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Exam Pressure: पढ़ाई और नंबरों के बोझ तले टूटते बच्चे, जानें माता-पिता कैसे बनें सहारा

Parenting Tips: आज के समय में पढ़ाई को लेकर के कॉम्पटीशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है. जिसकी वजह से बच्चों में अच्छे नंबर, अच्छी रैंक और नामी कॉलेज में एडमिशन लेने की दौड़ में बच्चे बहुत ही ज्यादा दवाब महसूस करने लगते हैं. कई बार वो अपने डर, असफलता की चिंता और मन में चल रही उलझन की वजह से वो ऐसे कदम उठा लेते हैं जो पूरी तरह से गलत होते हैं.

Exam Pressure: पढ़ाई और नंबरों के बोझ तले टूटते बच्चे, जानें माता-पिता कैसे बनें सहारा
बच्चों को सपोर्ट देने के लिए क्या करें पेरेंट्स.

Parenting Tips: बिहार के आरा जिले के नवादा थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है. पढ़ाई, परीक्षा के स्ट्रेस में आकर के एक छात्रा ने अपनी जान दे दी है. जरा सोचिए उस परिवार पर क्या बीता होगा. लेकिन ये त्रासदी सिर्फ एक घर की नहीं है बल्कि पूरे समाज की है. ये सवाल है उस शिक्षा व्यवस्था पर जो इन दिनों बच्चों पर इतना दबाव बना रही है कि लोग अपनी जान ले लेते हैं. यहां पर सवाल ये उठता है कि हम बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहे हैं?

आज के समय में पढ़ाई को लेकर के कॉम्पटीशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है. जिसकी वजह से बच्चों में अच्छे नंबर, अच्छी रैंक और नामी कॉलेज में एडमिशन लेने की दौड़ में बच्चे बहुत ही ज्यादा दवाब महसूस करने लगते हैं. कई बार वो अपने डर, असफलता की चिंता और मन में चल रही उलझन की वजह से वो ऐसे कदम उठा लेते हैं जो पूरी तरह से गलत होते हैं. लोग क्या कहेंगे या असफल होने का डर उनको हर समय सताता रहता है.

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क्यों बढ़ रहा है रिजल्ट का दबाव?

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  • तुलना: कई बार कुछ पेरेंट्स अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं. “देखो, फलां बच्चे के इतने नंबर आए…”
  • सोशल मीडिया पर लोग अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर करते हैं. जिसे  देखकर दूसरे को अपनी असफलता ज्यादा लगने लगती है.
  • बच्चे पर अपने माता-पिता के साथ ही परिवार के दूसरे सदस्यों और रिश्तेदारों की उम्मीदों का भी दबाव रहता है.
  • बच्चों के मन में यह डर बैठ जाता है कि अगर नंबर कम आए तो वे सबकी नजरों में गिर जाएंगे. यही डर धीरे-धीरे तनाव और डिप्रेशन का रूप ले सकता है.

बच्चों के साथ कैसे रहें मां-बाप

  • बच्चों के नंबर देखकर उनको कम नंबर की वजह से कुछ ना कहें, आप उनकी मेहनत की तारीफ करें. उनकी कोशिश ज्यादा मायने रखती है.
  • हर बच्चा अलग-अलग होता है. इसलिए अपने बच्चे की तुलना कभी किसी दूसरे के बच्चे से ना करें. ऐसा करने से आत्मविश्वास टूट सकता है.
  • बच्चा अगर टेंशन में हो और शांत रहें तो आप उनको बिठाकर बात करें. उनकी बातों को सुनें.
  • बच्चों को समझाएं कि जिंदगी में एक परीक्षा सब कुछ तय नहीं करती. असफलता से सीखकर आगे बढ़ना ही असली जीत है.
  • अगर बच्चा बहुत ज्यादा चुप रहने लगे, गुस्सा करे या उदास दिखे, तो काउंसलर की मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं.
  • सबसे जरूरी बात बच्चों को ये भरोसा दिलाएं की उनके माता-पिता हर हाल में उनके साथ हैं. चाहे रिजल्ट जैसा भी हो.

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लेखक के बारे में
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दीक्षा सिंह
Sub Editor
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