सफर में सुकून की तलाश हर किसी को होती है, लेकिन जब यह सफर एक बुरे सपने में बदल जाए तो कैसा लगेगा? बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी और जानी-मानी कर्नाटक गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. ट्रेन के सफर में मिले इस कड़वे अनुभव को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसने देश में पब्लिक बिहेवियर और 'नागरिक समझ' (Civic Sense) पर एक नई बहस छेड़ दी है.
शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपने 'X' हैंडल पर आपबीती सुनाते हुए लिखा कि उनका हालिया ट्रेन सफर बेहद तनावपूर्ण और परेशान करने वाला रहा. सफर के दौरान उनके कोच में करीब 40 अधेड़ उम्र के पुरुषों का एक ग्रुप सवार हुआ. 56 सीटों वाले इस डिब्बे के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए इस ग्रुप ने पूरी यात्रा के दौरान जमकर शोर मचाया.
I had a traumatic train ride today. It is very sad to see how people do not respect public spaces enough. When we are in the public, we should not shout or even talk loudly and disrespect every individual's personal space in Public. As artists, we have a 100 thoughts running. And…
— Sivasri Skandaprasad 🇮🇳 (@ArtSivasri) September 24, 2026
एक कलाकार के तौर पर मौन और शांत रहने वाली शिवश्री ने लिखा, "एक कलाकार के नाते हमारे दिमाग में सैकड़ों विचार चलते रहते हैं और हम शांति में ही बेहतर काम कर पाते हैं. लेकिन कल्पना कीजिए कि 56 सीटों वाले कोच में 40 लोग आ जाएं और लगातार 5 घंटे तक बिना रुके इतनी जोर-जोर से बातें करें कि दूसरों का बैठना दूभर हो जाए."
"पब्लिक प्लेस का सम्मान कब सीखेंगे?"
शिवश्री ने देश में लोगों के बीच नागरिक समझ की कमी पर गहरी चिंता जताई. उनका कहना था कि भारत में एक अनकहा नियम बन चुका है कि अगर कोई बड़ा ग्रुप शोर मचा रहा है, तो बाकी बचे मुट्ठी भर लोगों को चुपचाप सब कुछ सहना पड़ता है. आप उन्हें टोक नहीं सकते.
परेशान होकर शिवश्री ने टीटीई (TTE) से अपनी सीट किसी दूसरे कोच में बदलने की गुहार लगाई, लेकिन ट्रेन पूरी तरह पैक होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका.
टीटीई ने समझाने की कोशिश की, तो उड़ाया मजाक
हद तो तब हो गई जब लगातार बकवास कर रहे और ठहाके लगा रहे इस ग्रुप के आठ लोग ताश (UNO) खेलने बैठ गए. शिवश्री की शिकायत पर जब टीटीई ने उन्हें टोका, तो वे मान तो गए, लेकिन कुछ ही देर बाद टीटीई ने जब उनसे हल्के-फुल्के अंदाज में हुड़दंग का कारण पूछा, तो पूरे ग्रुप ने ठहाका लगाया. उन्होंने टीटीई से ही मजे लेते हुए कह दिया- "सर, आप भी आ जाओ, साथ में खेलते हैं." इसके बाद टीटीई को चिढ़ाने के लिए उन्होंने जानबूझकर बॉलीवुड के गाने गाना शुरू कर दिया.

"हम सब हार गए नागरिकता का खेल"
शिवश्री ने बेहद निराशा के साथ अपने पोस्ट का अंत किया. उन्होंने लिखा, "यहां बात यह नहीं है कि कौन जीता या कौन हारा. सच तो यह है कि उनके साथ-साथ, एक भारतीय के रूप में मैं भी 'सिविक सेंस' का यह खेल हार गई. आखिर एक देश के रूप में हम सार्वजनिक स्थानों पर अपना व्यवहार कब सुधारेंगे? भगवान ही इस देश को बचाए."
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