How to Make Jaggery: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने एक बार फिर देसी खानपान और हाइजीन को लेकर बहस छेड़ दी है. इस वीडियो में भारत के गांवों में गुड़ बनाने की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई है. गुड़ को आमतौर पर चीनी का हेल्दी विकल्प माना जाता है और यह हमारी परंपरा, स्वाद और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. लेकिन, जब इसी गुड़ को बनते हुए अनहाइजीन हालात में देखा जाता है, तो लोगों के मन में सवाल उठना लाजमी है. वीडियो देखने के बाद कुछ लोग इसे नेचुरल और देसी बता रहे हैं, तो कुछ इसे सेहत के लिए खतरनाक मान रहे हैं.
वीडियो में क्या दिखाई गया है?
वीडियो में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति गन्ने को निचोड़ने वाली मशीन में बड़े ही अनहाइजीन तरीके से गन्ना डाल रहा है. गन्ने का रस एक गंदगी से भरे रास्ते से गुजरते हुए आगे बढ़ता है. रास्ते में साफ-सफाई का कोई खास इंतजाम नजर नहीं आता. इसके बाद रस एक बड़े बर्तन या चाशनी में इकट्ठा होता है, जहां से झाग को अलग किया जाता है. फिर इस रस को खुले में तेज आंच पर पकाया जाता है. जैसे-जैसे रस गाढ़ा होता है और उसमें क्रीमी टेक्सचर आता है, उसे भी बिना किसी हाइजीन प्रोटोकॉल के संभाला जाता है. अंत में उसमें रंग मिलाया जाता है और गुड़ को टुकड़ों में जमने के लिए रख दिया जाता है.
सोशल मीडिया पर उठे सवाल?
इस पूरी प्रक्रिया को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी काफी दिलचस्प हैं. एक यूजर ने कमेंट किया, "ये हेल्दी नहीं, हेल्दी कैंसर है", यानी दिखने में देसी और प्राकृतिक लगने वाला यह गुड़ असल में सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं दूसरे यूजर का मानना है कि चूंकि यह सब तेज गर्मी में पकाया जा रहा है, इसलिए बैक्टीरिया की ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. एक तीसरे यूजर ने बीच का रास्ता निकालते हुए लिखा कि प्रक्रिया तो ठीक थी, बस रंग नहीं मिलाना चाहिए था.
क्या है असल सच्चाई?
असल में सच्चाई इन तीनों बातों के बीच कहीं छिपी है. यह सही है कि गुड़ को गर्म करने से कई बैक्टीरिया मर जाते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हाइजीन पूरी तरह नजरअंदाज कर दी जाए. गंदगी, धूल, कीड़े और खुले वातावरण में बनने वाला खाना कई तरह के संक्रमण और पेट से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है. वहीं रंग मिलाना भी एक बड़ा सवाल है, क्योंकि कई बार सस्ता और केमिकल वाला रंग इस्तेमाल किया जाता है, जो लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.
गुड़ अपने आप में आयरन, मिनरल्स और एनर्जी का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन तभी जब वह साफ-सुथरे और सुरक्षित तरीके से बनाया गया हो. यह वीडियो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि देसी होने का मतलब हमेशा सेफ होना नहीं है. परंपरा और स्वास्थ्य दोनों का संतुलन जरूरी है. अगर गांवों में गुड़ बनाने की प्रक्रिया में थोड़ी साफ-सफाई, बेहतर बर्तन और रंग से परहेज किया जाए, तो यह देसी मिठास सच में सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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