आजकल सेहतमंद रहने के लिए लोग अपनी डाइट में कई तरह के बदलाव कर रहे हैं. इनमें रागी यानी फिंगर मिलेट का नाम सबसे ऊपर आता है. सुबह का नाश्ता हो या रात का खाना, लोग रागी की रोटी, डोसा, उपमा और चीला बड़े चाव से खा रहे हैं. इसे वजन घटाने, डायबिटीज कंट्रोल करने और हड्डियों को मजबूती बनाने वाला सुपरफूड माना जाता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या रोज रागी खाना वाकई हमारी सेहत के लिए अच्छा है या फिर ज्यादा खाने से कोई नुकसान भी हो सकता है? आइए आज इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
रागी को क्यों माना जाता है सेहत का खजाना?
डॉ. सैयद अहमद खान कहते हैं कि रागी सेहत के लिए बहुत गुणकारी है. यह भारत के सबसे पुराने अनाजों में से एक है और सूखे मौसम में भी आसानी से उग जाता है. रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है. यही वजह है कि यह खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में बेहद मददगार है. इसके अलावा, इसमें फाइबर यानी रेशा बहुत ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. यही कारण है कि वजन घटाने और शुगर लेवल को कंट्रोल करने वाले लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं.

क्या हर रोज रागी खाना चाहिए?
ज्यादातर हेल्दी लोग अपने रोजमर्रा के खान-पान में रागी को शामिल कर सकते हैं, लेकिन किसी एक ही अनाज पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है. डॉ. सैयद अहमद खान, जो कि यूनानी चिकित्सा के वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं, बताते हैं कि यूनानी और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी संतुलित आहार पर जोर दिया जाता है.
उनका यह भी यही कहना है कि रागी पचने में थोड़ी भारी होती है. इसलिए जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर या संवेदनशील है, उन्हें रोज-रोज रागी खाने में परेशानी हो सकती है. अगर कोई व्यक्ति बिना किसी आदत के अचानक बहुत ज्यादा मात्रा में फाइबर वाली रागी खाने लगे, तो पेट फूलना, भारीपन या अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
क्या रागी खाने से पथरी का खतरा बढ़ सकता है?
यह एक बहुत आम सवाल है. रागी में कैल्शियम तो भरपूर होता है, लेकिन साथ ही इसमें नेचुरल ऑक्सलेट्स भी पाए जाते हैं. डॉक्टर खान कहते हैं कि जब ये ऑक्सलेट्स शरीर में कैल्शियम के साथ मिलते हैं, तो किडनी स्टोन यानी पथरी का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि हर किसी को रागी खाना बंद कर देना चाहिए. जिन लोगों को पहले से कैल्शियम ऑक्सलेट की पथरी की शिकायत रही है, वे ज्यादा मात्रा में रागी खाने से पहले अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह जरूर लें.
आयुर्वेद के नजरिए से रागी की तासीर-
आयुर्वेद के अनुसार, रागी की तासीर सूखी होती है. रागी में सूखापन होता है, इसलिए जब भी आप इसे अपनी डाइट में शामिल करें, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. दिनभर में सही मात्रा में पानी पीने से न सिर्फ पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, बल्कि पेट से जुड़ी दिक्कतें भी दूर रहती हैं.
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एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. सैयद अहमद खान यूनानी चिकित्सा के वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं. वे नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के यूनानी मेडिकल सेंटर में पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एवं हेड रह चुके हैं. वर्तमान में वे दरीयागंज स्थित सदर यूनानी क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं और श्वसन रोगों, पाचन संबंधी समस्याओं तथा लाइफस्टाइल डिजीज के यूनानी उपचार में विशेष अनुभव रखते हैं.
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