झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच के बीच गिरफ्तार TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने CID के सामने पूरे मामले का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है. अभय तिवारी ने CID को बताया है कि अभ्यर्थियों को एजेंट और बिचौलियों के जरिए इस नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था. उसने बताया है कि उसने आदित्य पांडे के जरिए अभ्यर्थी उपलब्ध कराया. इसके बाद आदित्य पांडे ने रामवीर सिंह डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद, डॉ. एनिमा हसदा और एल. खियांग्ते से संपर्क किया और अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने की व्यवस्था की गई. अभय के बयान के मुताबिक, इस तरह की सेटिंग के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये लिए जाते थे.
तीन चयनित अधिकारियों के नाम का जिक्र
अभय तिवारी ने अपने बयान में पुलिस अधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक शैलेश सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक के नाम लिए हैं. अभय ने CID को बताया है कि इन तीनों अभ्यर्थियों के लिए कोडरमा निवासी लालू यादव एजेंट के तौर पर काम कर रहा था. उसके मुताबिक, लालू यादव इन अभ्यर्थियों को उसके पास लेकर आया और इसके बाद रामवीर सिंह के माध्यम से अजीता भट्टाचार्य के बोर्ड में इंटरव्यू की सेटिंग कराई गई.

JPSC चेयरमैन सहित तीन सदस्यों का नाम आया सामने
अभय तिवारी ने अपने बयान में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, आयोग के सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. एनिमा हसदा के अलावा TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार समेत कई लोगों का नाम लिया है. अभय तिवारी के बयानों से जेपीएससी भर्ती परीक्षाओं में होने वाली सेटिंग का पूरा रैकेट अब सामने आ गया है.
इंटरव्यू बोर्ड को लेकर भी बड़ा दावा
अभय तिवारी ने CID को बताया है कि जिस अभ्यर्थी की जिस सदस्य या अधिकारी के साथ सेटिंग होती थी, उसे उसी से जुड़े इंटरव्यू बोर्ड में भेजने की व्यवस्था की जाती थी. अभय ने बताया है कि इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थी का कोड डिकोड कराने की व्यवस्था की जाती थी. उसके मुताबिक, इंटरव्यू से एक दिन पहले रामवीर सिंह के माध्यम से कोड डिकोड कराया जाता था और इंटरव्यू के दिन संबंधित अभ्यर्थी को अध्यक्ष या अजीता भट्टाचार्य के बोर्ड में भेजा जाता था.
JPSC में धांधली का ऐसा था पूरा नेटवर्क?
अभय तिवारी के बयान को क्रम में रखें तो जांच के सामने आया नेटवर्क इस तरह काम करता था.
अभय तिवारी ने CID को बताया है कि ज्यादातर अभ्यर्थी किसी न किसी सदस्य या प्रभावशाली व्यक्ति से संपर्क और पैसे की व्यवस्था करने के बाद इंटरव्यू में शामिल होते थे.

JPSC में पैसे के दम पर नौकरी देने का नेटवर्क.
मनीष कुमार और गौतम कुमार का भी नाम
अभय तिवारी ने CID को बताया है कि पुलिस उपाधीक्षक मनीष कुमार की सेटिंग अजीता भट्टाचार्य के पैरवीकार रामवीर के माध्यम से कराई गई. वहीं, गौतम कुमार की सेटिंग पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार के माध्यम से कराने की बात भी अभय ने अपने बयान में कही है.
किसके जरिए किस तक पहुंचता था पैसा?
अभय तिवारी ने CID को बताया है कि इंटरव्यू की रकम अलग-अलग लोगों के जरिए संबंधित व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी. अभय के मुताबिक, अजीता भट्टाचार्य से जुड़ी रकम मोरहाबादी निवासी अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम तक पहुंचाई जाती थी. वहीं, एल. खियांग्ते तक पैसे पहुंचाने के लिए धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति का इस्तेमाल किया जाता था. अभय ने जमाल अहमद के संबंध में हजारीबाग के कई एजेंटों के जरिए अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने की बात भी CID को बताई है.

CDPO परीक्षा का भी जिक्र
अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में CDPO परीक्षा का भी जिक्र किया है. उसने बताया है कि इस परीक्षा में TDPL की ओर से अभ्यर्थी उपलब्ध कराए गए थे और प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये का रेट तय था. अभय ने बताया है कि एक अभ्यर्थी का इंटरव्यू बोर्ड तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के पास था. रामवीर सिंह से बातचीत के बाद अध्यक्ष तक 15 लाख रुपये पहुंचाने की बात भी उसने कही है.
अजीता भट्टाचार्य के बोर्ड के लिए 10 लाख रुपये
अभय तिवारी ने CID को बताया है कि काजल भारती का इंटरव्यू बोर्ड अजीता भट्टाचार्य के पास था. इसके लिए अजीता भट्टाचार्य पीए ब्रजराम को 10 लाख रुपये दिए गए. अभय ने यह भी बताया है कि ब्रजराम का पतंजलि कोचिंग के संचालक रवि कुमार के साथ संपर्क था.
JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते भी हो चुके गिरफ्तार
बता दे कि JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद आयोग के तीन सदस्यों डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनीमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दिया था. अब CID ने इन तीनों पूर्व सदस्यों को समन भेजकर पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया था.
CID डॉ. अजीता भट्टाचार्य, और डॉ. जमाल अहमद से पूछताछ कर चुका है. सीआईडी जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, आयोग की कार्यप्रणाली और पूर्व अध्यक्ष से जुड़े मामलों को लेकर पूछताछ की है.
अब CID के सामने सबसे बड़ा सवाल
अभय तिवारी के बयान में कई अधिकारियों, JPSC सदस्यों, एजेंटों और अभ्यर्थियों के नाम लिए गए हैं. अब CID इन दावों की पुष्टि के लिए पैसों के लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, इंटरव्यू रिकॉर्ड और अन्य गवाहों की जांच कर रही है.
यह भी पढ़ें - 70 लाख तक में बिकती थी JPSC जॉब, SC-ST को डिस्काउंट... CID के सामने तोते की तरह बोला अभय तिवारी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं