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41 साल तक लंबित रही हत्या के दोषी की अपील, सुप्रीम कोर्ट ने दे दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी व्यक्ति को अंतरिम जमानत दे दी है. उस शख्स की बेल की अर्जी 41 साल से लंबित पड़ी थी.

41 साल तक लंबित रही हत्या के दोषी की अपील, सुप्रीम कोर्ट ने दे दी अंतरिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विजय सिंह को 41 साल बाद दी बेल (फाइल फोटो)
  • 72 साल के विजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है
  • दोषी विजय सिंह की अपील 41 साल तक कोर्ट में लंबित पड़ी थी
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रखा था बरकरार
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के  मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की अपील को 41 सालों तक लंबित रखने पर गंभीर चिंता व्यक्त की और दोषी को अंतरिम जमानत दे दी. अदालत ने इस मामले में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और कहा है कि इतनी लंबी देरी न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. 

सजा के वक्त 28 साल का था विजय 

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ विजय सिंह नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. दरअसल विजय सिंह को वर्ष 1985 में कानपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने अपने भाई की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. हत्या की घटना 1983 की थी. सजा के समय विजय सिंह की उम्र 28 साल थी.

ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार

सजा के खिलाफ उसने तत्काल इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की. अपील लंबित रहने के दौरान उसे जमानत मिल गई और वो लगभग 40 साल तक जमानत पर बाहर रहा. हालांकि, उसकी अपील पर फैसला आने में चार दशक से अधिक का समय लग गया. अंततः 9 फरवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

दादा बन चुका है विजय सिंह 

याचिका में कहा गया  कि विजय सिंह अब 72 साल का है  और अपनी पूरी जवानी, मध्य आयु तथा वृद्धावस्था एक सजायाफ्ता होने की छाया में बिताई है. याचिका में कहा गया कि चार दशकों से अधिक समय तक उसकी अपील लंबित रही. आज वो दादा बन चुका है और उम्र से जुड़ी कई बीमारियों से जूझ रहा है. यह याचिका उसके लिए न्याय पाने का अंतिम अवसर है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का क्या था फैसला 

वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अपील खारिज होने के बाद विजय सिंह केवल तीन महीने जेल में रहा है और जमानत के दौरान उसका आचरण पूरी तरह संतोषजनक रहा है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट तय करेगी साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने 20 पेज के फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है और इसलिए दोषसिद्धि तथा सजा सही है . हालांकि, फैसले में यह नहीं बताया गया कि अपील लगभग 41 सालों तक लंबित क्यों रही.

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