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छात्रों के लिए क्यों फायदेमंद है गोरक्षासन? पढ़ाई में बढ़ेगा फोकस, तनाव और चिंता होगी कम

आज की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली न केवल शरीर को थका रही है, बल्कि दिमाग पर भी भारी पड़ रही है. तनाव, एकाग्रता की कमी, कमर दर्द और कई शारीरिक समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में योगासन के रोजाना अभ्यास से इन परेशानियों से छुटकारा या काफी राहत मिल सकती है. चलिए आपको बताते हैं एक ऐसे ही योगासन के बारे में.

छात्रों के लिए क्यों फायदेमंद है गोरक्षासन? पढ़ाई में बढ़ेगा फोकस, तनाव और चिंता होगी कम
छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद है गोरक्षासन.

आज की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली न केवल शरीर को थका रही है, बल्कि दिमाग पर भी भारी पड़ रही है. तनाव, एकाग्रता की कमी, कमर दर्द और कई शारीरिक समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में योगासन के रोजाना अभ्यास से इन परेशानियों से छुटकारा या काफी राहत मिल सकती है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमोटेड गोरक्षासन या काउहर्ड पोज ऐसा ही एक प्रभावी आसन है, जो तन और मन दोनों को मजबूत बनाता है.

गोरक्षासन करने के फायदे

आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोरक्षासन न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि एकाग्रता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आता है. यह खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या तनाव से जूझ रहे हैं.

गोरक्षासन के अभ्यास से शरीर को एक-दो नहीं बल्कि कई लाभ मिलते हैं. यह शरीर के लचीलापन को बढ़ाता है, खासकर कूल्हों, घुटनों और टखनों में. एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार करता है, जो छात्रों के लिए खासतौर पर लाभदायी है.

यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधी रखने में मदद करता है. पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देता है. गोरक्षासन तनाव, चिंता कम करता है और मन को शांत रखता है. यही नहीं यह मूत्र संबंधी विकारों में लाभकारी माना जाता है और रक्त संचार को सुचारू बनाता है.

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कैसे करें गोरक्षासन

एक्सपर्ट के अनुसार, गोरक्षासन के लिए सबसे पहले जमीन पर दंडासन की मुद्रा में बैठें. दोनों पैरों को मोड़ें और तलवों को आपस में जोड़ते हुए घुटनों को जितना संभव हो जमीन की ओर नीचे दबाएं ताकि फर्श को स्पर्श कर सकें. रीढ़ की हड्डी और गर्दन को पूरी तरह सीधा रखें, कंधे ढीले छोड़ दें. सामान्य तरीके से सांस लेते हुए इस मुद्रा में जितनी देर तक आराम से रह सकें रहें. अभ्यास पूरा होने पर धीरे-धीरे पैर सीधे करके आराम की मुद्रा में लौट आएं.

इस अभ्यास को लेकर सावधानियां बरतनी भी जरूरी है. गंभीर घुटने, कूल्हे या कमर की समस्या वाले लोग डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही अभ्यास करें. गर्भवती महिलाओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए. सुबह खाली पेट अभ्यास करने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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