- रूस और उत्तर कोरिया सुदूर पूर्व में एक समानांतर सड़क ब्रिज बना रहे हैं जो जल्द तैयार होने की उम्मीद है
- रेल की तुलना में सड़क मार्ग से ट्रक परिवहन पर सैटेलाइट निगरानी रखना कठिन है जिससे गुप्त सैन्य आवाजाही संभव है
- अप्रैल 2023 तक उत्तर कोरिया ने लगभग पंद्रह हजार सैनिक रूस को भेजे थे और तीस हजार सैनिक भेजने की संभावना है
रूस और उत्तर कोरिया एक 'ब्रिज प्रोजेक्ट' पर काम कर रहे हैं. जल्द ही इसके पूरे होने की उम्मीद है. मगर इसके कारण यूक्रेन खौफ में है. सालों तक, रूस के किनारे पर बसा खसान एक बहुत दूर-दराज की जगह से ज्यादा कुछ नहीं था. देश के सुदूर पूर्व में बसे इस गांव में 500 से भी कम लोग रहते हैं, जो मॉस्को से 5,600 मील (9,012 किलोमीटर) से भी ज्यादा दूर है. यहीं पर रूस की उत्तर कोरिया के साथ सिर्फ 10.5 मील लंबी सीमा लगती है. खसान ही वह एकमात्र रूसी बस्ती है, जो इस छोटी सी सीमा पर बसी है. 1959 से, यहां तुमेन नदी पर 'कोरिया-रूस फ्रेंडशिप रेलवे ब्रिज' बना हुआ है, जो दोनों देशों के बीच जमीन के रास्ते एकमात्र संपर्क का जरिया है.
पुतिन-किम जोंग का क्या है मकसद
हाल के सालों में, रूस और उत्तर कोरिया कुछ ही सौ गज की दूरी पर एक समानांतर सड़क ब्रिज बना रहे हैं. यह ब्रिज अब तय समय से पहले ही बनकर तैयार होने वाला है, जिससे कीव में चिंता बढ़ गई है कि रूस इसका इस्तेमाल चुपके से उत्तर कोरियाई सैनिकों को यूक्रेन में लड़ाई के मोर्चे तक लाने के लिए कर सकता है. यूक्रेन का मानना है कि इस ब्रिज का असली मकसद मिलिट्री सहयोग को बढ़ाना है, खासकर यूक्रेन युद्ध के लिए उत्तर कोरियाई सैनिकों और हथियारों की आवाजाही को आसान बनाना. रेल ट्रांसपोर्ट की तुलना में सड़क मार्ग से होने वाले ट्रांसपोर्ट पर सैटेलाइट से नजर रखना ज्यादा मुश्किल है. ट्रेनें तय पटरियों पर ही चलती हैं और सामान चढ़ाने-उतारने का काम सिर्फ तय रेल हब पर ही हो सकता है. इसके उलट, ट्रक लगभग कहीं भी सामान लोड या अनलोड कर सकते हैं और उन पर सैटेलाइट से नजर रखना लगभग नामुमकिन है.
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30,000 सैनिक आ सकते हैं रूस
पिछले साल के बीच में दक्षिण कोरियाई, यूक्रेनी और अमेरिकी सूत्रों से मिली अनौपचारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस के युद्ध में मदद के लिए 14,000 से 15,000 सैनिक भेजे थे. इनमें से कई सैनिकों को रूस के कुर्स्क इलाके में तैनात किया गया था, जबकि उस इलाके के कुछ हिस्सों पर यूक्रेन का कब्जा था. उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार भी सप्लाई किए हैं. कुछ दिन पहले ही, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने X पर चेतावनी दी थी कि रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में 30,000 तक अतिरिक्त उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात कर सकता है.
उत्तर कोरिया को क्या फायदा
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि बेहतर सैन्य साझेदारी से उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन को फायदा हो रहा है. नए ब्रिज की वजह से रूस चुपके से उत्तर कोरिया तक संसाधन पहुंचा सकता है. जेलेंस्की ने लिखा, "रूस, उत्तर कोरिया को आधुनिक युद्ध लड़ने, अपने हथियारों को बेहतर बनाने और उन्हें इस्तेमाल करने का वास्तविक युद्ध अनुभव हासिल करने में मदद कर रहा है." जानकारों का यह भी मानना है कि मॉस्को की युद्ध की कोशिशों में मदद करने के बदले उत्तर कोरिया को रूस से कुछ परमाणु तकनीक मिल सकती है. जेलेंस्की ने अपनी X पोस्ट में चेतावनी दी कि इन सभी बातों को मिलाकर देखा जाए तो, ये घटनाक्रम "एशिया में उन सभी लोगों के लिए खतरा पैदा करते हैं जो उत्तर कोरियाई मिसाइलों की रेंज में रहते हैं."
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