थोड़ा-थोड़ा आलू और थोड़ी अदरक सी दिखने वाली अरबी पेट (gut) के लिए एक सुपरफूड मानी जाती है. अरबी का वैज्ञानिक नाम कोलोकेसिया एस्कुलेंटा (Colocasia esculenta) है. 'जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल फार्माकोलॉजी' में छपी एक रिसर्च से पता चलता है कि अरबी, जिसे पचाने में भारी माना जाता है, असल में पेट के लिए बहुत फायदेमंद है. पेट के माइक्रोबायोम को संतुलित बनाए रखने के लिए अरबी जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन जरूरी है. लोग अक्सर पेट फूलने या पाचन संबंधी दिक्कतों के लिए अरबी खाने को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है.
अरबी में मौजूद 'रेजिस्टेंट स्टार्च' (resistant starch) छोटी आंत में पचता नहीं है. जब यह स्टार्च कोलन (बड़ी आंत के हिस्से) तक पहुंचता है, तो यह पेट में मौजूद गुड बैक्टीरिया के लिए ईंधन का काम करता है.
अरबी पेट के माइक्रोबायोम में कैसे मदद करती है?
NDTV ने फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक दीपक से बात की. उन्होंने बताया, "अरबी, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोलोकेसिया एस्कुलेंटा कहा जाता है, एक ऐसा प्रीबायोटिक फूड है जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन यह आंतों के इकोसिस्टम को कई तरह से फायदा पहुंचाती है."
रेसिस्टेंट स्टार्च टाइप 2 और 3 की भरपूर मात्रा
डॉ. अभिषेक दीपक बताते हैं, "पकी हुई अरबी की 100 ग्राम सर्विंग से लगभग 4-5 ग्राम रेसिस्टेंट स्टार्च मिलता है, जिसमें मुख्य रूप से RS2 होता है." जानिए यह पेट के लिए कैसे फायदेमंद है:
यह हिस्सा छोटी आंत में पचे बिना सीधे कोलन तक पहुंचता है. वहां पहुंचने पर, बिफिडोबैक्टीरियम, लैक्टोबैसिलस, फेकलिबैक्टीरियम प्राउस्निट्जी और रोजबुरिया जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया इसे शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFA) - जैसे कि ब्यूटायरेट, एसीटेट और प्रोपियोनेट में बदल देते हैं. ब्यूटायरेट कोलन की कोशिकाओं (कोलोनोसाइट्स) के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है. यह ऑक्लुडिन, क्लॉडिन-1 और ZO-1 जैसे टाइट जंक्शन प्रोटीन के एक्सप्रेशन को बढ़ाता है, जिससे आंत की सुरक्षात्मक परत (इंटेस्टाइनल बैरियर) मजबूत होती है.
घुलनशील फाइबर
डॉ. अभिषेक दीपक बताते हैं, "अरबी का चिपचिपापन उसमें मौजूद म्यूसिलेज पॉलीसेकेराइड और अरबिनोगैलेक्टन के कारण होता है. यह गाढ़ा घुलनशील फाइबर पेट खाली होने की गति को धीमा करता है, पेट भरा हुआ महसूस कराता है.
प्रीबायोटिक पॉलीफेनोल्स
डॉ. अभिषेक दीपक बताते हैं, "रंगीन अरबी की किस्मों में एंथोसायनिन, क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड होता है. ये पॉलीफेनोल्स ऊपरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बहुत कम अवशोषित होते हैं. कोलन में, गॉर्डोनिबैक्टर (Gordonibacter) जैसे जीव इन्हें यूरोलिथिन-A और संबंधित बायोएक्टिव मेटाबोलाइट्स में बदल देते हैं.
अरबी खाने से सबसे ज्यादा फायदा किसे होता है?
- अरबी उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकती है जिन्हें पहले से ही पेट या आंत से जुड़ी कोई बीमारी है, या फिर जिन्हें ये समस्याएं हैं:
- कमजोर पाचन वालों के लिए ये अच्छा ऑप्शन है. इसमें मौजूद स्टार्च सब्जी को पचाने में आपके पेट की मदद कर सकता है.
- जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम कर रहे हैं, उन्हें अरबी जैसी पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी को चुनना चाहिए.
- जो लोग फाइबर-युक्त डाइट अपना रहे हैं, उन्हें अपनी डाइट के चुनाव में सावधानी बरतनी चाहिए और अरबी जैसे सुरक्षित और पोषक तत्वों से भरपूर विकल्पों को चुनना चाहिए.
डॉ. अभिषेक दीपक फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट हैं. उन्हें पेट, लिवर, पित्त नली और अग्न्याशय से जुड़ी जटिल बीमारियों की जांच और इलाज का 10 साल से ज्यादा का अनुभव है.
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