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रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का बड़ा कारनामा, पहली बार क्वांटम मेजरमेंट की तय सीमा को किया पार

बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के वैज्ञानिकों ने क्वांटम फिजिक्स की दुनिया में वो कर दिखाया है, जिसने वैश्विक विज्ञान जगत को हैरान कर दिया है. जानिए क्या है यह 1.17 का जादुई आंकड़ा और कैसे यह हमारी तकनीक बदल देगा.

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का बड़ा कारनामा, पहली बार क्वांटम मेजरमेंट की तय सीमा को किया पार

क्या आप जानते हैं कि विज्ञान की दुनिया में एक ऐसा प्रयोग हुआ है जिसने हमारी सोच को ही बदल दिया है. बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के वैज्ञानिकों ने लैब में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. उन्होंने पहली बार 'क्वांटम मेजरमेंट' को एक के पार, यानी 1.17 पर माप लिया है. 

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है? आम जिंदगी में हम किसी भी चीज की होने की उम्मीद यानी संभावना को शून्य से एक के बीच ही आंकते हैं. जैसे- सिक्का उछालेंगे तो हेड आने की उम्मीद आधी यानी 0.5 होगी. लेकिन क्वांटम फिजिक्स की इस दुनिया में वैज्ञानिकों ने इस तय सीमा को ही तोड़ दिया है. 

क्या है यह पूरा मामला?

इसे आसान शब्दों में समझें. मान लीजिए एक लेजर लाइट से रोशनी की छोटी बूंदें यानी फोटॉन्स (Photons) निकलकर एक डिटेक्टर की तरफ जा रही हैं. रास्ते में उनके पास जाने के कई अलग-अलग मार्ग यानी 'रास्ते' हो सकते हैं. क्वांटम मेजर थ्योरी (QMT) के अनुसार, ये फोटॉन्स सिर्फ एक सीधे रास्ते पर नहीं चलते, बल्कि वो एक साथ कई रास्तों से होकर गुजर सकते हैं. इस थ्योरी को लैब के भीतर सच कर दिखाया है RRI की पीएचडी छात्रा संचारी चक्रवर्ती और सीनियर प्रोफेसर उर्वसी सिन्हा की टीम ने. 

Indian scientists raman research institute solving quantum physics experiment

लैब में कैसे हुआ यह प्रयोग?

इस प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का 'इवेंट-फिल्टर' तैयार किया. उन्होंने लेजर किरणों के अलग-अलग रास्तों को समझने के लिए प्रकाश की दिशा यानी पोलराइजेशन (Polarisation) का इस्तेमाल किया. पहले तो उन्होंने इन रास्तों की पहचान की और फिर बाद में उस पहचान को मिटा दिया ताकि रोशनी की किरणें आपस में टकराकर तरंगों की तरह एक-दूसरे पर असर डाल सकें. जब ये तरंगें आपस में मिलीं, तो उन्होंने एक-दूसरे के असर को इतना बढ़ा दिया कि जो नतीजा सामने आया, उसने साधारण गणित के नियमों को पीछे छोड़ दिया. वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि यह आंकड़ा 1.18 के करीब आएगा, और लैब में उन्हें लगभग 1.17 का मान हासिल भी हो गया.

तो क्या साधारण गणित के नियम गलत साबित हो गए?

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. वैज्ञानिकों ने रोशनी के टकराने की साधारण संभावना (Probability) को एक से ऊपर नहीं मापा है. वह तो अब भी एक के नीचे ही है. लेकिन जो चीज एक के पार गई है, वह है 'क्वांटम मेजर', जिसमें रोशनी के अलग-अलग रास्तों के आपस में मिलने और टकराने का असर भी शामिल होता है. 

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भविष्य के लिए इसके क्या मायने हैं?

प्रोफेसर उर्वसी सिन्हा का कहना है कि भले ही इस खोज से क्वांटम फिजिक्स के सारे अनसुलझे सवाल हल न हुए हों, लेकिन इसने प्रयोगों के जरिए नए दरवाजे जरूर खोल दिए हैं. आने वाले समय में इस 'इवेंट-फिल्टर' तकनीक का इस्तेमाल सुपरफास्ट क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम मेजरमेंट को और भी सटीक बनाने में किया जा सकेगा.

यह खोज इसलिए भी भावुक करने वाली है क्योंकि इस थ्योरी को रचने वाले महान वैज्ञानिक राफेल सोर्किन का, इस रिसर्च पेपर के मंजूर होने के तुरंत बाद, 12 सितंबर 2026 को निधन हो गया. लेकिन उनका यह सपना आज हमारी लैब में सच साबित हो चुका है.

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