Jaya Ekadashi Vrat Parana Time: आज जया एकादशी है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है. यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. मान्यता है कि आज के दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ऐसे में लोग सच्चे मन से श्री हरि का ध्यान कर उपवास रखते हैं. अब, आपने भी ये उपवास रखा है, तो यहां हम आपको पारण का समय और तरीका बता रहे हैं.
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जया एकादशी का पारण कब करें?
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है. हालांकि, द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई को हरि वासर कहा जाता है, जिसमें पारण करना वर्जित माना गया है. इसलिए हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है.
द्रिक पंचांग के अनुसार, जया एकादशी का पारण 30 जनवरी 2026, गुरुवार को किया जाएगा. इस दिन सूर्योदय सुबह लगभग 7:10 बजे होगा और द्वादशी तिथि का समापन करीब 11:09 बजे होगा. ऐसे में व्रत खोलने का सबसे शुभ समय सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे के बीच रहेगा. यदि कोई व्यक्ति सुबह इस समय पारण नहीं कर पाता है, तो उसे दोपहर के बाद ही उपवास खोलना चाहिए.
जया एकादशी व्रत की पारण विधि- पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे पीले वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं.
- भगवान को चंदन, पीले फूल, पीले अक्षत, तुलसी दल, पीले फल और मिठाई अर्पित करें.
- पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और व्रत के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें.
- इसके बाद 7 तुलसी के पत्ते ग्रहण कर व्रत का पारण करें.
पारण के बाद आप सात्विक भोजन कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले अनाज का सेवन न करें. अनाज केवल द्वादशी समाप्त होने के बाद ही खाना उचित माना जाता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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