Tuberculosis (TB) Cure Through AI: टीबी (तपेदिक या ट्यूबरक्लोसिस) के दवा-प्रतिरोध (Drug Resistance) की पहचान अब एआई के जरिए सटीक और तेजी से होगी. यह दावा भारतीय वैज्ञानिकों ने एक शोध के आधार पर किया है, जिसमें बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक ने टीबी के लाइन प्रोब असे (LPA) स्ट्रिप्स की रिपोर्ट पढ़ने में 92% से 100% तक सटीकता हासिल की है. इस शोध को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय क्षय रोग अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIRT) ने किया है, जो इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में प्रकाशित हुआ है.
शोधकर्ताओं के अनुसार, एआई तकनीक से की मदद से कई प्रमुख दवा-प्रतिरोध जीन (जैसे rpoB, katG, inhA) की पहचान लगभग पूरी तरह सही रही, केवल 3 से 9 प्रतिशत तक मामलों में डॉक्टरों को सुधार करने की जरूरत पड़ी. इसके अलावा सिस्टम ने अलग-अलग लैब और अलग-अलग स्कैनर पर भी समान रूप में सही परिणाम रहे.

यह तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है?
आईसीएमआर-एनआईआरटी की वैज्ञानिक और प्रमुख शोधकर्ता सुचारिता कन्नप्पन मोहनवेल ने कहा कि मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट (MDR) और रिफैम्पिसिन-रेसिस्टेंट (RR) टीबी की जल्द पहचान रोगियों के उपचार के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है. मौजूदा समय में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत प्रथम-पंक्ति (FL) और द्वितीय-पंक्ति (SL) दवाओं के लिए एलपीए जांच रिपोर्ट मैन्युअल तरीके तैयार की जाती है, जिसमें मानवीय त्रुटियों की संभावना ज्यादा है. ऐसे में शोधकर्ताओं ने फास्टर रीजन्स कनवोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (FR-CNN), डिटेक्शन ट्रांसफॉर्मर (DETR) और हायरार्किकल न्यूरल नेटवर्क (HNN) को मिलाकर एक ऐसी एआई तकनीकि विकसित की इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती है.
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कैसे किया गया अध्ययन?
वैज्ञानिकों ने साल 2023 से 2024 के बीच कुल 10 इंटरमीडिएट रेफरेंस लैबोरेट्री (IRLs) से प्राप्त 2,810 प्रथम-पंक्ति (FL) और द्वितीय-पंक्ति (SL) के 241 एलपीए स्ट्रिप्स (LPA Strips) का विश्लेषण किया. इसमें सिर्फ उन्हीं सैपल को लिया गया जिनमें आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण (IQC) सही था और माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्यूलोसिस (Mycobacterium Tuberculosis) की पुष्टि हुई थी.
टीबी उन्मूलन कैंपेन को मिलेगा बल
सुचारिता कन्नप्पन मोहनवेल ने बताया कि यह प्रणाली देशभर में जांच के तरीके को सामान करने के साथ रिपोर्टिंग तेज और सटीक करेगी इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी की जल्दी पहचान होने के साथ इलाज में समय पर शुरू किया जा सकेगा.
शोध में शामिल आर. राधाकृष्णन ने कहा कि विशेषज्ञ निगरानी के साथ इस तकनीक का उपयोग देशभर की लैब में टीबी निदान प्रणाली को अधिक मजूबत, प्रभावी और विश्वसनीय बना सकती है. यह तकनीक आने वाले समय में देश में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान को गति देगी.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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