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मालिक ने दिया वफादारी का इनाम, सुधर गया ड्राइवर और हाउसमेड का बुढ़ापा, लोगों की भर आई आंखें

रोज हमारा घर और गाड़ी संभालने वाले स्टाफ के बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा? इसी दर्द को समझते हुए एक शख्स ने अपने ड्राइवर और मेड के लिए जो किया, उसने सोशल मीडिया पर सबका दिल जीत लिया है.

मालिक ने दिया वफादारी का इनाम, सुधर गया ड्राइवर और हाउसमेड का बुढ़ापा, लोगों की भर आई आंखें

हम रोज अपने घरों में आराम से चाय की चुस्की लेते हैं, क्योंकि कोई हमारे लिए झाड़ू-पोछा कर रहा होता है. हम दफ्तर के लिए समय पर निकल पाते हैं, क्योंकि ड्राइवर गाड़ी साफ करके हमारा इंतजार कर रहा होता है. लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि हमारे जीवन को आसान बनाने वाले इन लोगों का बुढ़ापा कैसे कटेगा? इनके पास न तो कोई पेंशन होती है और न ही पीएफ (Provident Fund). इसी गंभीर सवाल का जवाब तलाशते हुए सोशल मीडिया पर एक शख्स ने कुछ ऐसा किया है, जिसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है और हर किसी को एक नई सीख दी है.

जब नरेश को सताया अपने कर्मचारियों के बुढ़ापे का दर्द

बात नरेश नाम के एक शख्स की है, जो खुद को रोड सेफ्टी और सुरक्षित ड्राइविंग का पैरोकार बताते हैं. नरेश ने महसूस किया कि उनके घर को संभालने वाली मेड (कामवाली बाई) और उनकी गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर के पास बुढ़ापे के लिए कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं है. असंगठित क्षेत्र (unorganised sector) के इन कर्मचारियों के पास न तो पेंशन की सुविधा है और न ही पीएफ की.  

नरेश ने केवल इस बारे में सोचा ही नहीं, बल्कि तुरंत एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने अपने इन दोनों ही वफादार कर्मचारियों के लिए अपने पास से 25,000-25,000 रुपए का निवेश कर दिया.  

सरकारी स्कीम का लिया सहारा: 10 साल में डबल होगा पैसा

नरेश ने इन दोनों कर्मचारियों के लिए पोस्ट ऑफिस की सुरक्षित और सरकारी योजना 'किसान विकास पत्र' (KVP) में खाता खुलवाया. इस स्कीम की खासियत यह है कि इसमें लगाया गया पैसा एक निश्चित समय (लगभग 10 साल) में दोगुना हो जाता है.

नरेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "मैंने दोनों के नाम 25,000-25,000 रुपए से किसान विकास पत्र शुरू किया है. यह पैसा 10 साल में डबल हो जाएगा. मैं सोच रहा हूं कि हर साल अपनी तरफ से इतनी ही रकम इनके खाते में जमा करता रहूं."

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"शुरुआत 10 हजार से भी हो सकती है..."

नरेश ने समाज के सक्षम लोगों से एक बेहद भावुक अपील भी की है. उन्होंने लिखा, "अगर आपके पास भी ऐसे वफादार कर्मचारी हैं, तो उनके रिटायरमेंट और बुढ़ापे के बारे में जरूर सोचिए. शुरुआत बड़ी रकम से नहीं, बल्कि सिर्फ 10 हजार रुपए से भी की जा सकती है. यह छोटी सी मदद उनके बुढ़ापे का बहुत बड़ा सहारा बनेगी."

नरेश के इस नेक काम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है. लोग कह रहे हैं कि हमारे समाज को आज ऐसे ही संवेदनशील लोगों की जरूरत है. वाकई, अपने वफादार कर्मचारियों को सिर्फ 'मजदूरी' नहीं, बल्कि 'सुरक्षा' देना ही सच्ची इंसानियत है.

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