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⁠23 साल की उम्र में बचपन का सपना पूरा करना वाले Gen Z ने बताया पहाड़ों में रहने का खर्च, कहा- 'मैं 0 रेंट देता हूं'

इंस्टाग्राम पर 'लाइफ इन द माउंटेन' नाम की सीरिज के 7वें पार्ट में जतिन ने इन सब बातों का खुलासा किया है. ये सीरिज सोशल मीडिया पर इतनी पॉपुलर है कि कुछ ही घंटे में वीडियो पर व्यूज लाखों में चले जाते हैं.

⁠23 साल की उम्र में बचपन का सपना पूरा करना वाले Gen Z ने बताया पहाड़ों में रहने का खर्च, कहा- 'मैं 0 रेंट देता हूं'
सोशल मीडिया पर लोग जतिन की कहानी को 'मुसाफिर कैफे' मूवी से रिलेट कर रहे हैं.
Instagram@jatinvadhnanii

Viral Video: मात्र 23 साल की उम्र में अपने बचपन का सपना पूरा करने वाले जतिन वधनानी का एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. 36 सेकंड के इस वीडियो में वे अपनी पहाड़ों वाली लाइफ के बारे में बात कर रहे हैं और अपने डेली एक्सपेंसेस बताकर लोगों को चौंका रहे हैं. जतिन का कहना है कि वे मात्र 7 से 8 हजार रुपये महीने के खर्च पर पहाड़ों में रह रहे हैं. 

कहां खर्च करते हैं ये पैसा?

जतिन का कहना है कि पहाड़ों में सामान ताजा और किसी भी शहर के मुकाबले सस्ता है, इसीलिए राशन का खर्च महीने में लगभग 5000 रुपये आता है. वहीं, बाहर खाने-पीने पर लगभग 2000 से 3000 रुपये खर्च हो जाते हैं, क्योंकि कभी-कभी घर से बाहर निकलना भी जरूरी होता है. बाकी पैसे घूमने-फिरने में खर्च होते हैं. अब किराए की बात पर आते हैं. मैं अपने दोस्त की प्रॉपर्टी में रहता हूं, जिसका रेंट जीरो है, और मेरे ये पैसे बच रहे हैं.

स्टार्टअप के फाउंडर हैं जतिन

जतिन के मुताबिक, वे हिमाचल प्रदेश के नग्गर से वर्कअवे नाम का एक स्टार्टअप चलाते हैं, जहां वे रिमोट वर्कर्स और फाउंडर्स को एक हफ्ते के लिए होस्ट करते हैं. रिमोट वर्कर, फ़्रीलांसर और फ़ाउंडर यहां एक हफ्ते के लिए आते हैं, पहाड़ों से काम करते हैं और यहां से जाने पर उन्हें पहले से ज्यादा क्लियरिटी मिलती है.

यहां देखें पूरा वीडियो:-

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को लोग 'मुसाफिर कैफे का जतिन वाला वर्शन' बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग जतिन से उनकी लॉकेशन पूछ रहे हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जतिन के बताए गए बजट पर सवाल उठा रहे हैं.

एक यूजर ने कहा, 'क्या तुम सिर्फ बाहर खाने पर 2 हजार खर्च कर रहे हो? पिछली बार जब मैं मनाली में था तो बाहर खाने पर मेरा रोज का खर्च इतना ही था. तुम ऐसा क्या अलग कर रहे हो?'

दूसरी यूजर ने कहा, 'मुझे पता है कि पहाड़ों पर रहना सस्ता है, लेकिन प्लीज बढ़ा-चढ़ाकर बातें न करें. इससे लोगों को सच में बुरा लगता है. मैं मनाली और उसके आस-पास कुछ महीनों से ज्यादा समय तक रही हूं और वहां रहना इतना भी आसान नहीं है. आपने आने-जाने के खर्च और बिजली के बारे में कुछ नहीं बताया. साथ ही, राशन और बाहर खाना भी उतना सस्ता नहीं है.'

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