

भगवद्गीता में भी मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है, जिसके अनुसार, मौन व्रत मानसिक तप का रूप है, जो शरीर-मन के संतुलन के लिए लाभकारी है. यह वाणी, संयम से ओजस की रक्षा करता है और सेहत को मजबूत बनाता है.

विज्ञान भी है मौन का कायल

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि शोर प्रदूषण न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि तनाव बढ़ाता है और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है. वहीं, मौन का दिमाग पर गहरा और हीलिंग प्रभाव पड़ता है. एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पाया गया कि रोजाना दो घंटे की मौन रहने से ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ावा देती है, जिससे याददाश्त, भावनाओं और सीखने पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

मौन रहने के बड़े फायदे

तनाव से छुट्टी

मौन रहने से स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

गहरी नींद

जो लोग रोज कुछ समय शांत रहते हैं, उन्हें अनिद्रा की समस्या नहीं होती.

फोकस और क्रिएटिविटी

शांति में दिमाग ज्यादा बेहतर तरीके से सोच पाता है और नए विचार आते हैं.

इमोशनल बैलेंस 

छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ना और गुस्सा करना बंद हो जाता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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