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मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मिठास होगी महंगी? 50 प्रतिशत कम पैदावार की आशंका

लीची की कम पैदावार से जहां लोगों का जायका खराब होगा. वहीं किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है.

मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मिठास होगी महंगी? 50 प्रतिशत कम पैदावार की आशंका
मुजफ्फरपुर की लीची
Bihar News:

बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची केवल देश ही नहीं विदेशों में भी मशहूर है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मिठास देश के प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक चखते है. इतना ही नहीं विदेशों में भी शाही लीची के मिठास की खूब डिमांड है. लेकिन अफसोस इस बात है कि जहां मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मिठास महंगी होने वाली है. वहीं इसकी पैदावर की कमी का आशंका जाहिर की गई है. बताया जा रहा है कि अन्य वर्षों की अपेक्षा 50% कम पैदावार होने का अनुमान है.

शाही लीची की मिठास इस वर्ष आम लोगों को पड़ महंगी सकती है, इसका कारण इसकी उपज को लेकर है. क्योंकि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस बार लीची के फसल की कम पैदावार है. इस वजह से इस बार शाही लीची के मिठास को चखने के लिए लोगों को अपनी जेव ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी.

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लीची अनुसंधान केंद्र के निर्देशक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

मामले को लेकर NDTV से बात करते हुए लीची अनुसंधान केंद्र के निर्देशक विकास कुमार दास ने बताया दिसंबर माह में लीची का पौधा स्टेबल होती है. जबकि उसी समय सामान्य से 2 डिग्री टेंपरेचर ज्यादा रहने के कारण इस बार लीची के पौधों में नए पते जल्दी आ गए. जिस कारण पौधों में मंजर नहीं आ पाया है. उन्होंने बताया कि अन्य वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष 40% कम पैदावार आकी जा रही है और जब पौधे में मंजर आए तब अचानक बारिश और ओलावृष्टि के कारण 10% फसल को नुकसान पहुंचा है, यानी कुल फसल की अगर बात कर ली जाए तो अन्य वर्षो की अपेक्षा 50% कम पैदावार लीची की आकी जा रही है.

वहीं उन्होंने बताया कि तकरीबन 10 हजार हैक्टर में मुजफ्फरपुर में लीची का उत्पादन होता है, जो बिहार के कुल उत्पादन का 33% हिस्सा है. तो कहीं ना कहीं पहले पौधे में कम मंजर आना और फिर फसल में मंजर आने के बाद बारिश और ओलावृष्टि यानी बे मौसम की मार से इस बार लीची की फसल अन्य वर्षों की अपेक्षा काफी कम होगी.

किसानों को होगा भारी नुकसान

लीची की कम पैदावार से जहां लोगों का जायका खराब होगा. वहीं किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्योंकि लीची मौसमी फसल है जो साल में एक बार होता है. जबकि डिमांड ज्यादा होने की वजह से इससे किसानों को काफी मुनाफा भी होता है.

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